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[1] सिय्यून की ख़ातिर मैं ख़ामोश नहीं रहूँगा, यरूशलम की ख़ातिर तब तक आराम नहीं करूँगा जब तक उस की रास्ती तुलू-ए-सुब्ह की तरह न चमके और उस की नजात मशअल की तरह न भड़के।

[2] अक़्वाम तेरी रास्ती देखेंगी, तमाम बादशाह तेरी शान-ओ-शौकत का मुशाहदा करेंगे। उस वक़्त तुझे नया नाम मिलेगा, ऐसा नाम जो रब का अपना मुँह मुतअय्यिन करेगा।

[3] तू रब के हाथ में शानदार ताज और अपने ख़ुदा के हाथ में शाही कुलाह होगी।

[4] आइन्दा लोग तुझे न कभी ‘मतरूका’ न तेरे मुल्क को ‘वीरान-ओ-सुन्सान’ क़रार देंगे बल्कि तू मेरा लुत्फ़ और तेरा मुल्क ब्याही कहलाएगा। क्यूँकि रब तुझ से लुत्फ़अन्दोज़ होगा, और तेरा मुल्क शादीशुदा होगा।

[5] जिस तरह जवान आदमी कुंवारी से शादी करता है उसी तरह तेरे फ़र्ज़न्द तुझे ब्याह लेंगे। और जिस तरह दूल्हा दुल्हन के बाइस ख़ुशी मनाता है उसी तरह तेरा ख़ुदा तेरे सबब से ख़ुशी मनाएगा।

[6] ऐ यरूशलम, मैं ने तेरी फ़सील पर पहरेदार लगाए हैं जो दिन रात आवाज़ दें। उन्हें एक लम्हे के लिए भी ख़ामोश रहने की इजाज़त नहीं है। ऐ रब को याद दिलाने वालो, उस वक़्त तक न ख़ुद आराम करो,

[7] न रब को आराम करने दो जब तक वह यरूशलम को अज़ सर-ए-नौ क़ाइम न कर ले। जब पूरी दुनिया शहर की तारीफ़ करेगी तब ही तुम सुकून का साँस ले सकते हो।

[8] रब ने अपने दाएँ हाथ और ज़ोर-आवर बाज़ू की क़सम खा कर वादा किया है, “आइन्दा न मैं तेरा ग़ल्ला तेरे दुश्मनों को खिलाऊँगा, न बड़ी मेहनत से बनाई गई तेरी मै को अजनबियों को पिलाऊँगा।

[9] क्यूँकि आइन्दा फ़सल की कटाई करने वाले ही रब की सताइश करते हुए उसे खाएँगे, और अंगूर चुनने वाले ही मेरे मक़्दिस के सहनों में आ कर उन का रस पिएँगे।”

[10] दाख़िल हो जाओ, शहर के दरवाज़ों में दाख़िल हो जाओ! क़ौम के लिए रास्ता तय्यार करो! रास्ता बनाओ, रास्ता बनाओ! उसे पत्थरों से साफ़ करो! तमाम अक़्वाम के ऊपर झंडा गाड़ दो!

[11] क्यूँकि रब ने दुनिया की इन्तिहा तक एलान किया है, “सिय्यून बेटी को बताओ कि देख, तेरी नजात आने वाली है। देख, उस का अज्र उस के पास है, उस का इनआम उस के आगे आगे चल रहा है।”

[12] तब वह ‘मुक़द्दस क़ौम’ और ‘वह क़ौम जिसे रब ने इवज़ाना दे कर छुड़ाया है’ कहलाएँगे। ऐ यरूशलम बेटी, तू ‘मर्ग़ूब’ और ‘ग़ैरमतरूका शहर’ कहलाएगी।

यसायाह — Chapters