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[1] जब तू जंग के लिए निकल कर देखता है कि दुश्मन तादाद में ज़्यादा हैं और उन के पास घोड़े और रथ भी हैं तो मत डरना। रब तेरा ख़ुदा जो तुझे मिस्र से निकाल लाया अब भी तेरे साथ है।

[2] जंग के लिए निकलने से पहले इमाम सामने आए और फ़ौज से मुख़ातिब हो कर

[3] कहे, “सुन ऐ इस्राईल! आज तुम अपने दुश्मन से लड़ने जा रहे हो। उन के सबब से परेशान न हो। उन से न ख़ौफ़ खाओ, न घबराओ,

[4] क्यूँकि रब तुम्हारा ख़ुदा ख़ुद तुम्हारे साथ जा कर दुश्मन से लड़ेगा। वही तुम्हें फ़त्ह बख़्शेगा।”

[5] फिर निगहबान फ़ौज से मुख़ातिब हों, “क्या यहाँ कोई है जिस ने हाल में अपना नया घर मुकम्मल किया लेकिन उसे मख़्सूस करने का मौक़ा न मिला? वह अपने घर वापस चला जाए। ऐसा न हो कि वह जंग के दौरान मारा जाए और कोई और घर को मख़्सूस करके उस में बसने लगे।

[6] क्या कोई है जिस ने अंगूर का बाग़ लगा कर इस वक़्त उस की पहली फ़सल के इन्तिज़ार में है? वह अपने घर वापस चला जाए। ऐसा न हो कि वह जंग में मारा जाए और कोई और बाग़ का फ़ाइदा उठाए।

[7] क्या कोई है जिस की मंगनी हुई है और जो इस वक़्त शादी के इन्तिज़ार में है? वह अपने घर वापस चला जाए। ऐसा न हो कि वह जंग में मारा जाए और कोई और उस की मंगेतर से शादी करे।”

[8] निगहबान कहें, “क्या कोई ख़ौफ़ज़दा या परेशान है? वह अपने घर वापस चला जाए ताकि अपने साथियों को परेशान न करे।”

[9] इस के बाद फ़ौजियों पर अफ़्सर मुक़र्रर किए जाएँ।

[10] किसी शहर पर हम्ला करने से पहले उस के बाशिन्दों को हथियार डाल देने का मौक़ा देना।

[11] अगर वह मान जाएँ और अपने दरवाज़े खोल दें तो वह तेरे लिए बेगार में काम करके तेरी ख़िदमत करें।

[12] लेकिन अगर वह हथियार डालने से इन्कार करें और जंग छिड़ जाए तो शहर का मुहासरा कर।

[13] जब रब तेरा ख़ुदा तुझे शहर पर फ़त्ह देगा तो उस के तमाम मर्दों को हलाक कर देना।

[14] तू तमाम माल-ए-ग़नीमत औरतों, बच्चों और मवेशियों समेत रख सकता है। दुश्मन की जो चीज़ें रब ने तेरे हवाले कर दी हैं उन सब को तू इस्तेमाल कर सकता है।

[15] यूँ उन शहरों से निपटना जो तेरे अपने मुल्क से बाहर हैं।

[16] लेकिन जो शहर उस मुल्क में वाक़े हैं जो रब तेरा ख़ुदा तुझे मीरास में दे रहा है, उन के तमाम जानदारों को हलाक कर देना।

[17] उन्हें रब के सपुर्द करके मुकम्मल तौर पर हलाक करना, जिस तरह रब तेरे ख़ुदा ने तुझे हुक्म दिया है। इस में हित्ती, अमोरी, कनआनी, फ़रिज़्ज़ी, हिव्वी और यबूसी शामिल हैं।

[18] अगर तू ऐसा न करे तो वह तुम्हें रब तुम्हारे ख़ुदा का गुनाह करने पर उकसाएँगे। जो घिनौनी हरकतें वह अपने देवताओं की पूजा करते वक़्त करते हैं उन्हें वह तुम्हें भी सिखाएँगे।

[19] शहर का मुहासरा करते वक़्त इर्दगिर्द के फलदार दरख़्तों को काट कर तबाह न कर देना ख़्वाह बड़ी देर भी हो जाए, वर्ना तू उन का फल नहीं खा सकेगा। उन्हें न काटना। क्या दरख़्त तेरे दुश्मन हैं जिन का मुहासरा करना है? हरगिज़ नहीं!

[20] उन दरख़्तों की और बात है जो फल नहीं लाते। उन्हें तू काट कर मुहासरे के लिए इस्तेमाल कर सकता है जब तक शहर शिकस्त न खाए।

इस्तिस्ना — Chapters