[1] यीशु ये बातें कहने के बाद गलील से चल पड़े। वहाँ से वह यरदन के पार यहूदिया के इलाके में आए।
[2] एक बड़ी भीड़ उनके पीछे चल पड़ी और उन्हों ने वहाँ पर उनको स्वस्थ किया।
[3] फ़रीसी भी यीशु को परखने के लिए आकर कहने लगे, "क्या यह एक इन्सान के लिए जायज़ है कि वह अपनी पत्नी को किसी भी मुद्दे पर तलाक दे दे?"
[4] यीशु ने जवाब में उन से कहा, "क्या तुम ने यह नहीं पढ़ा कि जैसे परमेश्वर ने उन्हें शुरूआत में पति-पत्नी करके ठहराया, यह भी कहा,
[5] 'इस वजह से पुरुष अपने पिता और माता को छोड़ कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा और दोनों एक देह होंगे?'
[6] इसलिए वे दोनों दो नहीं लेकिन एक देह होंगे। इस कारण जिन्हें परमेश्वर ने जोड़ा है उन्हें कोई अलग न करे।"
[7] उन्हों ने यीशु से कहा, "फिर मूसा ने यह आज्ञा क्यों दी कि तलाकनामा देकर अलग हो जाए?"
[8] यीशु ने उन से कहा, "तुम्हारे कठोर और हठीले मन की वजह से मूसा ने तुम्हें तलाक देने की अनुमति दी थी। लेकिन शुरूआत से ऐसा नहीं था।
[9] मैं कहता हूँ जो कोई यौन अनैतिकता (व्यभिचार) के अलावा किसी और वजह से अपनी पत्नी को तलाक दे और किसी और से विवाह कर ले, वह व्यभिचार करता है। जो कोई त्यागी हुयी स्त्री से विवाह करता है, वह व्यभिचार करता है।"
[10] यीशु के शिष्यों ने उससे कहा, "अगर ऐसा है तो विवाह करना बेकार है।"
[11] लेकिन यीशु ने उन लोगों से कहा, "सभी लोग अविवाहित नहीं रह सकते, सिर्फ़ वे जिन्हें यह दान दिया गया है।
[12] कुछ पैदाईशी नपुंसक हैं। कुछ को लोगों ने नपुंसक बनाया है। कुछ लोगों ने परमेश्वर के राज्य के लिए अपने आप को नपुंसक बनाया है। जो व्यक्ति इस स्थिति को अपना सकता है, वह अपना ले।"
[13] तब यीशु के पास छोटे बच्चों को लाया गया, ताकि यीशु उनके ऊपर अपने हाथों को रखकर प्रार्थना करें। लेकिन शिष्यों ने उन लोगों को डाँटा।
[14] यीशु ने कहा, "छोटे बच्चों को मेरे पास आने दो। उन्हें मना मत करो, क्योंकि परमेश्वर का राज्य बच्चों का सा स्वभाव रखने वाले लोगों का ही है।"
[15] यीशु ने अपने हाथ उन पर रखे और वहाँ से चल दिए।
[16] अचानक ही वहाँ एक आदमी आकर कहने लगा, "अच्छे गुरू, अनन्त जीवन पाने के लिए मैं कौन सा अच्छा काम करूँ?"
[17] यीशु ने उस से कहा, "तुम मुझे अच्छा क्यों कह रहे हो? परमेश्वर को छोड़कर कोई भी अच्छा नहीं है। लेकिन अगर तुम जीवन पाना चाहते हो, तो हुक्म मानो।"
[18] उस ने कहा, "कौन सा हुक्म?" यीशु ने कहा, "तुम हत्या मत करना, व्यभिचार मत करना, चुराना नहीं। झूठी गवाही मत देना।
[19] अपने माता-पिता की इज़्ज़त करना और जितना प्यार खुद से करते हो, उतना ही अपने पड़ोसी से करना।"
[20] नवजवान व्यक्ति ने यीशु से कहा, "ये सब तो मैं बचपन से करता आ रहा हूँ। अब मेरे में क्या कमी है?"
[21] यीशु ने उस से कहा, "अगर सिद्ध बनना चाहते हो, तो जाओ, जो कुछ तुम्हारे पास है वह गरीबों को दे दो। मेरे शिष्य बन जाओ और तुम्हें स्वर्ग में दौलत मिलेगी।"
[22] यह बात सुनकर वह नवजवान उदास होकर चला गया, क्योंकि वह बहुत अमीर था।"
[23] तब यीशु ने अपने शिष्यों से कहा, "मैं तुम से सच कहता हूँ, कि एक अमीर इन्सान के लिए स्वर्ग के राज्य में दाखिल होना मुश्किल है।
[24] मैं फिर तुम से कहता हूँ, एक सुई के छेद में ऊँट का पार हो जाना आसान है, लेकिन एक अमीर इन्सान के लिए परमेश्वर के राज्य में दाखिल हो पाना मुश्किल है।"
[25] जब यीशु के शिष्यों ने यह बात सुनी, तो वे आश्चर्य से भरकर कहने लगे, "तो मुक्ति कौन पा सकता है?"
[26] तब यीशु ने उनकी तरफ़ देखकर उन से कहा, "इन्सान से तो यह नहीं हो सकता, लेकिन परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है।"
[27] तब पतरस ने जवाब दिया, "देखिए आपके पीछे चलने के लिए हम ने अपना सब कुछ छोड़ दिया है, इसलिए हमें क्या मिलेगा?"
[28] और यीशु ने उन लोगों से कहा, "मैं तुम से सच-सच कहता हूँ, तुम जितनों ने मेरी मान ली है नयी शुरूआत (सृष्टि) के समय जब परमेश्वर का पुत्र अपनी महिमा से सिंहासन पर बैठकर इस्राएल के बारह गोत्रों का इन्साफ़ करेगा तब तुम भी जो मेरे पीछे आए हो, तुम भी बाहर सिंहासनों पर बैठकर इस्राएल के बारह गोत्रों का न्याय करोगे।
[29] हर एक वह जन जिसने घरों, भाइयों बहनों, पिता, माता, पत्नी, बच्चों, या जायदाद को मेरी खातिर छोड़ दिया है, सौ गुना प्रतिफल पाने के साथ ही हमेशा की ज़िन्दगी पाएगा।
[30] परन्तु कई जो पहले हैं वे पिछले और जो पिछले हैं वे पहले होंगे।"