[1] पूरी पृथ्वी पर एक ही भाषा तथा एक ही बोली थी.
[2] उस समय लोग पूर्व दिशा की ओर चलते हुए, शीनार देश में मैदान देखकर रुक गये और वहीं रहने लगे.
[3] वे आपस में कहने लगे, “हम सब मिलकर अच्छी ईंट बनाकर आग में पकायें.” उन्होंने पत्थर के स्थान पर ईंटों का और चूने के स्थान पर मिट्टी के गारे को काम में लिया.
[4] और उन्होंने कहा, “आओ, हम अपने लिए एक नगर और मीनार बनाएं; मीनार इतनी ऊंची बनाएं कि आकाश तक जा पहुंचे, ताकि हम प्रसिद्ध हो जाएं. अन्यथा हम सारी पृथ्वी में इधर-उधर हो जायेंगे.”
[5] याहवेह उस नगर तथा मीनार को देखने उतर आए, जिसे लोग बना रहे थे.
[6] याहवेह ने सोचा, “ये लोग एक झुंड हैं, इनकी एक ही भाषा है, और इन्होंने सोचकर काम करने की शुरुआत की हैं; अब आगे भी इस प्रकार और काम करेंगे, तो इनके लिए कोई काम मुश्किल नहीं होगा.
[7] आओ, हम उनकी भाषा में गड़बड़ी लाएं ताकि वे एक दूसरे की बात को समझ न सकें.”
[8] इस प्रकार याहवेह ने उन्हें अलग कर दिया और वे पृथ्वी पर अलग-अलग जगह पर चले गये और नगर व मीनार का काम रुक गया.
[9] इसी कारण इस स्थान का नाम बाबेल पड़ा, क्योंकि यहीं याहवेह ने भाषा में गड़बड़ी डाली थी तथा यहीं से याहवेह ने उन्हें पूरी पृथ्वी पर फैला दिया.
[10] शेम के वंश का विवरण यह है. जलप्रलय के दो साल बाद अरफाक्साद का जन्म हुआ तब शेम 100 साल के थे.
[11] अरफाक्साद के जन्म के बाद शेम 500 वर्ष और जीवित रहे. इनके अतिरिक्त उनके और पुत्र-पुत्रियां उत्पन्न हुईं.
[12] जब अरफाक्साद 35 साल के हुए, तब शेलाह का जन्म हुआ.
[13] शेलाह के जन्म के बाद अरफाक्साद 403 वर्ष और जीवित रहे तथा उनके और पुत्र-पुत्रियां उत्पन्न हुईं.
[14] जब शेलाह 30 वर्ष के हुए, तब एबर का जन्म हुआ.
[15] एबर के जन्म के बाद शेलाह 403 वर्ष और जीवित रहे तथा उनके और पुत्र-पुत्रियां उत्पन्न हुईं.
[16] जब एबर 34 वर्ष के हुए, तब पेलेग का जन्म हुआ.
[17] पेलेग के जन्म के बाद एबर 430 वर्ष और जीवित रहे तथा उनके और पुत्र-पुत्रियां उत्पन्न हुईं.
[18] जब पेलेग 30 वर्ष के हुए, तब रेउ का जन्म हुआ.
[19] रेउ के जन्म के बाद पेलेग 209 वर्ष और जीवित रहे तथा उनके और पुत्र-पुत्रियां उत्पन्न हुईं.
[20] जब रेउ 32 वर्ष के हुए, तब सेरुग का जन्म हुआ.
[21] सेरुग के जन्म के बाद रेउ 207 वर्ष और जीवित रहे तथा उनके और पुत्र-पुत्रियां उत्पन्न हुईं.
[22] जब सेरुग 30 वर्ष के हुए, तब नाहोर का जन्म हुआ.
[23] नाहोर के जन्म के बाद सेरुग 200 वर्ष और जीवित रहे तथा उनके और पुत्र-पुत्रियां उत्पन्न हुईं.
[24] जब नाहोर 29 वर्ष के हुए, तब तेराह का जन्म हुआ.
[25] तेराह के जन्म के बाद नाहोर 119 वर्ष और जीवित रहे तथा उनके और पुत्र-पुत्रियां उत्पन्न हुईं.
[26] जब तेराह 70 वर्ष के हुए, तब अब्राम, नाहोर तथा हारान का जन्म हुआ.
[27] तेराह के वंशज ये हैं. तेराह से अब्राम, नाहोर तथा हारान का जन्म हुआ; हारान ने लोत को जन्म दिया.
[28] हारान की मृत्यु उनके पिता के जीवित रहते उसकी जन्मभूमि कसदियों के ऊर में हुई.
[29] अब्राम तथा नाहोर ने विवाह किया. अब्राम की पत्नी का नाम सारय तथा नाहोर की पत्नी का नाम मिलकाह था, जो हारान की पुत्री थी. हारान की अन्य पुत्री का नाम यिसकाह था.
[30] सारय बांझ थी. उनकी कोई संतान न थी.
[31] तेराह ने अपने पुत्र अब्राम तथा अपने पोते लोत को, जो हारान का पुत्र था तथा अब्राम की पत्नी सारय को अपने साथ लिया और वे सब कसदियों के ऊर से हारान नामक जगह पहुंचे और वहीं रहने लगे.
[32] हारान में तेराह की मृत्यु हो गई, तब वे 205 वर्ष के थे.