[1] शीनार देश के राजा अमराफेल, एलासार के राजा आरिओख, एलाम के राजा खेदोरलाओमर और गोईम के राजा तिदाल ने अपने शासनकाल में,
[2] एकजुट होकर सोदोम के राजा बेरा, अमोराह के राजा बिरशा, अदमाह के राजा शीनाब, ज़ेबोईम के राजा शेमेबेर तथा बेला (अर्थात ज़ोअर) के राजा के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया.
[3] ये सभी एक साथ होकर सिद्दिम घाटी (अर्थात लवण-सागर) के पास इकट्ठे हो गए.
[4] बारह वर्ष तक तो वे खेदोरलाओमर के अधीन रहे, किंतु तेरहवें वर्ष में उन्होंने विरोध किया.
[5] चौदहवें वर्ष में खेदोरलाओमर तथा उसके मित्र राजाओं ने आकर अश्तेरोथ-करनाइम में रेफाइम को, हाम में ज़ुज़ीम को शेवेह-किरयथियों में एमियों को,
[6] सेईर पर्वत में निर्जन प्रदेश के पास एल-पारान तक, होरियों को हरा दिया.
[7] इसके बाद वे मुड़े और एन-मिशपत (अर्थात कादेश) आ गए और पूरे अमालेकियों को तथा हज़ज़ोन-तामार में रह रहे अमोरियों को भी हरा दिया.
[8] तब सोदोम, अमोराह, अदमाह, ज़ेबोईम तथा बेला (अर्थात ज़ोअर) के राजा बाहर निकल गए और उन्होंने सिद्दिम की घाटी में उनके विरुद्ध युद्ध किया.
[9] यह लड़ाई एलाम के राजा खेदोरलाओमर, गोईम के राजा तिदाल, शीनार के राजा अमराफेल तथा एलासार के राजा आरिओख—ये चार राजा उन पांच राजाओं से लड़ रहे थे.
[10] सिद्दिम घाटी में सब जगह गड्ढे थे. जब सोदोम तथा अमोराह के राजा युद्ध से भाग रहे थे, तो कुछ लोग गड्ढों में जा गिरे और बाकी बचे लोग पर्वत पर की बस्ती में भाग गए.
[11] तब चारों राजाओं ने सोदोम तथा अमोराह से सब कुछ ले लिया और खाने का सब सामान भी ले गए.
[12] वे अपने साथ अब्राम के भतीजे लोत एवं उसकी पूरी संपत्ति भी ले गए, क्योंकि लोत उस समय सोदोम में रह रहा था.
[13] और युद्ध क्षेत्र से भागकर एक व्यक्ति ने इब्री अब्राम को ये बातें बताई. अब्राम तो ममरे नामक व्यक्ति, जो अमोरी जाति का था, उसके बड़े बलूत पेड़ों के पास रहता था. ममरे, एशकोल एवं ऐनर का भाई था; और इन्होंने अब्राम से वाचा बांधी थी.
[14] जब अब्राम को यह पता चला कि लोत को बंदी बना लिया गया है, तो उसने अपने पूरे परिवार को इकट्ठा किया और 318 जो युद्ध सीखे हुए वीर थे, साथ लेकर दान नामक स्थान तक उनका पीछा किया.
[15] रात्रि में अब्राम ने अपने लोगों को उनके ऊपर हमला करने के लिये बांट दिया और अब्राम तथा उनके सेवकों ने मिलकर उन्हें पराजित कर दिया तथा उनका दमेशेक के उत्तर में स्थित नगर होबाह तक पीछा किया.
[16] अब्राम ने उन लोगों से सब सामान वापस ले लिया और लोत, उसके सभी लोग और उसकी संपत्ति भी उनसे ले ली.
[17] जब अब्राम खेदोरलाओमर तथा उनके मित्र राजाओं को हरा कर लौट रहे थे, सोदोम का राजा, शावेह घाटी (जिसे राजा की घाटी भी कहा जाता है) में अब्राम से मिलने आया.
[18] शालेम के राजा मेलखीज़ेदेक, जो परमेश्वर के पुरोहित थे, भोजन एवं दाखरस लेकर आये.
[19] उन्होंने अब्राम को आशीष देते हुए कहा, “स्वर्ग और पृथ्वी को बनानेवाले, परम प्रधान परमेश्वर की ओर से तुम धन्य हो,
[20] धन्य हैं परम प्रधान परमेश्वर, जिन्होंने आपके शत्रुओं को आपके अधीन कर दिया है.” अब्राम ने मेलखीत्सेदेक को सबका दशमांश दिया.
[21] सोदोम के राजा ने अब्राम से कहा, “मुझे इन्सानों को दे दीजिए, सामान सब आप रख लीजिए.”
[22] सोदोम के राजा को अब्राम ने उत्तर दिया, “मैंने स्वर्ग और पृथ्वी के अधिकारी, याहवेह परमेश्वर के सामने शपथ ली है,
[23] कि मैं आपकी संपत्ति में से एक भी वस्तु, यहां तक कि एक धागा या जूती का बंधन तक न लूंगा, ताकि इन चीज़ों को देकर आप यह न कहने लगें, ‘मैंने अब्राम को धनी बनाया है.’
[24] मैं आप से कुछ नहीं लूंगा पर सिर्फ खाना, जिसे मेरे लोगों ने खा लिया है और उनका हिस्सा, जो मेरे साथ गये थे याने कि ऐनर, एशकोल तथा ममरे का हिस्सा, मैं आपको नहीं लौटाऊंगा. उन्हें अपना हिस्सा रखने दीजिये.”