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[1] जो सदा से थे, जिन्हें हम ने सुना, अपनी आँखों से देखा, ध्यान से देखा और अपने हाथों से छुआ। वही जीवन के वचन थे।

[2] इसलिए कि जीवन प्रगट हुआ और हम ने देखा भी और साक्षी देने के साथ तुम्हारे सामने ऐलान भी करते हैं, वही अनन्त जीवन, जो पिता के साथ था और हम पर प्रगट हुआ।

[3] उन्हें हम ने देखा-सुना और उसका बयान करते हैं, ताकि तुम भी हमारे साथ संगति कर सको। सच में हमारी सहभागिता पिता और बेटे यीशु मसीह के साथ है।

[4] ये बातें हम तुम्हें इसलिए लिखते हैं ताकि तुम खुशी से भर जाओ।

[5] जो सु-संदेश हमें यीशु से मिला और तुम्हें बताते हैं वह यह है कि परमेश्‍वर रोशनी हैं और उन में किसी तरह का अँधेरा नहीं है।

[6] यदि हम कहें कि हमारी उन के साथ सहभागिता है और अँधेरेपन का जीवन जियें, तो हम झूठे हैं और सच्चाई की ज़िन्दगी नहीं जी रहे हैं।

[7] लेकिन यदि हम रोशनी की ज़िन्दगी जियें, जैसे वह खुद रोशनी में हैं, तो एक दूसरे के साथ हमारी सहभागिता है और परमेश्‍वर के बेटे यीशु मसीह का खून हमें हमारे सभी गुनाहों से साफ़ करता है।

[8] अगर हम कहें कि हम में गुनाह नहीं है, तो हम अपने आपको धोखा देते हैं, और हमारे जीवन में सच्चाई नहीं है।

[9] यदि हम अपने पापों (गुनाहों) को मान लें, यीशु हमें माफ़ करने में विश्‍वासयोग्य और ईमानदार हैं और मलिनता को पूरी तरफ़ साफ़ कर डालते हैं।

[10] यदि हम कहें कि हम में कोई गुनाह नहीं है, तो हम यीशु को झूठा ठहरा रहे हैं और उनका वचन हमारे पास नहीं है।

1 यूहन्ना — Chapters