[1] मैं ने तुझे बताया है कि तेरे लिए क्या कुछ बरकत का और क्या कुछ लानत का बाइस है। जब रब तेरा ख़ुदा तुझे तेरी ग़लत हरकतों के सबब से मुख़्तलिफ़ क़ौमों में मुन्तशिर कर देगा तो तू मेरी बातें मान जाएगा।
[2] तब तू और तेरी औलाद रब अपने ख़ुदा के पास वापस आएँगे और पूरे दिल-ओ-जान से उस की सुन कर उन तमाम अह्काम पर अमल करेंगे जो मैं आज तुझे दे रहा हूँ।
[3] फिर रब तेरा ख़ुदा तुझे बहाल करेगा और तुझ पर रहम करके तुझे उन तमाम क़ौमों से निकाल कर जमा करेगा जिन में उस ने तुझे मुन्तशिर कर दिया था।
[4] हाँ, रब तेरा ख़ुदा तुझे हर जगह से जमा करके वापस लाएगा, चाहे तू सब से दूर मुल्क में क्यूँ न पड़ा हो।
[5] वह तुझे तेरे बापदादा के मुल्क में लाएगा, और तू उस पर क़ब्ज़ा करेगा। फिर वह तुझे तेरे बापदादा से ज़्यादा कामयाबी बख़्शेगा, और तेरी तादाद ज़्यादा बढ़ाएगा।
[6] ख़तना रब की क़ौम का ज़ाहिरी निशान है। लेकिन उस वक़्त रब तेरा ख़ुदा तेरे और तेरी औलाद का बातिनी ख़तना करेगा ताकि तू उसे पूरे दिल-ओ-जान से प्यार करे और जीता रहे।
[7] जो लानतें रब तेरा ख़ुदा तुझ पर लाया था उन्हें वह अब तेरे दुश्मनों पर आने देगा, उन पर जो तुझ से नफ़रत रखते और तुझे ईज़ा पहुँचाते हैं।
[8] क्यूँकि तू दुबारा रब की सुनेगा और उस के तमाम अह्काम की पैरवी करेगा जो मैं तुझे आज दे रहा हूँ।
[9] जो कुछ भी तू करेगा उस में रब तुझे बड़ी कामयाबी बख़्शेगा, और तुझे कस्रत की औलाद, मवेशी और फ़सलें हासिल होंगी। क्यूँकि जिस तरह वह तेरे बापदादा को कामयाबी देने में ख़ुशी मह्सूस करता था उसी तरह वह तुझे भी कामयाबी देने में ख़ुशी मह्सूस करेगा।
[10] शर्त सिर्फ़ यह है कि तू रब अपने ख़ुदा की सुने, शरीअत में दर्ज उस के अह्काम पर अमल करे और पूरे दिल-ओ-जान से उस की तरफ़ रुजू लाए।
[11] जो अह्काम मैं आज तुझे दे रहा हूँ न वह हद से ज़्यादा मुश्किल हैं, न तेरी पहुँच से बाहर।
[12] वह आसमान पर नहीं हैं कि तू कहे, ‘कौन आसमान पर चढ़ कर हमारे लिए यह अह्काम नीचे ले आए ताकि हम उन्हें सुन सकें और उन पर अमल कर सकें?’
[13] वह समुन्दर के पार भी नहीं हैं कि तू कहे, ‘कौन समुन्दर को पार करके हमारे लिए यह अह्काम लाएगा ताकि हम उन्हें सुन सकें और उन पर अमल कर सकें?’
[14] क्यूँकि यह कलाम तेरे निहायत क़रीब बल्कि तेरे मुँह और दिल में मौजूद है। चुनाँचे उस पर अमल करने में कोई भी रुकावट नहीं है।
[15] देख, आज मैं तुझे दो रास्ते पेश करता हूँ। एक ज़िन्दगी और ख़ुशहाली की तरफ़ ले जाता है जबकि दूसरा मौत और हलाकत की तरफ़।
[16] आज मैं तुझे हुक्म देता हूँ कि रब अपने ख़ुदा को प्यार कर, उस की राहों पर चल और उस के अह्काम के ताबे रह। फिर तू ज़िन्दा रह कर तरक़्क़ी करेगा, और रब तेरा ख़ुदा तुझे उस मुल्क में बरकत देगा जिस में तू दाख़िल होने वाला है।
[17] लेकिन अगर तेरा दिल इस रास्ते से हट कर नाफ़रमानी करे तो बरकत की तवक़्क़ो न कर। अगर तू आज़माइश में पड़ कर दीगर माबूदों को सिज्दा और उन की ख़िदमत करे
[18] तो तुम ज़रूर तबाह हो जाओगे। आज मैं एलान करता हूँ कि इस सूरत में तुम ज़्यादा देर तक उस मुल्क में आबाद नहीं रहोगे जिस में तू दरया-ए-यर्दन को पार करके दाख़िल होगा ताकि उस पर क़ब्ज़ा करे।
[19] आज आसमान और ज़मीन तुम्हारे ख़िलाफ़ मेरे गवाह हैं कि मैं ने तुम्हें ज़िन्दगी और बरकतों का रास्ता और मौत और लानतों का रास्ता पेश किया है। अब ज़िन्दगी का रास्ता इख़तियार कर ताकि तू और तेरी औलाद ज़िन्दा रहे।
[20] रब अपने ख़ुदा को प्यार कर, उस की सुन और उस से लिपटा रह। क्यूँकि वही तेरी ज़िन्दगी है और वही करेगा कि तू देर तक उस मुल्क में जीता रहेगा जिस का वादा उस ने क़सम खा कर तेरे बापदादा इब्राहीम, इस्हाक़ और याक़ूब से किया था।”