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[1] तब रब ने मूसा से कहा, “अब मैं फ़िरऔन और मिस्र पर आख़िरी आफ़त लाने को हूँ। इस के बाद वह तुम्हें जाने देगा बल्कि तुम्हें ज़बरदस्ती निकाल देगा।

[2] इस्राईलियों को बता देना कि हर मर्द अपने पड़ोसी और हर औरत अपनी पड़ोसन से सोने-चाँदी की चीज़ें माँग ले।”

[3] (रब ने मिस्रियों के दिल इस्राईलियों की तरफ़ माइल कर दिए थे। वह फ़िरऔन के उह्देदारों समेत ख़ासकर मूसा की बड़ी इज़्ज़त करते थे)।

[4] मूसा ने कहा, “रब फ़रमाता है, ‘आज आधी रात के वक़्त मैं मिस्र में से गुज़रूँगा।

[5] तब बादशाह के पहलौठे से ले कर चक्की पीसने वाली नौकरानी के पहलौठे तक मिस्रियों का हर पहलौठा मर जाएगा। चौपाइयों के पहलौठे भी मर जाएंगे।

[6] मिस्र की सरज़मीन पर ऐसा रोना पीटना होगा कि न माज़ी में कभी हुआ, न मुस्तक़बिल में कभी होगा।

[7] लेकिन इस्राईली और उन के जानवर बचे रहेंगे। कुत्ता भी उन पर नहीं भौंकेगा। इस तरह तुम जान लोगे कि रब इस्राईलियों की निस्बत मिस्रियों से फ़र्क़ सुलूक करता है’।”

[8] मूसा ने यह कुछ फ़िरऔन को बताया फिर कहा, “उस वक़्त आप के तमाम उह्देदार आ कर मेरे सामने झुक जाएंगे और मिन्नत करेंगे, ‘अपने पैरोकारों के साथ चले जाएँ।’ तब मैं चला ही जाऊँगा।” यह कह कर मूसा फ़िरऔन के पास से चला गया। वह बड़े ग़ुस्से में था।

[9] रब ने मूसा से कहा था, “फ़िरऔन तुम्हारी नहीं सुनेगा। क्यूँकि लाज़िम है कि मैं मिस्र में अपनी क़ुदरत का मज़ीद इज़हार करूँ।”

[10] गो मूसा और हारून ने फ़िरऔन के सामने यह तमाम मोजिज़े दिखाए, लेकिन रब ने फ़िरऔन को ज़िद्दी बनाए रखा, इस लिए उस ने इस्राईलियों को मुल्क छोड़ने न दिया।

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