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[1] कीकर की लकड़ी की क़ुर्बानगाह बनाना जिस पर बख़ूर जलाया जाए।

[2] वह डेढ़ फ़ुट लम्बी, इतनी ही चौड़ी और तीन फ़ुट ऊँची हो। उस के चारों कोनों में से सींग निकलें जो क़ुर्बानगाह के साथ एक ही टुकड़े से बनाए गए हों।

[3] उस की ऊपर की सतह, उस के चार पहलूओं और उस के सींगों पर ख़ालिस सोना चढ़ाना। ऊपर की सतह के इर्दगिर्द सोने की झालर हो।

[4] सोने के दो कड़े बना कर इन्हें उस झालर के नीचे एक दूसरे के मुक़ाबिल पहलूओं पर लगाना। इन कड़ों में क़ुर्बानगाह को उठाने की लकड़ियाँ डाली जाएँगी।

[5] यह लकड़ियाँ कीकर की हों, और उन पर भी सोना चढ़ाना।

[6] इस क़ुर्बानगाह को ख़ैमे के मुक़द्दस कमरे में उस पर्दे के सामने रखना जिस के पीछे अह्द का सन्दूक़ और उस का ढकना होंगे, वह ढकना जहाँ मैं तुझ से मिला करूँगा।

[7] जब हारून हर सुब्ह शमादान के चराग़ तय्यार करे उस वक़्त वह उस पर ख़ुश्बूदार बख़ूर जलाए।

[8] सूरज के ग़ुरूब होने के बाद भी जब वह दुबारा चराग़ों की देख-भाल करेगा तो वह साथ साथ बख़ूर जलाए। यूँ रब के सामने बख़ूर मुतवातिर जलता रहे। लाज़िम है कि बाद की नस्लें भी इस उसूल पर क़ाइम रहें।

[9] इस क़ुर्बानगाह पर सिर्फ़ जाइज़ बख़ूर इस्तेमाल किया जाए। इस पर न तो जानवरों की क़ुर्बानियाँ चढ़ाई जाएँ, न ग़ल्ला या मै की नज़रें पेश की जाएँ।

[10] हारून साल में एक दफ़ा उस का कफ़्फ़ारा दे कर उसे पाक करे। इस के लिए वह कफ़्फ़ारे के दिन उस क़ुर्बानी का कुछ ख़ून सींगों पर लगाए। यह उसूल भी अबद तक क़ाइम रहे। यह क़ुर्बानगाह रब के लिए निहायत मुक़द्दस है।”

[11] रब ने मूसा से कहा,

[12] “जब भी तू इस्राईलियों की मर्दुमशुमारी करे तो लाज़िम है कि जिन का शुमार किया गया हो वह रब को अपनी जान का फ़िद्या दें ताकि उन में वबा न फैले।

[13] जिस जिस का शुमार किया गया हो वह चाँदी के आधे सिक्के के बराबर रक़म उठाने वाली क़ुर्बानी के तौर पर दे। सिक्के का वज़न मक़्दिस के सिक्कों के बराबर हो। यानी चाँदी के सिक्के का वज़न 11 ग्राम हो, इस लिए छः ग्राम चाँदी देनी है।

[14] जिस की भी उम्र 20 साल या इस से ज़ाइद हो वह रब को यह रक़म उठाने वाली क़ुर्बानी के तौर पर दे।

[15] अमीर और ग़रीब दोनों इतना ही दें, क्यूँकि यही नज़राना रब को पेश करने से तुम्हारी जान का कफ़्फ़ारा दिया जाता है।

[16] कफ़्फ़ारे की यह रक़म मुलाक़ात के ख़ैमे की ख़िदमत के लिए इस्तेमाल करना। फिर यह नज़राना रब को याद दिलाता रहेगा कि तुम्हारी जानों का कफ़्फ़ारा दिया गया है।”

[17] रब ने मूसा से कहा,

[18] “पीतल का ढाँचा बनाना जिस पर पीतल का हौज़ बना कर रखना है। यह हौज़ धोने के लिए है। उसे सहन में मुलाक़ात के ख़ैमे और जानवरों को चढ़ाने की क़ुर्बानगाह के दरमियान रख कर पानी से भर देना।

