Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 3:19

[1] रब फ़रमाता है, “आओ, मुझे वह तलाक़नामा दिखाओ जो मैं ने दे कर तुम्हारी माँ को छोड़ दिया था। वह कहाँ है? या मुझे वह क़र्ज़ख़्वाह दिखाओ जिस के हवाले मैं ने तुम्हें अपना क़र्ज़ उतारने के लिए किया। वह कहाँ है? देखो, तुम्हें अपने ही गुनाहों के सबब से फ़रोख़्त किया गया, तुम्हारे अपने ही गुनाहों के सबब से तुम्हारी माँ को फ़ारिग़ कर दिया गया।

[2] जब मैं आया तो कोई नहीं था। क्या वजह? जब मैं ने आवाज़ दी तो जवाब देने वाला कोई नहीं था। क्यूँ? क्या मैं फ़िद्या दे कर तुम्हें छुड़ाने के क़ाबिल न था? क्या मेरी इतनी ताक़त नहीं कि तुम्हें बचा सकूँ? मेरी तो एक ही धमकी से समुन्दर ख़ुश्क हो जाता और दरया रेगिस्तान बन जाते हैं। तब उन की मछलियाँ पानी से महरूम हो कर गल जाती हैं, और उन की बदबू चारों तरफ़ फैल जाती है।

[3] मैं ही आसमान को तारीकी का जामा पहनाता, मैं ही उसे टाट के मातमी लिबास में लपेट देता हूँ।”

[4] रब क़ादिर-ए-मुतलक़ ने मुझे शागिर्द की सी ज़बान अता की ताकि मैं वह कलाम जान लूँ जिस से थकामाँदा तक़वियत पाए। सुब्ह-ब-सुब्ह वह मेरे कान को जगा देता है ताकि मैं शागिर्द की तरह सुन सकूँ।

[5] रब क़ादिर-ए-मुतलक़ ने मेरे कान को खोल दिया, और न मैं सरकश हुआ, न पीछे हट गया।

[6] मैं ने मारने वालों को अपनी पीठ और बाल नोचने वालों को अपने गाल पेश किए। मैं ने अपना चेहरा उन की गालियों और थूक से न छुपाया।

[7] लेकिन रब क़ादिर-ए-मुतलक़ मेरी मदद करता है, इस लिए मेरी रुस्वाई नहीं होगी। चुनाँचे मैं ने अपना मुँह चक़्माक़ की तरह सख़्त कर लिया है, क्यूँकि मैं जानता हूँ कि मैं शर्मिन्दा नहीं हो जाऊँगा।

[8] जो मुझे रास्त ठहराता है वह क़रीब ही है। तो फिर कौन मेरे साथ झगड़ेगा? आओ, हम मिल कर अदालत में खड़े हो जाएँ। कौन मुझ पर इल्ज़ाम लगाने की जुरअत करेगा? वह आ कर मेरा सामना करे!

[9] रब क़ादिर-ए-मुतलक़ ही मेरी मदद करता है। तो फिर कौन मुझे मुजरिम ठहराएगा? यह तो सब पुराने कपड़े की तरह घिस कर फटेंगे, कीड़े उन्हें खा जाएंगे।

[10] तुम में से कौन रब का ख़ौफ़ मानता और उस के ख़ादिम की सुनता है? जब उसे रौशनी के बग़ैर अंधेरे में चलना पड़े तो वह रब के नाम पर भरोसा रखे और अपने ख़ुदा पर इन्हिसार करे।

[11] लेकिन तुम बाक़ी लोग जो आग लगा कर अपने आप को जलते हुए तीरों से लेस करते हो, अपनी ही आग के शोलों में चले जाओ! ख़ुद उन तीरों की ज़द में आओ जो तुम ने दूसरों के लिए जलाए हैं! मेरे हाथ से तुम्हें यही अज्र मिलेगा, तुम सख़्त अज़ियत का शिकार हो कर ज़मीन पर तड़पते रहोगे।

यसायाह — Chapters