[1] तब मूसा और इस्राईलियों ने रब के लिए यह गीत गाया, “मैं रब की तम्जीद में गीत गाऊँगा, क्यूँकि वह निहायत अज़ीम है। घोड़े और उस के सवार को उस ने समुन्दर में पटख़ दिया है।
[2] रब मेरी क़ुव्वत और मेरा गीत है, वह मेरी नजात बन गया है। वही मेरा ख़ुदा है, और मैं उस की तारीफ़ करूँगा। वही मेरे बाप का ख़ुदा है, और मैं उस की ताज़ीम करूँगा।
[3] रब सूरमा है, रब उस का नाम है।
[4] फ़िरऔन के रथों और फ़ौज को उस ने समुन्दर में पटख़ दिया तो बादशाह के बेहतरीन अफ़्सरान बहर-ए-क़ुल्ज़ुम में डूब गए।
[5] गहरे पानी ने उन्हें ढाँक लिया, और वह पत्थर की तरह समुन्दर की तह तक उतर गए।
[6] ऐ रब, तेरे दहने हाथ का जलाल बड़ी क़ुदरत से ज़ाहिर होता है। ऐ रब, तेरा दहना हाथ दुश्मन को चकनाचूर कर देता है।
[7] जो तेरे ख़िलाफ़ उठ खड़े होते हैं उन्हें तू अपनी अज़मत का इज़हार करके ज़मीन पर पटख़ देता है। तेरा ग़ज़ब उन पर आन पड़ता है तो वह आग में भूसे की तरह जल जाते हैं।
[8] तू ने ग़ुस्से में आ कर फूँक मारी तो पानी ढेर की सूरत में जमा हो गया। बहता पानी ठोस दीवार बन गया, समुन्दर गहराई तक जम गया।
[9] दुश्मन ने डींग मार कर कहा, ‘मैं उन का पीछा करके उन्हें पकड़ लूँगा, मैं उन का लूटा हुआ माल तक़्सीम करूँगा। मेरी लालची जान उन से सेर हो जाएगी, मैं अपनी तलवार खैंच कर उन्हें हलाक करूँगा।’
[10] लेकिन तू ने उन पर फूँक मारी तो समुन्दर ने उन्हें ढाँक लिया, और वह सीसे की तरह ज़ोरदार मौजों में डूब गए।
[11] ऐ रब, कौन सा माबूद तेरी मानिन्द है? कौन तेरी तरह जलाली और क़ुद्दूस है? कौन तेरी तरह हैरतअंगेज़ काम करता और अज़ीम मोजिज़े दिखाता है? कोई भी नहीं।
[12] तू ने अपना दहना हाथ उठाया तो ज़मीन हमारे दुश्मनों को निगल गई।
[13] अपनी शफ़्क़त से तू ने इवज़ाना दे कर अपनी क़ौम को छुटकारा दिया और उस की राहनुमाई की है, अपनी क़ुदरत से तू ने उसे अपनी मुक़द्दस सुकूनतगाह तक पहुँचाया है।
[14] यह सुन कर दीगर क़ौमें काँप उठीँ, फ़िलिस्ती डर के मारे पेच-ओ-ताब खाने लगे।
[15] अदोम के रईस सहम गए, मोआब के राहनुमाओं पर कपकपी तारी हो गई, और कनआन के तमाम बाशिन्दे हिम्मत हार गए।
[16] दह्शत और ख़ौफ़ उन पर छा गया। तेरी अज़ीम क़ुदरत के बाइस वह पत्थर की तरह जम गए। ऐ रब, वह न हिले जब तक तेरी क़ौम गुज़र न गई। वह बेहिस्स-ओ-हरकत रहे जब तक तेरी ख़रीदी हुई क़ौम गुज़र न गई।
[17] ऐ रब, तू अपने लोगों को ले कर पौदों की तरह अपने मौरूसी पहाड़ पर लगाएगा, उस जगह पर जो तू ने अपनी सुकूनत के लिए चुन ली है, जहाँ तू ने अपने हाथों से अपना मक़्दिस तय्यार किया है।
[18] रब अबद तक बादशाह है!”
[19] जब फ़िरऔन के घोड़े, रथ और घुड़सवार समुन्दर में चले गए तो रब ने उन्हें समुन्दर के पानी से ढाँक लिया। लेकिन इस्राईली ख़ुश्क ज़मीन पर समुन्दर में से गुज़र गए।
[20] तब हारून की बहन मरियम जो नबिया थी ने दफ़ लिया, और बाक़ी तमाम औरतें भी दफ़ ले कर उस के पीछे हो लीं। सब गाने और नाचने लगीं। मरियम ने यह गा कर उन की राहनुमाई की,
[21] “रब की तम्जीद में गीत गाओ, क्यूँकि वह निहायत अज़ीम है। घोड़े और उस के सवार को उस ने समुन्दर में पटख़ दिया है।”
[22] मूसा के कहने पर इस्राईली बहर-ए-क़ुल्ज़ुम से रवाना हो कर दश्त-ए-शूर में चले गए। वहाँ वह तीन दिन तक सफ़र करते रहे। इस दौरान उन्हें पानी न मिला।
[23] आख़िरकार वह मारा पहुँचे जहाँ पानी दस्तयाब था। लेकिन वह कड़वा था, इस लिए मक़ाम का नाम मारा यानी कड़वाहट पड़ गया।
[24] यह देख कर लोग मूसा के ख़िलाफ़ बुड़बुड़ा कर कहने लगे, “हम क्या पिएँ?”
[25] मूसा ने मदद के लिए रब से इल्तिजा की तो उस ने उसे लकड़ी का एक टुकड़ा दिखाया। जब मूसा ने यह लकड़ी पानी में डाली तो पानी की कड़वाहट ख़त्म हो गई। मारा में रब ने अपनी क़ौम को क़वानीन दिए। वहाँ उस ने उन्हें आज़माया भी।
[26] उस ने कहा, “ग़ौर से रब अपने ख़ुदा की आवाज़ सुनो! जो कुछ उस की नज़र में दुरुस्त है वही करो। उस के अह्काम पर ध्यान दो और उस की तमाम हिदायात पर अमल करो। फिर मैं तुम पर वह बीमारियाँ नहीं लाऊँगा जो मिस्रियों पर लाया था, क्यूँकि मैं रब हूँ जो तुझे शिफ़ा देता हूँ।”
[27] फिर इस्राईली रवाना हो कर एलीम पहुँचे जहाँ 12 चश्मे और खजूर के 70 दरख़्त थे। वहाँ उन्हों ने पानी के क़रीब अपने ख़ैमे लगाए।