[1] मेंह अपनआप ला कहेंव, “अब आ, मेंह तोला सुख-सुबिधा के दुवारा परखहूं अऊ येकर दुवारा ये पता लगाहूं कि का ह बने अय।” पर ये भी बेकार साबित होईस।
[2] मेंह कहेंव, “हंसई ह पागलपन ए। अऊ सुख-सुबिधा ले का मिलथे?”
[3] मेंह अंगूर के मंद पीके अऊ मुरूखता ला अपनाके खुस रहे के कोसिस करेंव—मोर मन ह अभी घलो बुद्धि के अगुवई म रहय। मेंह देखे चाहत रहेंव कि धरती म मनखे बर ओकर जिनगी के थोरकन दिन म का ह बने अय।
[4] मेंह बड़े-बड़े काम करेंव: मेंह अपन बर घरमन ला बनांय अऊ अंगूर के बारी लगांय।
[5] मेंह बारी-बगीचा अऊ सार्वजनिक उदयान लगांय अऊ ओमन म जम्मो किसम के फलदार रूखमन ला लगांय
[6] मेंह ओ रूखमन म पानी पलोय बर बड़े-बड़े तरिया बनांय।
[7] मेंह पुरूस अऊ महिला गुलाममन ला बिसांय अऊ मोर करा आने गुलाममन घलो रिहिन, जऊन मन मोर घर म जनमे रिहिन। यरूसलेम म मोर ले पहिले रहइयामन ले मोर करा जादा गाय-बईला अऊ भेड़-बकरी के झुंड रिहिस।
[8] मेंह अपन बर सोन, चांदी अऊ राजा अऊ राजमन ले धन इकट्ठा करेंव। मेंह गायक-गायिका अऊ संग म रखैल घलो रखेंव—जेकर ले मनखे ला खुसी मिलथे।
[9] मोर ले पहिले यरूसलेम म जऊन मन रिहिन, ओ सबले मेंह बहुंत महान हो गेंव। ये जम्मो बात म, मोर बुद्धि ह मोर संग रिहिस।
[10] मोर आंखीमन जऊन चीज के ईछा करिन, ओ चीज ला मेंह लानेंव; सुख-सुबिधा ले मेंह अपन मन ला दूरिहा नइं रखेंव। मोर जम्मो काम म मोर मन ह खुस होईस, अऊ येह मोर मेहनत के ईनाम रिहिस।
[11] तभो ले जब मेंह अपन हांथ ले करे जम्मो काम अऊ मेहनत ले पाय चीजमन के जांच-पड़ताल करेंव, त हर चीज ह बेकार लगिस अऊ हवा के पाछू भागे सहीं लगिस, धरती म येकर कोनो फायदा नइं।
[12] तब मेंह अपन सोच-बिचार ला बुद्धि, अऊ पागलपन अऊ मुरूखता के तरफ लगांय। राजा के उत्तराधिकारी ह ओकर ले जादा का कर सकथे जो पहिले ले करे जा चुके हवय?
[13] मेंह देखेंव कि बुद्धि ह मुरूखता ले बने अय, जइसे कि अंजोर ह अंधियार ले बने होथे।
[14] बुद्धिमान के आंखी ह ओकर मुड़ म होथे, जबकि मुरूख ह अंधियार म चलथे; पर मेंह ये बात ला समझ गेंव कि आखिरी म दूनों के हालत एक समान होथे।
[15] तब मेंह अपनआप ले कहेंव, “आखिर म मुरूख के हालत सहीं मोर हालत घलो होही। तब बुद्धिमान बनके मोला का फायदा होथे?” मेंह अपनआप ले कहेंव, “येह घलो बेकार ए।”
[16] काबरकि मुरूख के सहीं बुद्धिमान ला जादा समय तक सुरता नइं करे जाही; समय ह पहिले ही आ चुके हवय जब दूनों भुला देय गे हवंय। मुरूख के सहीं, बुद्धिमान घलो जरूर मरथे!
[17] एकरसेति मोला जिनगी ले घिन हो गीस, काबरकि धरती म जऊन काम करे गीस, ओह मोर बर दुखदाई रिहिस। ये जम्मो ह बेकार ए, हवा के पाछू भागे सहीं अय।
[18] मोला ओ जम्मो चीज ले नफरत हो गीस, जेकर बर मेंह धरती म मेहनत करे रहेंव, काबरकि मोला येमन ला ओकर बर छोंड़ना पड़ही, जऊन ह मोर बाद आही।
[19] अऊ कोन जानथे कि ओ मनखे ह बुद्धिमान होही कि मुरूख? तभो ले मोर मेहनत के ओ जम्मो कमई ह ओकर अधिकार म हो जाही, जेकर बर मेंह धरती म पूरा मेहनत अऊ कुसलता देखाय रहेंव। येह घलो बेकार ए।
[20] एकरसेति धरती म करे गय मोर जम्मो कठोर मेहनत ऊपर मोर मन ह निरास होय लगिस।
[21] काबरकि एक मनखे ह बुद्धि, गियान अऊ कुसलता के संग मेहनत करथे, अऊ तब ओह अपन ओ जम्मो चीज ला ओ मनखे बर छोंड़ देथे, जऊन ह येकर बर मेहनत नइं करे हवय। येह घलो बेकार ए अऊ बड़े दुख के बात ए।
[22] मनखे ह धरती म जऊन कठोर मेहनत अऊ काम करथे, ओकर बदले ओला का मिलथे?
[23] जिनगी भर ओकर काम ह दुख अऊ दरद ले भरे होथे; अऊ त अऊ रथिया घलो ओकर दिमाग ला अराम नइं मिलय। येह घलो बेकार ए।
[24] एक मनखे बर येकर ले बने अऊ कुछू नो हय कि ओह खावय, पीयय अऊ अपन मेहनत म संतोस करय। मेंह देखथंव कि येह घलो परमेसर कोति ले मिलथे,
[25] काबरकि ओकर बिगर, कोन ह खा सकथे या आनंद उठा सकथे?
[26] जऊन मनखे ले परमेसर ह खुस होथे, ओला ओह बुद्धि, गियान अऊ खुसी देथे, पर पापी मनखे ला परमेसर ह धन इकट्ठा करे अऊ बटोरे के काम देथे कि ओह ओ धन ला ओ मनखे के हांथ म देय दे, जेकर ले परमेसर खुस रहिथे। येह घलो बेकार ए, हवा के पाछू भागे सहीं अय।