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[1] अगर तुझे किसी हमवतन भाई का बैल या भेड़-बकरी भटकी हुई नज़र आए तो उसे नज़रअन्दाज़ न करना बल्कि मालिक के पास वापस ले जाना।

[2] अगर मालिक का घर क़रीब न हो या तुझे मालूम न हो कि मालिक कौन है तो जानवर को अपने घर ला कर उस वक़्त तक सँभाले रखना जब तक कि मालिक उसे ढूँडने न आए। फिर जानवर को उसे वापस कर देना।

[3] यही कुछ कर अगर तेरे हमवतन भाई का गधा भटका हुआ नज़र आए या उस का गुमशुदा कोट या कोई और चीज़ कहीं नज़र आए। उसे नज़रअन्दाज़ न करना।

[4] अगर तू देखे कि किसी हमवतन का गधा या बैल रास्ते में गिर गया है तो उसे नज़रअन्दाज़ न करना। जानवर को खड़ा करने में अपने भाई की मदद कर।

[5] औरत के लिए मर्दों के कपड़े पहनना मना है। इसी तरह मर्द के लिए औरतों के कपड़े पहनना भी मना है। जो ऐसा करता है उस से रब तेरे ख़ुदा को घिन आती है।

[6] अगर तुझे कहीं रास्ते में, किसी दरख़्त में या ज़मीन पर घोंसला नज़र आए और परिन्दा अपने बच्चों या अंडों पर बैठा हुआ हो तो माँ को बच्चों समेत न पकड़ना।

[7] तुझे बच्चे ले जाने की इजाज़त है लेकिन माँ को छोड़ देना ताकि तू ख़ुशहाल और देर तक जीता रहे।

[8] नया मकान तामीर करते वक़्त छत पर चारों तरफ़ दीवार बनाना। वर्ना तू उस शख़्स की मौत का ज़िम्मादार ठहरेगा जो तेरी छत पर से गिर जाए।

[9] अपने अंगूर के बाग़ में दो क़िस्म के बीज न बोना। वर्ना सब कुछ मक़्दिस के लिए मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस होगा, न सिर्फ़ वह फ़सल जो तुम ने अंगूर के इलावा लगाई बल्कि अंगूर भी।

[10] बैल और गधे को जोड़ कर हल न चलाना।

[11] ऐसे कपड़े न पहनना जिन में बनते वक़्त ऊन और कतान मिलाए गए हैं।

[12] अपनी चादर के चारों कोनों पर फुन्दने लगाना।

[13] अगर कोई आदमी शादी करने के थोड़ी देर बाद अपनी बीवी को पसन्द न करे

[14] और फिर उस की बदनामी करके कहे, “इस औरत से शादी करने के बाद मुझे पता चला कि वह कुंवारी नहीं है”

[15] तो जवाब में बीवी के वालिदैन शहर के दरवाज़े पर जमा होने वाले बुज़ुर्गों के पास सबूत ले आएँ कि बेटी शादी से पहले कुंवारी थी।

[16] बीवी का बाप बुज़ुर्गों से कहे, “मैं ने अपनी बेटी की शादी इस आदमी से की है, लेकिन यह उस से नफ़रत करता है।

[17] अब इस ने उस की बदनामी करके कहा है, ‘मुझे पता चला कि तुम्हारी बेटी कुंवारी नहीं है।’ लेकिन यहाँ सबूत है कि मेरी बेटी कुंवारी थी।” फिर वालिदैन शहर के बुज़ुर्गों को मज़कूरा कपड़ा दिखाएँ।

[18] तब बुज़ुर्ग उस आदमी को पकड़ कर सज़ा दें,

[19] क्यूँकि उस ने एक इस्राईली कुंवारी की बदनामी की है। इस के इलावा उसे जुर्माने के तौर पर बीवी के बाप को चाँदी के 100 सिक्के देने पड़ेंगे। लाज़िम है कि वह शौहर के फ़राइज़ अदा करता रहे। वह उम्र भर उसे तलाक़ नहीं दे सकेगा।

[20] लेकिन अगर आदमी की बात दुरुस्त निकले और साबित न हो सके कि बीवी शादी से पहले कुंवारी थी

[21] तो उसे बाप के घर लाया जाए। वहाँ शहर के आदमी उसे संगसार कर दें। क्यूँकि अपने बाप के घर में रहते हुए बदकारी करने से उस ने इस्राईल में एक अहमक़ाना और बेदीन हरकत की है। यूँ तू अपने दरमियान से बुराई मिटा देगा।

[22] अगर कोई आदमी किसी की बीवी के साथ ज़िना करे और वह पकड़े जाएँ तो दोनों को सज़ा-ए-मौत देनी है। यूँ तू इस्राईल से बुराई मिटा देगा।

[23] अगर आबादी में किसी मर्द की मुलाक़ात किसी ऐसी कुंवारी से हो जिस की किसी और के साथ मंगनी हुई है और वह उस के साथ हमबिसतर हो जाए

[24] तो लाज़िम है कि तुम दोनों को शहर के दरवाज़े के पास ला कर संगसार करो। वजह यह है कि लड़की ने मदद के लिए न पुकारा अगरचे उस जगह लोग आबाद थे। मर्द का जुर्म यह था कि उस ने किसी और की मंगेतर की इस्मतदरी की है। यूँ तू अपने दरमियान से बुराई मिटा देगा।

[25] लेकिन अगर मर्द ग़ैरआबाद जगह में किसी और की मंगेतर की इस्मतदरी करे तो सिर्फ़ उसी को सज़ा-ए-मौत दी जाए।

[26] लड़की को कोई सज़ा न देना, क्यूँकि उस ने कुछ नहीं किया जो मौत के लाइक़ हो। ज़ियादती करने वाले की हरकत उस शख़्स के बराबर है जिस ने किसी पर हम्ला करके उसे क़त्ल कर दिया है।

[27] चूँकि उस ने लड़की को वहाँ पाया जहाँ लोग नहीं रहते, इस लिए अगरचे लड़की ने मदद के लिए पुकारा तो भी उसे कोई न बचा सका।

[28] हो सकता है कोई आदमी किसी लड़की की इस्मतदरी करे जिस की मंगनी नहीं हुई है। अगर उन्हें पकड़ा जाए

[29] तो वह लड़की के बाप को चाँदी के 50 सिक्के दे। लाज़िम है कि वह उसी लड़की से शादी करे, क्यूँकि उस ने उस की इस्मतदरी की है। न सिर्फ़ यह बल्कि वह उम्र भर उसे तलाक़ नहीं दे सकता।

[30] अपने बाप की बीवी से शादी करना मना है। जो कोई यह करे वह अपने बाप की बेहुरमती करता है।

इस्तिस्ना — Chapters