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[1] इन सब बातों के बाद, स्वर्ग में बहुत से लोगों की एक बुलन्द आवाज़ मैंने सुनी, "हालेलूयाह! मुक्‍ति, महिमा (शान, इज़्ज़त) और ताकत हमारे प्रभु परमेश्‍वर के पास हैं।

[2] इसलिये कि उनका इन्साफ़ सच्चा और ठीक है, बड़ी वेश्या को सज़ा मिली है, जिसने सारी दुनिया को अपने व्यभिचार से गुमराह किया था। उसके द्वारा बहाये खून का भी उसे बदला मिल गया।

[3] उन्हों ने फिर से कहा, "हालेलूयाह! और हमेशा-हमेशा के लिए उसके जलने का धुआँ उठता रहेगा।"

[4] और चौबीसों बुज़ुर्गों और चार जीवित प्राणियों ने परमेश्‍वर को जो सिंहासन पर बैठे हुए थे, साष्टांग प्रणाम किया और आराधना करते हुए कहा, "आमीन, हालेलूयाह!"

[5] तब सिंहासन से आती हुयी यह आवाज़ सुनायी दी, "तुम सभी जो सेवक हो, चाहे छोटे हो या बड़े और उन से डरते हो, परमेश्‍वर की बड़ाई करो।"

[6] फिर मुझे भीड़ का सा शोर सुनायी दिया। यह बहुत ढेर पानी और ज़बरदस्त गड़गड़ाहट की तरह शब्द था, “हालेलूयाह, हमारे शक्‍तिमान प्रभु परमेश्‍वर शासन कर रहे हैं।

[7] आओ, हम खुश हों और परमेश्‍वर की बड़ाई करें, क्योंकि मेम्ने के विवाह का समय आ गया और उसकी दुल्हिन ने अपने आपको तैयार किया है।

[8] पहनने के लिए उसे अच्छे किस्म की साफ़ और चमकती हुयी मलमल दी गयी। यह अच्छी किस्म की मलमल सन्तों के धार्मिकता के काम हैं।"

[9] और उसने कहा, "लिखो, वे आशीषित लोग हैं जिन्हें मेम्ने के विवाह के खाने पर बुलाया गया है।" उसने मुझे से यह भी कहा, "यह परमेश्‍वर की कही गयी सच्ची बात है"।

[10] और मैंने उसके पाँवों पर गिरकर उसकी आराधना की। उसने मुझ से कहा, "देखो, ऐसा मत करो! क्योंकि मैं तुम्हारे और तुम्हारे भाइयों के समान, जिनके पास गवाही है एक सेवक ही हूँ। केवल परमेश्‍वर की आराधना करो। क्योंकि यीशु मसीह की गवाही भविष्यद्वाणी की आत्मा है।"

[11] और मैंने स्वर्ग को खुलते हुए देखा। मैंने एक सफ़ेद घोड़ा देखा, जिस पर कोई बैठे हुए थे। वह विश्‍वासयोग्य और सच्चे कहलाते हैं। वह धार्मिकता से इन्साफ़ और युद्ध करते हैं।

[12] उनकी आँखें आग की लपट की तरह थीं और उनके सिर पर बहुत से ताज थे। उनके माथे पर एक नाम लिखा हुआ था, जिसे उनको छोड़ और कोई नहीं जानता था।

[13] वह ऐसे कपड़े पहने हुए थे जो खून में डुबाए गए थे। उनका नाम परमेश्‍वर का वचन था।

[14] स्वर्ग की सेनाएँ-सफ़ेद घोड़ों पर सफे़द, साफ़ और बढ़िया किस्म की मलमल पहने हुए मेम्ने के पीछे-पीछे चली जा रही थीं।

[15] मेम्ने के मुँह से तेज़ धार वाली तलवार निकल रही थी, जिससे वह देशों को मारते थे। वह उनके ऊपर लोहे के राजदण्ड से शासन करेंगे। वह सर्वशक्‍तिमान परमेश्‍वर के गुस्से की जलजलाहट से शराब के कुण्ड में अंगूर को रौदेंगे।

[16] उनके चोगे और जाँघ पर एक नाम लिखा हुआ थाः "राजाओं के राजा और प्रभुओं के प्रभु।"

[17] फिर मैंने सूरज में एक स्वर्गदूत को खड़े हुए देखा। उसने बुलन्द आवाज़ में चिल्लाकर आसमान में उड़ने वाले पक्षियों से कहा, "आओ और महान परमेश्‍वर के भोज में इकट्ठे हो।

[18] ताकि तुम राजाओं, प्रधानों, ताकतवर लोगों, घोड़ों, उनके सवारों और सब तरह के लोग-आज़ाद, गुलाम, छोटों और बड़ों का मांस खा सको।"

[19] फिर मैंने पशु और दुनिया के राजाओं और उनकी सेनाओं को घोड़े पर बैठे व्यक्‍ति और उसकी सेना से लड़ने के लिए इकट्ठा देखा।

[20] उस पशु और झूठे भविष्यद्वक्‍ता को जो उसके सामने चिन्ह दिखाता था, पकड़ लिया गया। इन चिन्हों से वह उनको धोखा देता था, जिन्होंने पशु का चिन्ह लिया था और जो मूरत की आराधना करते थे। दोनों ही को गंधक से जलती हुयी आग में ज़िन्दा डाल दिया गया।

[21] बाकी लोगों को घोड़े पर बैठे व्यक्‍ति के मुँह से निकलती तलवार से खत्म कर डाला गया। उनके माँस से सभी पक्षी तृप्त हो गए।

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