[1] फिर रब ने मूसा से कहा,
[2] “पहले महीने की पहली तारीख़ को मुलाक़ात का ख़ैमा खड़ा करना।
[3] अह्द का सन्दूक़ जिस में शरीअत की तख़्तियाँ हैं मुक़द्दसतरीन कमरे में रख कर उस के दरवाज़े का पर्दा लगाना।
[4] इस के बाद मख़्सूस रोटियों की मेज़ मुक़द्दस कमरे में ला कर उस पर तमाम ज़रूरी सामान रखना। उस कमरे में शमादान भी ले आना और उस पर उस के चराग़ रखना।
[5] बख़ूर की सोने की क़ुर्बानगाह उस पर्दे के सामने रखना जिस के पीछे अह्द का सन्दूक़ है। फिर ख़ैमे में दाख़िल होने के दरवाज़े पर पर्दा लगाना।
[6] जानवरों को चढ़ाने की क़ुर्बानगाह सहन में ख़ैमे के दरवाज़े के सामने रखी जाए।
[7] ख़ैमे और इस क़ुर्बानगाह के दरमियान धोने का हौज़ रख कर उस में पानी डालना।
[8] सहन की चारदीवारी खड़ी करके उस के दरवाज़े का पर्दा लगाना।
[9] फिर मसह का तेल ले कर उसे ख़ैमे और उस के सारे सामान पर छिड़क देना। यूँ तू उसे मेरे लिए मख़्सूस करेगा और वह मुक़द्दस होगा।
[10] फिर जानवरों को चढ़ाने की क़ुर्बानगाह और उस के सामान पर मसह का तेल छिड़कना। यूँ तू उसे मेरे लिए मख़्सूस करेगा और वह निहायत मुक़द्दस होगा।
[11] इसी तरह हौज़ और उस ढाँचे को भी मख़्सूस करना जिस पर हौज़ रखा गया है।
[12] हारून और उस के बेटों को मुलाक़ात के ख़ैमे के दरवाज़े पर ला कर ग़ुसल कराना।
[13] फिर हारून को मुक़द्दस लिबास पहनाना और उसे मसह करके मेरे लिए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस करना ताकि इमाम के तौर पर मेरी ख़िदमत करे।
[14] उस के बेटों को ला कर उन्हें ज़ेरजामे पहना देना।
[15] उन्हें उन के वालिद की तरह मसह करना ताकि वह भी इमामों के तौर पर मेरी ख़िदमत करें। जब उन्हें मसह किया जाएगा तो वह और बाद में उन की औलाद हमेशा तक मक़्दिस में इस ख़िदमत के लिए मख़्सूस होंगे।”
[16] मूसा ने सब कुछ रब की हिदायात के मुताबिक़ किया।
[17] पहले महीने की पहली तारीख़ को मुक़द्दस ख़ैमा खड़ा किया गया। उन्हें मिस्र से निकले पूरा एक साल हो गया था।
[18] मूसा ने दीवार के तख़्तों को उन के पाइयों पर खड़ा करके उन के साथ शहतीर लगाए। इसी तरह उस ने सतूनों को भी खड़ा किया।
[19] उस ने रब की हिदायात के ऐन मुताबिक़ दीवारों पर कपड़े का ख़ैमा लगाया और उस पर दूसरे ग़िलाफ़ रखे।
[20] उस ने शरीअत की दोनों तख़्तियाँ ले कर अह्द के सन्दूक़ में रख दीं, उठाने के लिए लकड़ियाँ सन्दूक़ के कड़ों में डाल दीं और कफ़्फ़ारे का ढकना उस पर लगा दिया।
[21] फिर उस ने रब की हिदायात के ऐन मुताबिक़ सन्दूक़ को मुक़द्दसतरीन कमरे में रख कर उस के दरवाज़े का पर्दा लगा दिया। यूँ अह्द के सन्दूक़ पर पर्दा पड़ा रहा।
[22] मूसा ने मख़्सूस रोटियों की मेज़ मुक़द्दस कमरे के शिमाली हिस्से में उस पर्दे के सामने रख दी जिस के पीछे अह्द का सन्दूक़ था।
[23] उस ने रब की हिदायत के ऐन मुताबिक़ रब के लिए मख़्सूस की हुई रोटियाँ मेज़ पर रखीं।
[24] उसी कमरे के जुनूबी हिस्से में उस ने शमादान को मेज़ के मुक़ाबिल रख दिया।
[25] उस पर उस ने रब की हिदायत के ऐन मुताबिक़ रब के सामने चराग़ रख दिए।
[26] उस ने बख़ूर की सोने की क़ुर्बानगाह भी उसी कमरे में रखी, उस पर्दे के बिलकुल सामने जिस के पीछे अह्द का सन्दूक़ था।
[27] उस ने उस पर रब की हिदायत के ऐन मुताबिक़ ख़ुश्बूदार बख़ूर जलाया।
[28] फिर उस ने ख़ैमे का दरवाज़ा लगा दिया।
[29] बाहर जा कर उस ने जानवरों को चढ़ाने की क़ुर्बानगाह ख़ैमे के दरवाज़े के सामने रख दी। उस पर उस ने रब की हिदायत के ऐन मुताबिक़ भस्म होने वाली क़ुर्बानियाँ और ग़ल्ला की नज़रें चढ़ाईं।
[30] उस ने धोने के हौज़ को ख़ैमे और उस क़ुर्बानगाह के दरमियान रख कर उस में पानी डाल दिया।
[31] मूसा, हारून और उस के बेटे उसे अपने हाथ-पाँओ धोने के लिए इस्तेमाल करते थे।
[32] जब भी वह मुलाक़ात के ख़ैमे में दाख़िल होते या जानवरों को चढ़ाने की क़ुर्बानगाह के पास आते तो रब की हिदायत के ऐन मुताबिक़ पहले ग़ुसल करते।
[33] आख़िर में मूसा ने ख़ैमा, क़ुर्बानगाह और चारदीवारी खड़ी करके सहन के दरवाज़े का पर्दा लगा दिया। यूँ मूसा ने मक़्दिस की तामीर मुकम्मल की।
[34] फिर मुलाक़ात के ख़ैमे पर बादल छा गया और मक़्दिस रब के जलाल से भर गया।
[35] मूसा ख़ैमे में दाख़िल न हो सका, क्यूँकि बादल उस पर ठहरा हुआ था और मक़्दिस रब के जलाल से भर गया था।
[36] तमाम सफ़र के दौरान जब भी मक़्दिस के ऊपर से बादल उठता तो इस्राईली सफ़र के लिए तय्यार हो जाते।
[37] अगर वह न उठता तो वह उस वक़्त तक ठहरे रहते जब तक बादल उठ न जाता।
[38] दिन के वक़्त बादल मक़्दिस के ऊपर ठहरा रहता और रात के वक़्त वह तमाम इस्राईलियों को आग की सूरत में नज़र आता था। यह सिलसिला पूरे सफ़र के दौरान जारी रहा।