Listen to this chapter • 0:41
[1] जब ख़ुदावन्द सिय्यून के गुलामों को वापस लाया, तो हम ख़्वाब देखने वालों की तरह थे।
[2] उस वक़्त हमारे मुँह में हँसी, और हमारी ज़बान पर रागनी थी; तब क़ौमों में यह चर्चा होने लगा, “ख़ुदावन्द ने इनके लिए बड़े बड़े काम किए हैं।”
[3] ख़ुदावन्द ने हमारे लिए बड़े बड़े काम किए हैं, और हम ख़ुश हैं!
[4] ऐ ख़ुदावन्द! दखिन की नदियों की तरह, हमारे गुलामों को वापस ला।
[5] जो आँसुओं के साथ बोते हैं, वह खु़शी के साथ काटेंगे।
[6] जो रोता हुआ बीज बोने जाता है, वह अपने पूले लिए हुए ख़ुश लौटेगा।
ज़बूर — Chapters
11:0021:4031:1741:1451:5761:2172:3081:1892:46102:45111:01121:11130:59141:09150:56161:29172:13186:33191:58201:10211:45223:55230:57241:20252:36261:23272:18281:31291:22301:38313:34321:41332:27342:31353:52361:37374:46382:33392:09402:56411:48421:58430:58443:20452:31461:26471:04481:36492:30502:41512:24521:17531:06540:53552:56561:41571:35581:28592:17601:29610:57621:38631:20641:18651:51662:16670:51684:39694:17700:44713:07722:28732:59741:31751:16761:18772:18788:11791:51802:07812:01820:55832:02841:37851:33862:15870:48882:10895:52902:04911:58921:44930:43942:21951:22961:35971:23981:09991:131000:421011:071022:501032:311043:521054:281065:001074:241081:261093:191100:521111:151121:101130:521140:501151:441161:481170:191182:4511917:141200:401210:451220:511230:401240:461250:421260:411270:491280:401290:491300:551310:341321:551330:351340:231352:111362:241371:081381:121392:441401:331411:181421:011431:381441:501452:091461:111471:591481:251490:591500:51