[1] अब मैं यह कह रहा हूँ कि एक वारिसदार नाबालिग, जिसका सब कुछ पर अधिकार है, गुलाम से फ़र्क नहीं है।
[2] पिता द्वारा नियुक्त समय तक वह निगरानी रखने वाले और प्रबन्धक के आधीन है।
[3] यहाँ तक कि हम, अपने बचपन के समय से इस संसार की नींव की वस्तुओं की गुलामी में थे।
[4] किन्तु जब समय पूरा हुआ, परमेश्वर ने स्त्री के द्वारा अपने पुत्र को भेजा, जो नियम की आधीनता में उत्पन्न हुआ था।
[5] ताकि जो लोग उस नियम की पाबन्दी में थे, उन्हें अधिकार प्राप्त सन्तान की तरह गोद लिया जा सके।
[6] इसलिए कि तुम पिता की सन्तान ठहरे, उन्हों ने हमारे भीतर अपने बेटे की आत्मा को भेज दिया, जो "पिता" कहकर पुकारता है।
[7] इसलिए अब तुम गुलाम नहीं, किन्तु बेटे-बेटी हो और यदि बेटे-बेटी हो, तो मसीह के द्वारा वारिसदार भी।
[8] परन्तु एक समय जब परमेश्वर को नहीं जानते थे, तो स्वभाव से उनके गुलाम थे जो परमेश्वर नहीं था।
[9] अब जब कि तुम ने परमेश्वर को जान लिया है या उन्हों ने तुम्हें जान लिया है, यह क्या कि तुम उन कमज़ोर और शुरूआत की बातों की चाह करके फिर से उनकी गुलामी में जा रहे हो।
[10] तुम दिनों, महीनों और अलग-अलग समयों को मानने वाले बन गए हो।
[11] मुझे यह डर है, कि जो मेहनत मैंने तुम्हारे लिए की है वह बेकार न जाए।
[12] भाइयो-बहनो, मैं तुम से बिनती करता हूँ कि जैसा मैं तुम्हारे समान बना, तुम भी मेरे समान बन जाओ तुम ने किसी भी तरह से मेरा कुछ नुकसान नहीं किया है।
[13] तुम यह जानते हो, कि शारीरिक कमज़ोरी की वजह से मैंने पहले तुम्हें सु-संदेश दिया था।
[14] मेरी देह में मुझे जिस कमज़ोरी को सहना पड़ा उसे न ही तुम ने तुच्छ जाना न खिल्ली उड़ाई, परन्तु मुझे परमेश्वर के स्वर्गदूत के रूप में स्वीकार किया, यहाँ तक कि मुझे मसीह यीशु के समान समझा।
[15] जिस आशीष के विषय तुम ने कहा, वह सब कहाँ है? इसलिए कि मैंने तुम्हारे बारे में गवाही दी थी, कि यदि सम्भव होता, तो तुम ने अपनी आँखों को निकालकर दे दिया होता।
[16] क्या अब मैं तुम्हारा दुश्मन हो गया हूँ, क्योंकि मैं तुम्हें सत्य बताता हूँ।
[17] वे तुम्हें फुसला करके तुम्हें अपना दोस्त बनाना चाहते हैं, लेकिन किसी अच्छे उद्देश्य से नहीं, हाँ वे तुम्हें हम से अलग करना माँगते हैं, ताकि तुम बड़ी उमंग से उनकी मानने लगो।
[18] यह भला है कि किसी अच्छी बात में जोश सदा बना रहे, न केवल तब, जब मैं तुम्हारे साथ हूँ?
[19] मेरे छोटे बच्चो, जब तक कि मसीह तुम में न बन जाएँ, तब तक मैं जच्चा की सी पीड़ा सहता हूँ,
[20] मेरी इच्छा है कि तुम्हारे साथ रहूँ और अपने बोलने के तरीके को बदलूँ क्योंकि मैं तुम्हारे विषय उलझन में हूँ।
[21] मुझे बताओ, तुम जो नियमशास्त्र का पालन करना चाहते हो क्या नियम शास्त्र की नहीं सुनते?
[22] क्योंकि यह लिखा है कि अब्राहम के दो बेटे थे, एक उसकी दासी से और दूसरा उसकी पत्नी से,
[23] शरीर की इच्छा से जो बेटा दासी से उत्पन्न हुआ, वह अब्राहम का स्वयं का फ़ैसला था, लेकिन जो उसकी पत्नी से उत्पन्न हुआ, वह परमेश्वर से मिले हुए वायदे के कारण था।
[24] ये बातें एक प्रतीक हैं, इसलिए कि ये दो वाचाएँ हैं। एक सीनै पर्वत से है जो गुलामी उत्पन्न करती है, यह हाज़िरा है।
[25] इसलिए कि यह हाज़िरा अरब में सीनै पहाड़ है और वर्तमान के यरूशलेम को दिखाती है, जो अपने बच्चों के साथ गुलामी में है।
[26] किन्तु यरूशलेम जो ऊपर है, आज़ाद है और हम सब की माँ है।
[27] क्योंकि लिखा है, "हे बाँझ, तुम जो बच्चे नहीं पैदा करती हो, तुम जिसे प्रसव की पीड़ा नहीं है चिल्लाओ, क्योंकि छोड़ी हुयी की सन्तान सुहागिन की सन्तान से अधिक है।"
[28] अब भाइयो-बहनो, हम प्रतिज्ञा की सन्तान हैं।
[29] जिस तरह से जो देह की इच्छा से उत्पन्न हुआ था, आत्मा से जन्मे हुए को सताता था, वैसा आज भी है।
[30] बाइबल क्या कहती है? वह यह कि गुलाम औरत और उसके बेटे को निकाल दो, क्योंकि गुलाम औरत का बेटा आज़ाद औरत के बेटे के साथ मीरास का हकदार नहीं होगा।
[31] इसलिए भाइयो-बहनो, हम गुलाम स्त्री के बच्चे नहीं हैं, लेकिन आज़ाद स्त्री के हैं।