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[1] मैंने देखा जब मेम्ने ने उन सात मुहरों में से एक को खोला, तब उन चार प्राणियों में से एक को गरज के समान आवाज़ करते हुए सुना, "आओ"।

[2] जब मैंने नज़र डाली तो एक सफ़ेद घोड़े को देखा और जो उस पर बैठा हुआ था, उसके पास एक धनुष था और उसे एक ताज दिया गया। वह युद्ध जीतने के लिए निकला कि जीत हासिल करे।

[3] जब उसने दूसरी मुहर तोड़ी, तो मैंने दूसरे, जीवित प्राणी को यह कहते सुना, "आओ"।

[4] तब लाल रंग का एक घोड़ा निकला। उसके सवार को पृथ्वी पर से शान्ति उठा लेने का अधिकार (हक) दिया गया। साथ ही यह भी कि लोग एक दूसरे को मारें और उसे एक बड़ी तलवार दी गयी।

[5] जब उसने तीसरी मुहर खोली, तो मैंने तीसरे जीवित प्राणी को यह कहते सुना, "आओ"। तब मैंने नज़र डाली, तो एक काले घोड़े को देखा। उस पर सवार व्यक्‍ति के हाथ में एक तराजू था।

[6] मैंने उन चारों जीवित प्राणियों के बीच में से एक आवाज़ मानो यह कहते सुनी, "एक दीनार का एक चौथाई भाग गेहूँ, और एक दीनार का तीन चौथाई जव, लेकिन तेल और अंगूर का रस को नुकसान मत पहुँचाना"।

[7] जब उसने चौथी मुहर तोड़ी, तो मैंने चौथे जीवित प्राणी को यह कहते सुना, 'आओ'।

[8] मैंने नज़र डाली और एक हल्के पीले रंग का घोड़ा देखा। उसके सवार का नाम "मौत" था। और अधोलोक उसके पीछे-पीछे चला जा रहा था। उन्हें प्राणियों के एक चौथे हिस्से पर यह हक दिया था, कि तलवार, भुखमरी, महामारी और धरती के वन पशुओं द्वारा लोगों को मार डालें।

[9] जब मेम्ने ने पाँचवीं मुहर तोड़ी, तो मैंने वेदी के नीचे उन लोगों के प्राणों को देखा, जो परमेश्‍वर के वचन और अपनी गवाही बनाए रखने की वजह से वध किए गए थे।

[10] वे ऊँची आवाज़ से पुकार कर कह रहे थे, "हे पवित्र और सच्चे परमेश्‍वर आप कब तक इन्साफ़ न करेंगे? और दुनिया में रहने वाले लोगों से हमारे खून का पलटा कब तक नहीं लेंगे?"

[11] उन में से हर एक को सफ़ेद चोगा दिया गया और उन से कहा गया, "कुछ देर और आराम करो, जब तक कि तुम्हारे संगी साथी और विश्‍वासियों की, जो तुम्हारी तरह वध होने वाले हैं, गिनती पूरी न हो जाए।

[12] जब मैंने मेम्ने को छठवीं मुहर तोड़ते हुए देखा, तब एक बड़ा भूकम्प हुआ और ऊन से बने कम्बल की तरह सूरज काला, और चाँद खून की तरह हो गया।

[13] आसमान के तारे ज़मीन पर इस तरह गिर पड़े जैसे बड़ी आँधी के आने से अंजीर के पेड़ से कच्चे फल गिर जाते हैं।

[14] आसमान फटकर चटाई की तरह लपेटा गया, और हर एक पहाड़ और टापू अपनी जगह से हटाया गया।

[15] पृथ्वी के बादशाह, प्रधान, सेनाधिकारी, अमीर, शक्‍तिशाली, हर एक दलित दास और हर एक आज़ाद इन्सान पहाड़ों की गुफ़ाओं और चट्टानों में जा छ़ुपे।

[16] वे पहाड़ों और चट्टानों से कहने लगे, "हमारे ऊपर गिर पड़ो और हमें उनकी निगाह से जो सिंहासन पर बैठे हैं, तथा मेम्ने के गुस्से से बचा लो।

[17] क्योंकि उनके गुस्से का डरावना समय आ गया है, और कौन है जो उनका सामना कर सकता है?"

प्रकाशितवाक्य — Chapters