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[1] इस्राईल को शिफ़ा देना चाहता हूँ तो इस्राईल का क़ुसूर और सामरिया की बुराई साफ़ ज़ाहिर हो जाती है। क्यूँकि फ़रेब देना उन का पेशा ही बन गया है। चोर घरों में नक़ब लगाते जबकि बाहर गली में डाकूओं के जथ्थे लोगों को लूट लेते हैं।

[2] लेकिन वह ख़याल नहीं करते कि मुझे उन की तमाम बुरी हरकतों की याद रहती है। वह नहीं समझते कि अब वह अपने ग़लत कामों से घिरे रहते हैं, कि यह गुनाह हर वक़्त मुझे नज़र आते हैं।

[3] अपनी बुराई से वह बादशाह को ख़ुश रखते हैं, उन के झूट से बुज़ुर्ग लुत्फ़अन्दोज़ होते हैं।

[4] सब के सब ज़िनाकार हैं। वह उस तपते तनूर की मानिन्द हैं जो इतना गर्म है कि नानबाई को उसे मज़ीद छेड़ने की ज़रूरत नहीं। अगर वह आटा गूँध कर उस के ख़मीर होने तक इन्तिज़ार भी करे तो भी तनूर इतना गर्म रहता है कि रोटी पक जाएगी।

[5] हमारे बादशाह के जश्न पर राहनुमा मै पी पी कर मस्त हो जाते हैं, और वह कुफ़्र बकने वालों से हाथ मिलाता है।

[6] यह लोग क़रीब आ कर ताक में बैठ जाते हैं जबकि उन के दिल तनूर की तरह तपते हैं। पूरी रात को उन का ग़ुस्सा सोया रहता है, लेकिन सुब्ह के वक़्त वह बेदार हो कर शोलाज़न आग की तरह दहकने लगता है।

[7] सब तनूर की तरह तपते तपते अपने राहनुमाओं को हड़प कर लेते हैं। उन के तमाम बादशाह गिर जाते हैं, और एक भी मुझे नहीं पुकारता।

[8] इस्राईल दीगर अक़्वाम के साथ मिल कर एक हो गया है। अब वह उस रोटी की मानिन्द है जो तवे पर सिर्फ़ एक तरफ़ से पक गई है, दूसरी तरफ़ से कच्ची ही है।

[9] ग़ैरमुल्की उस की ताक़त खा खा कर उसे कमज़ोर कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उसे पता नहीं चला। उस के बाल सफ़ेद हो गए हैं, लेकिन अभी तक उसे मालूम नहीं हुआ।

[10] इस्राईल का तकब्बुर उस के ख़िलाफ़ गवाही देता है। तो भी न वह रब अपने ख़ुदा के पास वापस आ जाता, न उसे तलाश करता है।

[11] इस्राईल नासमझ कबूतर की मानिन्द है जिसे आसानी से वरग़लाया जा सकता है। पहले वह मिस्र को मदद के लिए बुलाता, फिर असूर के पास भाग जाता है।

[12] लेकिन जूँ ही वह कभी इधर कभी इधर दौड़ेंगे तो मैं उन पर अपना जाल डालूँगा, उन्हें उड़ते हुए परिन्दों की तरह नीचे उतारूँगा। मैं उन की यूँ तादीब करूँगा जिस तरह उन की जमाअत को आगाह किया गया है।

[13] उन पर अफ़्सोस, क्यूँकि वह मुझ से भाग गए हैं। उन पर तबाही आए, क्यूँकि वह मुझ से सरकश हो गए हैं। मैं फ़िद्या दे कर उन्हें छुड़ाना चाहता था, लेकिन जवाब में वह मेरे बारे में झूट बोलते हैं।

[14] वह ख़ुलूसदिली से मुझ से इल्तिजा नहीं करते। वह बिस्तर पर लेटे लेटे ‘हाय हाय’ करते और ग़ल्ला और अंगूर को हासिल करने के लिए अपने आप को ज़ख़्मी करते हैं। लेकिन मुझ से वह दूर रहते हैं।

[15] मैं ही ने उन्हें तर्बियत दी, मैं ही ने उन्हें तक़वियत दी, लेकिन वह मेरे ख़िलाफ़ बुरे मन्सूबे बांधते हैं।

[16] वह तौबा करके वापस आ जाते हैं, लेकिन मेरे पास नहीं, लिहाज़ा वह ढीली कमान जैसे बेकार हो गए हैं। चुनाँचे उन के राहनुमा कुफ़्र बकने के सबब से तलवार की ज़द में आ कर हलाक हो जाएंगे। इस बात के बाइस वह मिस्र में मज़ाक़ का निशाना बन जाएंगे।

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