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[1] देखो, पिता ने कैसा प्रेम हम पर उण्डेला है, कि हम परमेश्‍वर के बेटे बेटियाँ कहलाएँ, इसलिये दुनिया हमें नहीं पहचानती है क्योंकि उसने परमेश्‍वर को नहीं पहचाना है।

[2] प्रियो, अभी हम परमेश्‍वर के बेटे-बेटियाँ हैं, अभी यह नहीं पता है कि हम भविष्य में क्या होंगे, लेकिन हमें इतना मालूम है कि जब यीशु आएँगे, हम उनकी तरह होंगे, क्योंकि हम यीशु को वैसा ही देखेंगे जैसे वह हैं।

[3] हर एक जिसके पास यह आशा है, वह अपने आपको वैसा ही पवित्र करता है, जैसा यीशु पवित्र हैं।

[4] जो कोई उचित करने से चूक जाता है, वह व्यवस्था (परमेश्‍वर के मापदण्ड) को तोड़ता है, क्योंकि चूक जाना (बलवा करना) व्यवस्था के खिलाफ़ जाना है।

[5] तुम्हें मालूम है कि यीशु इसलिए आए ताकि गुनाहों (पापों) को उठा ले जाएँ और उन में कोई पाप नहीं है।

[6] जो कोई उन में बना रहता है, वह गुनाह करना ज़ारी नहीं रखता है। जो गुनाह करना ज़ारी रखता है उसने न तो यीशु को देखा है और न जाना है।

[7] छोटे बच्चो, तुम्हें कोई धोखे में न रखे। मुक्ति पाया हुआ इन्सान ही ऐसा सही जीवन जीता है, जिस तरह का जीवन यीशु का है।

[8] जो गुनाह करता रहता है, वह शैतान से है। क्योंकि शैतान शुरू से गुनाह करता आया है। परमेश्‍वर के बेटे (यीशु) इसलिए आए, ताकि वह शैतान के कामों को बर्बाद कर डालें।

[9] जो कोई परमेश्‍वर से पैदा हुआ है, वह गुनाह करना ज़ारी नहीं रखता, क्योंकि उनका बीज उसमें बना रहता है और वह गुनाह में बना नहीं रह सकता, क्योंकि वह परमेश्‍वर से पैदा हुआ है।

[10] इसी बात से परमेश्‍वर की संतान और शैतान की संतान के बीच अन्तर देखा जा सकता है। जो सही चाल चलन को बनाकर नहीं रखता है, वह परमेश्‍वर से नहीं है, न ही वह जो अपने भाई-बहन से प्रेम नहीं करता है।

[11] जो संदेश तुम ने शुरूआत से सुना है, वह यही है, कि हम एक दूसरे से स्नेह रखें।

[12] हम कैन की तरह न बनें, जो उस दुष्ट से था जिसने अपने भाई का खून कर डाला। उसने अपने भाई का खून क्यों किया? क्योंकि उसके काम बुरे थे और उसके भाई के काम अच्छे।

[13] मेरे भाइयो-बहनो, यदि दुनिया तुम से नफ़रत करती है, तो अचम्भा न करना।

[14] हम जानते हैं कि हम मौत से गुज़र कर ज़िन्दगी में दाखिल हो चुके हैं, क्योंकि हम भाइयों से प्रेम करते हैं जो अपने भाई से प्रेम नहीं करता वह मौत की दशा में रहता है।

[15] जो अपने भाई से नफ़रत करता है, वह हत्यारा है और तुम्हें मालूम है कि किसी भी हत्यारे में सदा का जीवन (परमेश्‍वरीय जीवन) नहीं रह सकता।

[16] इसी से हम परमेश्‍वर के प्रेम को जानते हैं, क्योंकि उन्हों ने अपने जीवन को हमारे लिए कुर्बान कर दिया। हमें भी अपना जीवन अपने भाइयो-बहनों के लिए देना चाहिए।

[17] लेकिन जिस किसी के पास इस दुनिया की चीज़ें हैं, और वह अपने भाई को ज़रूरत में देखने के बावजूद अपने मन को, सख्त कर लेता है, तो परमेश्‍वर का प्रेम (या अगापे) उसके अंदर कैसे रह सकता है?

[18] मेरे छोटे बच्चो, हमारा प्रेम शब्द का नहीं, लेकिन काम में और सच्चाई में दिखे।

[19] उसी से हम जान जाते हैं, कि हम सत्य के हैं और यीशु के सामने अपने मनों को आश्‍वासन दे सकते हैं।

[20] इसलिए कि यदि हमारा मन (विवेक) हमें दोषी ठहराए, तो परमेश्‍वर हमारे मन से बढ़कर हैं और सब कुछ जानते हैं।

[21] प्रियो, यदि हमारा मन हमें दोषी न ठहराए, तो हमें परमेश्‍वर पर भरोसा होता है।

[22] और हम जो कुछ माँगते हैं, हमें उन से मिलता है, क्योंकि हम उनकी आज्ञाएँ मानते हैं और वही करते हैं, जो उन्हें पसंद है।

[23] यह उनकी आज्ञा है, कि हमें परमेश्‍वर के बेटे यीशु मसीह के नाम पर विश्‍वास करना चाहिए और जैसी उनकी आज्ञा है, एक दूसरे से प्रेम करना चाहिए।

[24] जो उनकी आज्ञाओं को मानता है उन में बना रहता है और वह उस में। इसी से (पवित्र आत्मा से) हम जानते हैं, कि वह अपनी आत्मा के द्वारा जो उन्हों ने हमें दिया है हम में रहते हैं।

1 यूहन्ना — Chapters