[1] मेरे बच्चो, मैं ये बातें तुम्हें इसलिए लिख रहा हूँ, ताकि तुम किसी बात में बलवा न करे। लेकिन यदि कोई इसका शिकार हो जाता है, तो हमारे पास सच्चे यीशु मसीह पिता के साथ एक निष्कलंक वकील हैं।
[2] यीशु स्वयं ही हमारे अपराधों के लिए प्रायश्चित हैं, सिर्फ़ हमारे ही नहीं लेकिन सारी दुनिया के लोगों के लिए।
[3] इसी से हमें मालूम है कि हम यीशु को जानते हैं, यदि हम उनकी आज्ञाओं को मानते हैं।
[4] जो कहता है, "मैं यीशु को जान गया हूँ और उनकी आज्ञाओं का पालन नहीं करता, वह झूठा है और उसमें सच्चाई नहीं है।
[5] लेकिन जो उनकी बात मानता है, उसी में परमेश्वर के प्रेम का सबूत दिखता है, इसी से हम जान पाते हैं कि हम यीशु में हैं।
[6] जो कहता है कि मैं यीशु में हूँ, उसका जीवन वैसा ही होना चाहिए, जैसा यीशु का था।
[7] भाइयो बहनो, मैं तुम्हें कोई नयी आज्ञा नहीं दे रहा हूँ, लेकिन वही पुरानी आज्ञा जो तुम्हें शुरू में दी गयी थी। पुरानी आज्ञा वही परमेश्वर का वचन है जो तुम ने शुरू से सुना था।
[8] मैं फिर से तुम्हें एक नयी आज्ञा दे रहा हूँ, यह यीशु और तुम में सच है क्योंकि अँधेरा खत्म हो रहा है और सच्ची रोशनी पहले ही से चमक रही है।
[9] जो कहता है कि वह रोशनी में है और अपने भाई से घृणा करता है, वह अभी तक अँधेरे में है।
[10] जो अपने भाई से प्रेम रखता है, उसका जीवन रोशनी में है, इसलिए उसमें ठोकर का कोई कारण नहीं है।
[11] लेकिन जो अपने भाई से घृणा करता है वह अँधेरे में है और अंधकारमय जीवन जी रहा है, उसे मालूम ही नहीं कि वह किस दिशा में जा रहा है, क्योंकि उस अँधेरे ने उसकी आँखों को अँधा बना दिया है।
[12] छोटे बच्चो, मैं तुम्हें इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि यीशु मसीह की वजह से हमारे अपराध माफ़ हो चुके हैं।
[13] हे पिताओ, मैं तुम्हें इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि जो शुरुआत से हैं, उन्हें तुम ने जान लिया है। जवानो, मैं तुम्हें इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि तुम ने दुष्ट (शैतान) पर जीत हासिल कर ली है। छोटे बच्चो, मैं तुम्हें इसलिए लिख रहा हूँ, क्योंकि तुम ने पिता को जान लिया है।
[14] पिता लोगो, मैं तुम्हें इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि जो शुरू से हैं, उन्हें तुम ने जान लिया है। नौजवानो, मैं तुम्हें इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि तुम लोग मज़बूत हो, और परमेश्वर की बातें, तुम में बनी रहती हैं और तुम ने दुष्ट (शैतान) को जीत लिया है।
[15] इस दुनिया से लगाव मत रखो न ही इस की चीज़ों से। अगर कोई दुनिया से लगाव रखता है, तो उसमें पिता का प्रेम नहीं है।
[16] जो कुछ भी इस दुनिया में है - पुराने स्वभाव की चाहत, आँखों की अभिलाषा और ज़िन्दगी (जीविका) का घमण्ड, पिता की ओर से नहीं है, लेकिन इस संसार की ओर से है।
[17] यह दुनिया भी खत्म हो रही है और उसकी अभिलाषाएँ भी, लेकिन जो कोई परमेश्वर की इच्छा को पूरी करता है, वह बना रहेगा।
[18] छोटे बच्चो, आखिरी समय आ चुका है और जैसा तुम ने सुना था कि मसीह विरोधी आएगा, वह सच था, क्योंकि मसीही विरोधी अभी भी बहुत से हैं। इसी से हम जान पाते हैं, कि ये आखिरी समय है।
[19] वे हम में से निकल गए, लेकिन उन में से कोई भी हम में का नहीं था। क्योंकि यदि वे हम में के होते, बेशक वे हमारे साथ ही रहे होते। लेकिन वे हम में से निकल गए, ताकि यह मालूम हो जाए कि वे सभी हम में के नहीं थे।
[20] तुम्हारे पास उस पवित्र की तरफ़ से अभिषेक है और तुम सब कुछ जानते हो
[21] मैंने तुम्हें इसलिए नहीं लिखा, क्योंकि तुम सच्चाई जानते नहीं हो, लेकिन इसलिए कि जानते हो, और कोई भी झूठ, सच में से नहीं निकलता है।
[22] झूठा है कौन? वही जो इस बात का इन्कार करता है कि यीशु छुड़ाने वाले हैं। जो पिता और बेटे को नहीं मानता, वही मसीह विरोधी है।
[23] जो बेटे को नहीं मानता उसके पास पिता नहीं, लेकिन जो बेटे को मान लेता है, उसके पास पिता भी है।
[24] इसलिए, जो तुम ने आरम्भ से सुना है, उसे अपने भीतर बना कर रखो। जो तुम ने शुरूआत से सुना है, यदि तुम में बना रहे, तब तुम भी पुत्र और पिता में बने रहोगे।
[25] और जो वायदा उन्हों ने किया है, वह सदा काल का जीवन है।
[26] मैंने तुम्हें ये बातें उन लोगों के बारे में लिखी हैं, जो तुम्हें गुमराह करते हैं
[27] लेकिन तुम ने जो अभिषेक उन से पाया है तुम में बना है। इस बात की ज़रूरत नहीं कि कोई इन्सान तुम्हें सिखाए। जिस तरह से तुम्हारे भीतर का अभिषेक सभी विषयों पर तुम्हें सिखाता है, यह सच्चाई है और झूठ नहीं है। जो कुछ इस अभिषेक से तुम ने सीखा है, वैसा ही करते रहो।
[28] अब छोटे बच्चो, यीशु में बने रहो, ताकि जब वह प्रगट हों, हमें भरोसा हो और उन के आने पर उनके सामने शर्मिन्दा न होना पड़े।
[29] यदि तुम्हें मालूम है कि वह निर्दोष और सच्चे हैं तो यह भी सच है कि हर एक जो सही जीवन जीता है उन से पैदा हुआ है।