[1] उन दिनों में यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला आकर यहूदिया के जंगल में यह संदेश देने लगा,
[2] "मन बदलो, क्योंकि स्वर्ग का राज्य नज़दीक है।"
[3] यह वही है जिसके बारे में यशायाह नबी के द्वारा भविष्यद्वाणी की गयी थी। वह यह कि जंगल में एक पुकारने वाले की आवाज़ सुनायी दी कि प्रभु परमेश्वर के आगमन के लिए अपने आप को तैयार करो।
[4] यूहन्ना ऊँट के बालों से बने कपड़े पहनता था। वह टिड्डियाँ और शहद खाता था।
[5] यरुशलेम, सारे यहूदिया और यरदन के आस-पास के लोग यूहन्ना के पास आने लगे।
[6] अपने-अपने पापों को मान लेने के बाद यूहन्ना ने उन्हें यर्दन नदी में बपतिस्मा दिया।
[7] जब उसने बहुत सारे फ़रीसियों और सदूकियों को बपतिस्मे के लिए अपने पास आते देखा, तो उसने उन से कहा, "हे साँप के बच्चो, तुम्हें किसने बताया कि भविष्य के न्याय से बचो?
[8] इसलिए तुम्हारे मन के बदलाव का फल तुम्हारे जीवन में दिखाई दे।
[9] इस गलतफ़हमी में मत रहो कि अब्राहम तुम्हारा पिता है क्योंकि मैं तुम से कहता हूँ कि इन पत्थरों से परमेश्वर अब्राहम के लिए बच्चे पैदा कर सकते हैं।
[10] अब कुल्हाड़ी पेड़ों की जड़ पर रखी हुयी है। इसलिए जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, काटा और आग में डाला जाता है।
[11] मैं तो तुम्हें पानी से बपतिस्मा देता हूँ जो मन बदलाव को दिखाता है, लेकिन जो मेरे बाद आने वाले हैं, वह मुझ से ज्य़ादा ताकतवर हैं। मैं उनकी जूती उठाने के लायक भी नहीं हूँ। वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देंगे।
[12] उनका सूप उनके हाथ में है। वह अपना खलिहान अच्छी तरह से साफ़ करेंगे। वह अपने गेहूँ को खत्ते में इकट्ठा करेंगे, लेकिन भूसे को उस आग में जलाएँगे, जो कभी नहीं बुझेगी।
[13] उस समय यीशु गलील से यरदन के किनारे पर यूहन्ना के पास बपतिस्मा लेने आए।
[14] लेकिन यूहन्ना ने उन्हें मना करते हुए कहा, "मुझे आपके हाथ से बपतिस्मा लेने की ज़रूरत है और आप मेरे हाथ से बपतिस्मा लेना चाहते हैं?"
[15] यीशु ने जवाब में कहा, "अभी ऐसा ही होने दो, क्योंकि हमें इसी तरह से करना ज़रूरी है।" तब यूहन्ना ने उनकी बात मान ली।
[16] यीशु बपतिस्मा लेकर जैसे ही पानी में से ऊपर आए, उनके लिए आसमान खुल गया। यीशु ने परमेश्वर के आत्मा को फ़ाख्ते की तरह उतरते और अपने ऊपर आते देखा।
[17] साथ ही आसमान से आवाज़ आयी, "यह मेरा प्यारा बेटा है, जिस से मैं बहुत खुश हूँ।"