Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 2:15

[1] ऐ इस्राईल, तौबा करके रब अपने ख़ुदा के पास वापस आ! क्यूँकि तेरा क़ुसूर तेरे ज़वाल का सबब बन गया है।

[2] अपने गुनाहों का इक़्रार करते हुए रब के पास वापस आओ। उस से कहो, “हमारे तमाम गुनाहों को मुआफ़ करके हमें मेहरबानी से क़बूल फ़रमा ताकि हम अपने होंटों से तेरी तारीफ़ करके तुझे मुनासिब क़ुर्बानी अदा कर सकें।

[3] असूर हमें न बचाए। आइन्दा न हम घोड़ों पर सवार हो जाएंगे, न कहेंगे कि हमारे हाथों की चीज़ें हमारा ख़ुदा हैं। क्यूँकि तू ही यतीम पर रहम करता है।”

[4] तब रब फ़रमाएगा, “मैं उन की बेवफ़ाई के असरात ख़त्म करके उन्हें शिफ़ा दूँगा, हाँ मैं उन्हें खुले दिल से प्यार करूँगा, क्यूँकि मेरा उन पर ग़ज़ब ठंडा हो गया है।

[5] इस्राईल के लिए मैं शबनम की मानिन्द हूँगा। तब वह सोसन की मानिन्द फूल निकालेगा, लुबनान के देवदार के दरख़्त की तरह जड़ पकड़ेगा,

[6] उस की कोंपलें फूट निकलेंगी, और शाख़ें बन कर फैलती जाएँगी। उस की शान ज़ैतून के दरख़्त की मानिन्द होगी, उस की ख़ुश्बू लुबनान के देवदार के दरख़्त की ख़ुश्बू की तरह फैल जाएगी।

[7] लोग दुबारा उस के साय में जा बसेंगे। वहाँ वह अनाज की तरह फलें फूलेंगे, अंगूर के से फूल निकालेंगे। दूसरे उन की यूँ तारीफ़ करेंगे जिस तरह लुबनान की उम्दा मै की।

[8] तब इस्राईल कहेगा, ‘मेरा बुतों से क्या वास्ता?’ मैं ही तेरी सुन कर तेरी देख-भाल करूँगा। मैं जूनीपर का सायादार दरख़्त हूँ, और तू मुझ से ही फल पाएगा।”

[9] कौन दानिशमन्द है? वह समझ ले। कौन साहिब-ए-फ़हम है? वह मतलब जान ले। क्यूँकि रब की राहें दुरुस्त हैं। रास्तबाज़ उन पर चलते रहेंगे, लेकिन सरकश उन पर चलते वक़्त ठोकर खा कर गिर जाएंगे।

होसेअ — Chapters