[19] हारून और उस के बेटे अपने हाथ-पाँओ धोने के लिए उस का पानी इस्तेमाल करें।

[20] मुलाक़ात के ख़ैमे में दाख़िल होने से पहले ही वह अपने आप को धोएँ वर्ना वह मर जाएंगे। इसी तरह जब भी वह ख़ैमे के बाहर की क़ुर्बानगाह पर जानवरों की क़ुर्बानियाँ चढ़ाएँ

[21] तो लाज़िम है कि पहले हाथ-पाँओ धो लें, वर्ना वह मर जाएंगे। यह उसूल हारून और उस की औलाद के लिए हमेशा तक क़ाइम रहे।”

[22] रब ने मूसा से कहा,

[23] “मसह के तेल के लिए उम्दा क़िस्म के मसाले इस्तेमाल करना। 6 किलोग्राम आब-ए-मुर, 3 किलोग्राम ख़ुश्बूदार दारचीनी, 3 किलोग्राम ख़ुश्बूदार बेद

[24] और 6 किलोग्राम तेजपात। यह चीज़ें मक़्दिस के बाटों के हिसाब से तोल कर चार लिटर ज़ैतून के तेल में डालना।

[25] सब कुछ मिला कर ख़ुश्बूदार तेल तय्यार करना। वह मुक़द्दस है और सिर्फ़ उस वक़्त इस्तेमाल किया जाए जब कोई चीज़ या शख़्स मेरे लिए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस किया जाए।

[26] यही तेल ले कर मुलाक़ात का ख़ैमा और उस का सारा सामान मसह करना यानी ख़ैमा, अह्द का सन्दूक़,

[27] मेज़ और उस का सामान, शमादान और उस का सामान, बख़ूर जलाने की क़ुर्बानगाह,

[28] जानवरों को चढ़ाने की क़ुर्बानगाह और उस का सामान, धोने का हौज़ और उस का ढाँचा।

[29] यूँ तू यह तमाम चीज़ें मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस करेगा। इस से वह निहायत मुक़द्दस हो जाएँगी। जो भी उन्हें छुएगा वह मुक़द्दस हो जाएगा।

[30] हारून और उस के बेटों को भी इस तेल से मसह करना ताकि वह मुक़द्दस हो कर मेरे लिए इमाम का काम सरअन्जाम दे सकें।

[31] इस्राईलियों को कह दे कि यह तेल हमेशा तक मेरे लिए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस है।

[32] इस लिए इसे अपने लिए इस्तेमाल न करना और न इस तरकीब से अपने लिए तेल बनाना। यह तेल मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस है और तुम्हें भी इसे यूँ ठहराना है।

[33] जो इस तरकीब से आम इस्तेमाल के लिए तेल बनाता है या किसी आम शख़्स पर लगाता है उसे उस की क़ौम में से मिटा डालना है।”

[34] रब ने मूसा से कहा, “बख़ूर इस तरकीब से बनाना है : मस्तकी, ओनिका, बिरीजा और ख़ालिस लुबान बराबर के हिस्सों में

[35] मिला कर ख़ुश्बूदार बख़ूर बनाना। इत्रसाज़ का यह काम नमकीन, ख़ालिस और मुक़द्दस हो।

[36] इस में से कुछ पीस कर पाउडर बनाना और मुलाक़ात के ख़ैमे में अह्द के सन्दूक़ के सामने डालना जहाँ मैं तुझ से मिला करूँगा। इस बख़ूर को मुक़द्दसतरीन ठहराना।

[37] इसी तरकीब के मुताबिक़ अपने लिए बख़ूर न बनाना। इसे रब के लिए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस ठहराना है।

[38] जो भी अपने ज़ाती इस्तेमाल के लिए इस क़िस्म का बख़ूर बनाए उसे उस की क़ौम में से मिटा डालना है।”

ख़ुरूज — Chapters