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[1] सरदीस की मण्डली के संदेशवाहक को लिखोः जिसके पास परमेश्‍वर की सात आत्माएँ और सात तारे हैं, वह यह कहते हैः मैं तुम्हारे कामों को जानता हूँ, कि तुम ज़िन्दा तो कहलाते हो, लेकिन हो मरे हुए।

[2] जाग जाओ, और जो बातें बाकी बच गई हैं, और मिटने पर हैं उन्हें मज़बूत करो, क्योंकि मैंने तुम्हारे किसी काम को परमेश्‍वर की दृष्टि में सही (संपूर्ण) नहीं पाया।

[3] इसलिए याद करो कि तुम ने किस रीति से शिक्षा प्राप्त की और सुनी थी, उसी में बने रहो और मन बदलो। इसलिए अगर तुम न जागो तो मैं चोर की तरह आऊँगा और तुम जान भी न पाओगे, कि मैं किस वक्‍त तुम्हारे पास आ जाऊँगा।

[4] लेकिन सरदीस में तुम्हारे पास थोड़े लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने अपने कपड़े गंदे नहीं किए हैं। वे सफ़ेद कपड़े पहने हुए मेरे साथ चलेंगे, क्योंकि वे इस लायक हैं।

[5] जो जीत हासिल करे, उसे इसी तरह के कपड़े पहिनाए जाएँगे। मैं उसका नाम जीवन की पुस्तक में से न मिटाऊँगा, लेकिन अपने पिता और उनके स्वर्गदूतों के सामने उसका नाम मान लूँगा।

[6] जो सुनना चाहे वह सुन ले कि आत्मा मण्डलियों से क्या कहता है।

[7] फ़िलादेलफ़िया की मण्डली के संदेशवाहक को लिखोः जो पवित्र और सच्चे हैं और जिनके पास दाऊद की चाभी है - जिसे वह खोलते हैं उसे कोई बन्द नहीं कर सकता - वह यह कहते हैः

[8] मैं तुम्हारे कामों को जानता हूँ। देखो, मैंने तुम्हारे लिए एक दरवाज़ा खोला हुआ है जिसे कोई बन्द नहीं कर सकता। हालाँकि तुम्हारी ताकत कम है फिर भी तुम ने मेरे वचन (संदेश) को माना है और मेरे नाम का इन्कार नहीं किया।

[9] देखो! जो शैतान की जमायत हैं और अपने आपको यहूदी कहते हैं जब कि हैं नहीं, वे झूठ बोलते हैं। मैं उन्हें मजबूर करूँगा कि वे आकर तुम्हारे पैरों पर झुकें और जानें कि मैंने तुम से प्यार किया है।

[10] इसलिए कि तुम ने मेरे धीरज के वचन को माना है, मैं भी तुम्हारे परखे जाने के समय में तुम्हें बचा रखूँगा, अर्थात् वह न्याय का समय जो सारी दुनिया पर आने वाला है, ताकि इस में सभी रहने वाले परखे जाएँ।

[11] मैं अचानक आने वाला हूँ, जो कुछ तुम्हारे पास है उसमें बने रहो कि कोई तुम्हारा ताज तुम से छीन न ले।

[12] जो जीत जाए उसे मैं अपने परमेश्‍वर के भवन में एक खम्भा बनाऊँगा, वहाँ से वह कभी बाहर नहीं निकलेगा। मैं अपने परमेश्‍वर का नाम और अपने परमेश्‍वर के शहर अर्थात् नए यरूशलेम का नाम, जो परमेश्‍वर की तरफ़ से स्वर्ग से उतरने वाला है, और अपना नया नाम भी इस पर लिखूँगा।

[13] जो सुनना चाहे, वह सुन ले कि आत्मा मण्डलियों से क्या कहता है।"

[14] लौदीकिया की मण्डली के संदेशवाहक को यह लिखोः जो आमेन, विश्‍वासयोग्य, सच्चे गवाह और परमेश्‍वर की सृष्टि की शुरूआत का कारण हैं, वह यह कहते हैः

[15] मैं तुम्हारे कामों को जानता हूँ कि तुम न ठण्डे हो, न गर्म। अच्छा होता कि तुम ठण्डे या गर्म होते।

[16] इसलिए कि तुम गुनगुने (न ठण्डे, न गर्म) हो, मैं तुम्हें अपने मुँह से उगलने पर हूँ।

[17] तुम कहते हो कि मैं अमीर हूँ, मेरे पास सब कुछ है और मुझे किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है। लेकिन तुम नहीं जानते कि तुम अभागे, तुच्छ, कंगाल, अँधे और नंगे हो।

[18] इसलिए मैं तुम्हें सलाह देता हूँ कि मुझ से चोखा सोना मोल लो, ताकि तुम अमीर हो जाओ और सफ़ेद कपड़े ले लो, जिसे पहन कर तुम्हारे नंगेपन की शर्म ढँक जाए और अपनी आँखों में लगाने के लिए सुरमा ले लो, ताकि तुम साफ़-साफ़ देख सको।

[19] मै जिनसे प्यार करता हूँ, उन्हें सुधारता और अनुशासित करता हूँ - इसलिए जोशीले हो और मन बदलो।

[20] देखो, मैं दरवाज़े पर खड़ा खटखटाता हूँ। अगर कोई मेरी आवाज़ सुनकर दरवाज़ा खोले तो मैं उसके पास अन्दर आकर उसके साथ खाना खाऊँगा और वह मेरे साथ।

[21] जो जीत हासिल करे उसे मैं अपने साथ मेरा सिंहासन पर बैठाऊँगा, जिस तरह से मैं भी जीत हासिल कर के अपने पिता के साथ सिंहासन पर बैठा हुआ हूँ।

[22] जो कोई सुनना चाहे, वह सुन ले कि आत्मा मण्डलियों से क्या कहता है।

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