Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 2:17

[1] अपन अनाज ला पानी जहाज ले समुंदर के ओ पार भेजव; बहुंत दिन के बाद तुमन ला येकर लाभ मिल सकथे।

[2] अपन पूंजी सात ठन जोखिम के काम म लगावव, हव, बल्कि आठ ठन म लगावव; तुमन नइं जानव कि देस म का बिपत्ति आ सकथे।

[3] अगर बादरमन पानी ले भरे हवंय, त ओमन ले धरती म बारिस होथे। एक रूख ह चाहे दक्खिन म गिरय या उत्तर म गिरय, जिहां येह गिरथे, उहां येह पड़े रहिही।

[4] जऊन मनखे ह हवा ला देखत रहिथे, ओह बीजा नइं बोए; अऊ जऊन ह बादरमन ला देखत रहिथे, ओह फसल नइं लुए।

[5] जइसे कि तुमन हवा के रसता ला नइं जानव, या ये नइं जानव कि दाई के गरभ म लइका के देहें ह कइसे बनथे, ओही किसम ले तुमन परमेसर के काम ला नइं समझ सकव, जऊन ह कि जम्मो चीज के बनानेवाला ए।

[6] अपन बीजा ला बिहनियां ही बो देवव, अऊ सांझ के आलसी बनके बईठे झन रहव, काबरकि तुमन नइं जानव कि कते ह फर दीही, येह या ओह, या फेर दूनों बराबर बने फर दीहीं।

[7] अंजोर ह मन ला भाथे, अऊ येह सूरज ला देखे म आंखी ला बने लगथे।

[8] एक मनखे ह बहुंत साल तक जी सकथे, त ओह जम्मो चीज के आनंद उठाय। पर ओह अपन अंधियार भरे दिनमन ला सुरता रखय, काबरकि येमन बहुंते होहीं। अवइया हर एक चीज ह बेकार ए।

[9] हे जवान, तेंह खुस रह, जब तेंह जवान हस, अऊ तोर हिरदय ह तोला तोर जवानी के दिन म आनंदित करय। अपन हिरदय के ईछा अऊ जऊन कुछू तुम्हर आंखी देखथे, ओकर पाछू चलव, पर ये बात ला जानव कि ये जम्मो चीज बर परमेसर ह तुम्हर नियाय करही।

[10] एकरसेति अपन हिरदय ले दुख ला दूर करव अऊ अपन देहें के समस्या ला निकाल दव, काबरकि जवानी अऊ ताकत बेकार अंय।

सभोपदेसक — Chapters