[1] यीशु जब फिर आराधनालय में गए तो उन्हों ने एक सूखे हाथ वाले इन्सान को देखा।
[2] फ़रीसी वहाँ यह देखने की फ़िराक में थे, कि यीशु सब्त के दिन उसे स्वस्थ करते हैं कि नहीं।
[3] यीशु ने सूखे हाथ वाले आदमी से कहा, "जरा बीच में तो आओे।"
[4] तब यीशु ने फ़रीसियों से पूछा, "सब्त के दिन क्या करना सही है-बुरा या भला, किसी को बचाना या मारना?" लेकिन सभी खामोश रहे।
[5] यीशु ने उनके मन की कठोरता से उदास होकर, बड़े गुस्से से उनकी तरफ़ देखा और उस व्यक्ति से बोले, "अपना हाथ मेरी तरफ़ लाओ।" ज्यों ही उसने ऐसा किया, वह अच्छा हो गया।
[6] तब फ़रीसी एक दम बाहर जाकर हेरोदियों के साथ मिलकर सलाह मशविरा करने लगे, कि यीशु को कैसे मार डालें।
[7] इसके बाद अपने शिष्यों के साथ यीशु झील के तरफ़ चल दिए और गलील से एक बड़ी भीड़ उनके साथ हो ली।
[8] यह सुनकर, कि यीशु कैसे अजीब काम करते हैं, यहूदिया, यरूशलेम, इदूमिया यरदन के पार से और सूर-सैदा के आस-पास से एक बड़ी भीड़ उनके पास आयी।
[9] यीशु ने अपने शिष्यों से कहा, "भीड़ की वजह से एक छोटी नाव मेरे लिये तैयार रखो, ताकि लोग मुझे दबा न सकें।
[10] इसलिये कि यीशु ने लोगों की बीमारी दूर की थी, बीमारी और पीड़ित लोग यीशु को छूने के लिए गिरे पड़ते थे।
[11] गंदी आत्माएँ यीशु को देखकर गिर पड़ती थीं और चिल्लाकर कहती थीं कि यीशु परमेश्वर हैं।
[12] यीशु ने बार-बार लोगों को सावधान किया कि वे उनके बारे में ज्य़ादा सूचना न दें।
[13] इसके बाद यीशु पहाड़ पर गए, जहाँ बुलाने पर वे सब आए जिन्हें वह चाहते थे।
[14] तब यीशु ने खुशी की खबर (सुसमाचार) सुनाने के लिए भेजे जाने वाले लोगों को चुना ताकि वे उनके साथ रहें।
[15] यह भी कि उन्हें भूतों को निकालने का अधिकार हो।
[16] बुलाए हुए इन लोगों के नाम हैं; शमोन, जिसका नाम उन्हों ने पतरस रखा,
[17] ज़बदी का बेटा याकूब, और याकूब का भाई यूहन्ना जिसका नाम यीशु ने बूअनर्गिस रखा, जिसका अर्थ है “गर्जन का पुत्र” ।
[18] अन्द्रियास, फ़िलिप्पुस, बरतुल्मै, मत्ती, थोमा, हलफ़ई का बेटा याकूब, तद्दी, शमौन कनानी।
[19] और यहूदा इस्करियोती, जिस ने यीशु को पकड़वाया था।
[20] जब यीशु घर में आए तो इकट्ठी बड़ी भीड़ के कारण खाना न खा सके।
[21] जब यीशु के घर वालों ने यह सुना, तो वे उन्हें पकड़ने के लिये निकले, क्योंकि उनको लगा कि यीशु का दिमाग खराब हो गया है।
[22] यरूशलेम से आए हुए धार्मिक पण्डितों का यह कहना था कि यीशु में शैतान है और वह भूतों के स्वामी की मदद से उन्हें निकालता है।
[23] इसलिए यीशु ने उन्हें पास बुलाकर, उदाहरण देकर बताया कि शैतान भूतों को नहीं निकाल सकता है।
[24] उदाहरण ये थेः अगर किसी देश में एकता खत्म हो जाए तो वह कैसे स्थिर रह सकेगा?
[25] अगर किसी घर में फूट पड़ जाए तो वह घर कैसे बना रह सकेगा?
[26] इसलिए शैतान अपना ही विरोधी होकर अपने में फूट डाले, तो बना ही नहीं रह सकेगा, लेकिन उसका अन्त आ पहुँचा है।
[27] कोई इन्सान किसी के घर में घुसकर उसका सामान नहीं लूट सकता, जब तक कि वह पहले उस ताकतवार को बाँध न ले, तभी वह उसके घर को लूट सकेगा।
[28] मैं तुम से सच-सच कहता हूँ कि लोगों के सभी अपराध और निन्दा के शब्दों को माफ़ किया जाएगा।
[29] लेकिन जो कोई पवित्र आत्मा के खिलाफ़ कुछ कहे, वह कभी भी माफ़ नहीं किया जाएगा, लेकिन वह हमेशा के गुनाह (पाप) का मुजरिम ठहरेगा।
[30] यीशु ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वे कहा करते थे कि यीशु में गंदी आत्मा है।
[31] तब यीशु की माँ और भाईयों ने आकर बाहर ही से बुलाया।
[32] आस-पास में बैठे लोगों ने यीशु से कहा, "देखिए आपकी माँ जी और भाई ढूँढते-ढूँढते बाहर आ पहुँचे हैं।"
[33] यीशु ने पूछा, "मेरी माँ और मेरे भाई कौन हैं?"
[34] यीशु ने अपनी दृष्टि अपने आस-पास बैठे लोगों पर दौड़ाते हुए कहा, "देखो, मेरी माँ और भाई यही हैं।"
[35] इसलिए कि जो व्यक्ति परमेश्वर की बातों के अनुसार करता है, वही मेरा भाई, बहन और माँ है।