[1] परमेश्वर के बेटे यीशु मसीह के सुसमाचार की शुरुआत।
[2] यशायाह नबी की किताब में लिखा है कि देखो, मैं अपने दूत को तुम से पहले भेजूँगा, जो तुम्हारे लिये रास्ता तैयार करेगा। सुनो,
[3] एक पुकारने वाले की आवाज़ जंगल में सुनाई दे रही है कि प्रभु का रास्ता तैयार करो, और उसकी सड़कें सीधी। यह पुकारने वाला
[4] यूहन्ना आया, और वह पापों (गुनाहों) की माफ़ी के मनबदलाव के लिए बपतिस्में का ऐलान करने के साथ लोगों को यरदन नदी में बपतिस्मा दिया करता था।
[5] यहूदिया प्रान्त और यरूशलेम में रहने वाले निकलकर उसके पास आए, जब उन्हों ने अपने गुनाहों को माना तब यरदन नदी में यूहन्ना ने उन्हें बपतिस्मा दिया।
[6] यूहन्ना ऊँट के बालों का वस्त्र पहनता और कमर में खाल का पटुका बान्धे रहता था। उसका भोजन टिड्डियाँ और जंगल का शहद था।
[7] वह कहता था, मेरे बाद में आने वाले मुझ से ज़्यादा ताकतवार हैं। मैं तो इस लायक भी नहीं कि, झुककर उनके जूतों का फ़ीता खोलूँ।
[8] मैंने तो तुम्हें जल में डुबोया (बपतिस्मा दिया) है लेकिन यीशु तुम्हें पवित्र आत्मा में बपतिस्मा देंगे।
[9] उन दिनों में यीशु गलील के नासरत से आए और यरदन नदी में यूहन्ना से बपतिस्मा लिया।
[10] पानी के बाहर आते ही यीशु ने आसमान को खुलते और पवित्र आत्मा को फ़ाख्ते की तरह अपने ऊपर उतरते देखा।
[11] तभी आसमान से यह आवाज़ गूँज उठी, "तुम मेरे प्यारे बेटे हो, मैं तुम से खुश हूँ।"
[12] तब परमेश्वर का आत्मा यीशु को जंगल में ले गया।
[13] जहाँ चालीस दिन (एक बड़े अर्से) तक शैतान उनके सामने तमाम प्रलोभन लाता रहा। यीशु जंगली जानवरों के साथ रहे तथा स्वर्गदूत उन की सेवा करते रहे।
[14] यूहन्ना के हिरासत में ले लिए जाने के बाद यीशु ने गलील में आकर परमेश्वर के शासन (राज्य) का संदेश सुनाया।
[15] और कहा, "समय पूरा हुआ है और परमेश्वर का शासन नज़दीक आ चुका है। मन बदल डालो और खुशी की खबर पर विश्वास लाओ।
[16] गलील की झील के किनारे जाते समय यीशु ने शमौन और अन्द्रियास नामक मछुवों को झील में जाल डालते देखा।
[17] यीशु ने उन से कहा, "तुम मेरे शिष्य बन जाओ, तब मैं तुम्हें मनुष्यों के मछुवे बनाऊँगा।
[18] तुरन्त जाल को छोड़कर वे यीशु के साथ हो लिए।
[19] थोड़ा आगे बढ़ते ही यीशु ने ज़बदी के बेटे याकूब और उसके भाई यहून्ना को, नाव पर जाल को सुधारते देखा।
[20] बुलाने पर वे अपने पिता ज़बदी को मजदूरों के साथ नाव पर छोड़कर, यीशु के साथ हो लिए।
[21] कफ़रनहूम में सब्त के दिन आराधनालय में जाकर यीशु सिखाने लगे।
[22] क्योंकि यीशु धार्मिक शिक्षकों की तरह नहीं लेकिन बड़े अधिकार के साथ सिखाते थे, इसलिए लोगों को अचम्भा हुआ।
[23] तभी एक भूत (दुष्टात्मा) पीड़ित इन्सान ने आराधनालय में चिल्लाकर कहा, "हे नासरी यीशु, हमें ऐसे ही रहने दें, हमारा आप से कोई सम्बध नहीं।
[24] क्या आप हमें बर्बाद करने आए हैं? मुझे मालूम है आप हैं कौन। आप तो परमेश्वर के पवित्र जन हैं।"
[25] यीशु ने डाँटकर उससे कहा, खामोश रह और उस में से बाहर निकल।
[26] तब वह भूत उसकी देह को मरोड़ते हुए उस में से बाहर निकल गया।
[27] यह देख आश्चर्य से भरे लोग आपस में चर्चा करने लगे, "यह क्या? यह तो कोई नयी शिक्षा है। यीशु अधिकार के साथ भूतों को हुक्म देते हैं और भूत उनका हुक्म मानते हैं।"
[28] और यीशु का नाम तुरन्त गलील के आस-पास के सारे प्रदेश में फैल गया।
[29] यीशु एक दम आराधनालय में से निकलकर, याकूब और यूहन्ना के साथ शमौन और अन्द्रियास के घर आए।
[30] यीशु को बताया गया कि पतरस की सास को बुखार चढ़ा हुआ है।
[31] जैसे ही पास जाकर यीशु ने पतरस की सास का हाथ पकड़कर उसे उठाया, उसका बुखार उतर गया और वह यीशु की आवभगत में लग गयी।
[32] शाम के समय सूरज ढलते ही लोग यीशु के पास सब तरह के बीमारों को और जिन्हें भूत लगा था, लाए।
[33] दरवाज़े पर ही सारा नगर आ गया।
[34] यीशु ने तरह-तरह की बीमारियों से दुखी बहुत से लोगों को ठीक कर दिया और बहुत से भूतों को निकाला। इसलिए कि भूत यीशु मसीह को पहचानते थे, यीशु ने उन्हें खामोश कर दिया।
[35] दिन निकलने से बहुत पहले यीशु उठे और जंगली जगह में जाकर प्रार्थना करने लगे।
[36] तब शमौन और उसके साथी यीशु को ढूँढने निकल पड़े।
[37] यीशु को पा लेने पर वे बोले, "सब लोग आपको ढूँढ रहे हैं।"
[38] यीशु ने कहा, आओ हम सब आस पास की दूसरी बस्तियों में जाकर लोगों को सुसमाचार सुनाएँ, क्योंकि यही मेरा काम है।
[39] इसलिए यीशु ने सारे गलील और उनके आराधनालयों में जाकर सुसमाचार देना और भूतों को निकालना जारी रखा।
[40] वहीं पर घुटने टेकते हुए एक कुष्ट रोगी ने बिनती की, "अगर आप चाहें तो मुझे शुद्ध कर सकते हैं।"
[41] यीशु ने तरस से भरकर छूते हुए कहा, "मेरी इच्छा है कि तुम शुद्ध हो जाओ।"
[42] तुरन्त उसका कोढ़ खत्म हो गया और वह शुद्ध हो गया।
[43] सावधानी बरतने की सलाह के साथ यीशु ने उसे विदा किया।
[44] और यह भी कि बिना किसी को कुछ बताए वह खुद को पुरोहित के सामने पेश करे। साथ ही यह कि सबूत के तौर पर मूसा द्वारा निर्धारित भेंट को चढ़ाए।
[45] वहाँ से जाते ही वह सब जगह अपने ठीक हो जाने का ढिंढोरा पीटने लगा। इस वजह से यीशु का खुल्लम-खुल्ला घूमना कम हो गया। लेकिन बाहर की वीरान जगहों में यीशु रहे और आस-पास के लोग उनके पास आते गए।