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[1] यीशु मसीह का अलौकिक ज्ञान, जिसे परमेश्‍वर पिता ने उन्हें (यीशु को) इसलिए दिया कि वे, अपने सेवकों को उन बातों को दिखाएँ जो जल्द और अचानक होने वाली हैं। उन्हों ने अपना स्वर्गदूत भेजकर इन्हें अपने सेवक यूहन्ना को बताया,

[2] जिसने परमेश्‍वर पिता के जिस वचन को सुना और यीशु मसीह के बारे में जो कुछ देखा उसके बारे में गवाही दी।

[3] आशीषित वह व्यक्‍ति है जो इन भविष्यद्वाणी की बातों को पढ़ता, सुनता और मानता है, क्योंकि समय निकट है।

[4] यूहन्ना की ओर से, एशिया की सात चर्चों को, जो थे, जो हैं, और जो आने वाले हैं, तथा उन सात आत्माओं की तरफ़ से जो उनके सिंहासन के सामने हैं, तुम पर कृपा और शान्ति हो।

[5] साथ ही ये तुम्हें यीशु मसीह से मिलें जो सच्चे गवाह, मरे हुओं से जी उठने वालों में पहिलौठे, तथा पृथ्वी के सभी शासकों के प्रधान हैं। वह हम से प्रेम करते हैं और उन्हों ने अपने खून से हमारे गुनाहों धो दिया,

[6] उन्हों ने हमें राजा और अपने परमेश्‍वर पिता के लिए याजक (पुरोहित) बनाया, उन्हें महिमा और प्रभुता सदा सर्वदा मिलती रहे। ऐसा ही हो।

[7] देखो! वह बादलों के साथ आ रहे हैं। हर एक आँख उन्हें देखेगी, यहाँ तक कि वे लोग भी जिन्होंने उन्हें मार डाला था। दुनिया के सभी लोग उनके कारण बिलख-बिलख कर रोएँगे। हाँ, ऐसा ही होगा।

[8] स्वामी परमेश्‍वर, जो हैं, जो थे, जो आने वाले हैं और जो सर्वशक्‍तिमान हैं, यह कहते हैं, "मैं अल्फ़ा और ओमेगा हूँ, पहला और आखिरी हूँ"।

[9] मैं यूहन्ना, तुम्हारा भाई यीशु मसीह की वजह से दुख, और धीरज में तुम्हारे साथ भागीदार हूँ। मैं पतमुस नामक टापू में परमेश्‍वर के वचन और यीशु की गवाही देने की वजह से कैदी था।

[10] मैं सप्ताह के पहले दिन आत्मा से भर गया और मैंने अपने पीछे तुरही की आवाज़ के समान एक बड़ा शब्द सुना।

[11] जो कह रहा था कि मैं अल्फ़ा और ओमेगा, पहला और आखिरी हूँ और जो कुछ तुम देखते हो, उसे किताब में लिखकर आशिया की सातों मण्डलियों - इफ़िसुस, स्मुरना, पिरगमुन, थुआतीरा, सरदीस, फ़िलादेलफ़िया और लौदीकिया को भेज दो।

[12] तब मैंने पलट कर बोलने वाले को देखना चाहा। जैसे ही मैं मुड़ा, मैंने सोने के सात दीपदानों को देखा।

[13] उन सात दीपदानों के बीच मैंने 'मनुष्य के पुत्र' की तरह किसी को देखा, जो पैरों तक चोगा पहिने और छाती पर एक सुनहरा पट्टा बाँधे हुए थे।

[14] उनका सिर और बाल बर्फ़ की तरह सफ़ेद और ऊन की तरह थे। उनकी आँखें आग की लपटों की तरह थीं।

[15] उनके पैर भट्टी में तपाकर चमकाए हुए पीतल की तरह थे। उनकी आवाज़ महासागर की लहरों की तरह थी।

[16] वह अपने दाहिने हाथ में सात तारों को लिए हुए थे और उनके मुँह से दोधारी तेज़ तलवार निकल रही थी। उनका चेहरा दोपहर के सूरज की तरह चमक रहा था।

[17] जब मैंने उन्हें देखा तो मुर्दे की तरह उनके पैरों पर गिर पड़ा। तब उन्हों ने अपना दाहिना हाथ मेरे ऊपर रख कर मुझ से कहा, "डरो मत, मैं ही पहला और आखिरी हूँ।

[18] मैं वह हूँ जो मर गया था, लेकिन अब हमेशा-हमेशा तक ज़िन्दा हूँ। ऐसा ही हो! मौत और अधोलोक की चाभियाँ मेरे पास हैं।

[19] इसलिए जो बातें तुम ने देखी हैं, जो बातें हो रही हैं और जो इसके बाद होने वाली हैं, उन सभी को लिख लो। अर्थात् उन सात तारों का भेद जो तुम ने मेरे दाहिने हाथ में देखे थे और

[20] उन सात दीपदानों का मतलब वे सात तारे सातों मण्डलियों (चर्च) के दूत हैं, और वे सात दीपदान सात मण्डलियाँ हैं।"

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