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[1] परमेसर के घर म जाय के बेरा अपन बरताव म सावधानी रखव। लकठा म जा अऊ सुन, येकर बदले कि ओ मुरूखमन सहीं बलिदान चघा, जऊन मन नइं जानंय कि ओमन का गलत करत हवंय।

[2] अपन कोनो बात कहे म जल्दबाजी झन कर, न ही अपन मन म परमेसर के आघू म कोनो बात कहे म जल्दबाजी कर। परमेसर ह स्वरग म हवय अऊ तेंह धरती म हस, एकरसेति तोर बात ह थोरकन होवय।

[3] बहुंत अकन काम म धियान देय के कारन सपना आथे, अऊ बहुंत अकन बात कहे के कारन मुरूख ह पहिचाने जाथे।

[4] जब तेंह कोनो मन्नत मानथस, त ओला पूरा करे म देरी झन कर। काबरकि परमेसर ह मुरूख ले खुस नइं होवय, एकरसेति अपन मन्नत ला पूरा कर।

[5] मन्नत मानके ओला पूरा नइं करई ले जादा बने ये अय कि तें मन्नत ही नइं मान।

[6] अइसन बात झन कह, जऊन ह तोर पाप म पड़े के कारन होही। अऊ मंदिर के दूत ला ये झन कह, “मोर मन्नत मनई ह एक गलती रिहिस।” तोर कहे बात के कारन परमेसर ला काबर गुस्सा होना पड़य अऊ ओह तोर करे काम ला नास कर डारय?

[7] जादा सपना देखई अऊ बहुंत बात कहई ह बेकार अय। एकरसेति परमेसर के भय मान।

[8] कहूं तेंह ये देखथस कि कोनो छेत्र म गरीब ऊपर अतियाचार होवत हे, अऊ नियाय अऊ अधिकार नइं मिलत हे, त अइसन बात ऊपर हैरान झन होबे, काबरकि एक अधिकारी के ऊपर दूसर अधिकारी होथे अऊ ओ दूनों के ऊपर घलो अऊ बड़े अधिकारी होथें।

[9] जब भुइयां म जादा फसल होथे, त ओकर ले सब ला फायदा होथे, राजा ला खुद खेत ले फायदा होथे।

[10] जऊन ह रूपिया-पईसा ले मया करथे, ओकर करा कभू परयाप्त नइं रहय; जऊन ह धन ले मया करथे, ओला कभू अपन कमई ले संतोस नइं होवय। येह घलो बेकार ए।

[11] जइसे चीज-वस्तुमन बढ़थें, वइसे ही ओ चीजमन के उपयोग करनेवालामन के संखिया घलो बढ़थे। अऊ मालिक ला ओमन ले का फायदा होथे सिरिप ये कि ओह ओमन ला देखके संतोस होथे?

[12] मेहनत करइया ला बने नींद आथे, चाहे ओह जादा खावय या कम, पर जहां तक धनी के बात ए, ओकर धन के बहुंतायत ह ओला सोये बर नइं देय।

[13] मेंह धरती म एक बहुंत खराप बात देखे हंव: मालिक ह अपन नुकसान बर धन इकट्ठा करिस,

[14] या धन ह कुछू बिपत्ति म खतम हो गीस, अऊ जब ओकर लइकामन होईन त उत्तराधिकार म लइकामन बर कुछू नइं बांचिस।

[15] हर एक ह अपन दाई के गरभ ले नंगरा आथे, अऊ जइसे हर एक जन आथे, वइसे ओह चले जाथे। ओह अपन हांथ म अपन मेहनत के कुछू नइं ले जावय।

[16] येह घलो बहुंत खराप बात ए: जइसे एक मनखे ह आथे, वइसे ओह चले जाथे, त ओला का फायदा होथे, जबकि ओह बेकार म मेहनत करथे?

[17] ओह अपन पूरा जिनगी बहुंत निरासा, दुख अऊ कोरोध के संग अंधियार म खाना खाथे।

[18] जऊन बने बात मेंह देखे हंव, ओह ये अय: धरती म परमेसर के दिये जिनगी के थोरकन दिन म, मनखे बर येह उचित अय कि ओह खावय, पीयय अऊ अपन कठोर मेहनत म संतुस्ट रहय—काबरकि येह ओकर भाग ए।

[19] येकर अलावा, जब परमेसर ह कोनो ला धन-संपत्ति अऊ अधिकार देथे, अऊ येमन के आनंद उठाय के योग्यता देथे, त ओह अपन भाग ला स्वीकार करय अऊ अपन मेहनत म खुस रहय—येह परमेसर के एक बरदान ए।

[20] ओह कभू-कभू ही अपन जिनगी के दिन ऊपर बिचार करथे, काबरकि परमेसर ह ओला ओकर मन के खुसी म लगाय रखथे।

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