Skip to content
Opens in a new window
Listen to this chapter • 6:58

[1] रब के घर के सहन के दरवाज़ों पर पहरादारी करने के गुरोह भी मुक़र्रर किए गए। उन में ज़ैल के आदमी शामिल थे : क़ोरह के ख़ानदान का फ़र्द मसलमियाह बिन क़ोरे जो आसफ़ की औलाद में से था।

[2] मसलमियाह के सात बेटे बड़े से ले कर छोटे तक ज़करियाह, यदीअएल, ज़बदियाह, यत्नीएल,

[3] ऐलाम, यूहनान और इलीहूऐनी थे।

[4] ओबेद-अदोम भी दरबान था। अल्लाह ने उसे बरकत दे कर आठ बेटे दिए थे। बड़े से ले कर छोटे तक उन के नाम समायाह, यहूज़बद, यूआख़, सकार, नतनीएल, अम्मीएल, इश्कार और फ़ऊल्लती थे।

[6] समायाह बिन ओबेद-अदोम के बेटे ख़ानदानी सरबराह थे, क्यूँकि वह काफ़ी असर-ओ-रसूख़ रखते थे।

[7] उन के नाम उत्नी, रफ़ाएल, ओबेद और इल्ज़बद थे। समायाह के रिश्तेदार इलीहू और समकियाह भी गुरोह में शामिल थे, क्यूँकि वह भी ख़ास हैसियत रखते थे।

[8] ओबेद-अदोम से निकले यह तमाम आदमी लाइक़ थे। वह अपने बेटों और रिश्तेदारों समेत कुल 62 अफ़राद थे और सब महारत से अपनी ख़िदमत सरअन्जाम देते थे।

[9] मसलमियाह के बेटे और रिश्तेदार कुल 18 आदमी थे। सब लाइक़ थे।

[10] मिरारी के ख़ानदान का फ़र्द हूसा के चार बेटे सिम्री, ख़िलक़ियाह, तबलियाह और ज़करियाह थे। हूसा ने सिम्री को ख़िदमत के गुरोह का सरबराह बना दिया था अगरचे वह पहलौठा नहीं था।

[11] दूसरे बेटे बड़े से ले कर छोटे तक ख़िलक़ियाह, तबलियाह और ज़करियाह थे। हूसा के कुल 13 बेटे और रिश्तेदार थे।

[12] दरबानों के इन गुरोहों में ख़ानदानी सरपरस्त और तमाम आदमी शामिल थे। बाक़ी लावियों की तरह यह भी रब के घर में अपनी ख़िदमत सरअन्जाम देते थे।

[13] क़ुरआ-अन्दाज़ी से मुक़र्रर किया गया कि कौन सा गुरोह सहन के किस दरवाज़े की पहरादारी करे। इस सिलसिले में बड़े और छोटे ख़ानदानों में इम्तियाज़ न किया गया।

[14] यूँ जब क़ुरआ डाला गया तो मसलमियाह के ख़ानदान का नाम मशरिक़ी दरवाज़े की पहरादारी करने के लिए निकला। ज़करियाह बिन मसलमियाह के ख़ानदान का नाम शिमाली दरवाज़े की पहरादारी करने के लिए निकला। ज़करियाह अपने दाना मश्वरों के लिए मश्हूर था।

[15] जब क़ुरआ जुनूबी दरवाज़े की पहरादारी के लिए डाला गया तो ओबेद-अदोम का नाम निकला। उस के बेटों को गोदाम की पहरादारी करने की ज़िम्मादारी दी गई।

[16] जब मग़रिबी दरवाज़े और सल्कत दरवाज़े के लिए क़ुरआ डाला गया तो सुफ़्फ़ीम और हूसा के नाम निकले। सल्कत दरवाज़ा चढ़ने वाले रास्ते पर है। पहरादारी की ख़िदमत यूँ बाँटी गई :

[17] रोज़ाना मशरिक़ी दरवाज़े पर छः लावी पहरा देते थे, शिमाली और जुनूबी दरवाज़ों पर चार चार अफ़राद और गोदाम पर दो।

[18] रब के घर के सहन के मग़रिबी दरवाज़े पर छः लावी पहरा देते थे, चार रास्ते पर और दो सहन में।

[19] यह सब दरबानों के गुरोह थे। सब क़ोरह और मिरारी के ख़ानदानों की औलाद थे।

[20] दूसरे कुछ लावी अल्लाह के घर के ख़ज़ानों और रब के लिए मख़्सूस की गई चीज़ें सँभालते थे।

[21] दो भाई ज़ैताम और योएल रब के घर के ख़ज़ानों की पहरादारी करते थे। वह यहीएल के ख़ानदान के सरपरस्त थे और यूँ लादान जैर्सोनी की औलाद थे।

[23] अम्राम, इज़हार, हब्रून और उज़्ज़ीएल के ख़ानदानों की यह ज़िम्मादारियाँ थीं :

[24] सबूएल बिन जैर्सोम बिन मूसा ख़ज़ानों का निगरान था।

[25] जैर्सोम के भाई इलीअज़र का बेटा रहबियाह था। रहबियाह का बेटा यसायाह, यसायाह का बेटा यूराम, यूराम का बेटा ज़िक्री और ज़िक्री का बेटा सलूमीत था।

[26] सलूमीत अपने भाइयों के साथ उन मुक़द्दस चीज़ों को सँभालता था जो दाऊद बादशाह, ख़ानदानी सरपरस्तों, हज़ार हज़ार और सौ सौ फ़ौजियों पर मुक़र्रर अफ़्सरों और दूसरे आला अफ़्सरों ने रब के लिए मख़्सूस की थीं।

[27] यह चीज़ें जंगों में लूटे हुए माल में से ले कर रब के घर को मज़बूत करने के लिए मख़्सूस की गई थीं।

[28] इन में वह सामान भी शामिल था जो समूएल ग़ैबबीन, साऊल बिन क़ीस, अबिनैर बिन नैर और योआब बिन ज़रूयाह ने मक़्दिस के लिए मख़्सूस किया था। सलूमीत और उस के भाई इन तमाम चीज़ों को सँभालते थे।

[29] इज़हार के ख़ानदान के अफ़राद यानी कननियाह और उस के बेटों को रब के घर से बाहर की ज़िम्मादारियाँ दी गईं। उन्हें निगरानों और क़ाज़ियों की हैसियत से इस्राईल पर मुक़र्रर किया गया।

[30] हब्रून के ख़ानदान के अफ़राद यानी हसबियाह और उस के भाइयों को दरया-ए-यर्दन के मग़रिब के इलाक़े को सँभालने की ज़िम्मादारी दी गई। वहाँ वह रब के घर से मुताल्लिक़ कामों के इलावा बादशाह की ख़िदमत भी सरअन्जाम देते थे। इन लाइक़ आदमियों की कुल तादाद 1,700 थी।

[31] दाऊद बादशाह की हुकूमत के 40वें साल में नसबनामे की तहक़ीक़ की गई ताकि हब्रून के ख़ानदान के बारे में मालूमात हासिल हो जाएँ। पता चला कि उस के कई लाइक़ रुकन जिलिआद के इलाक़े के शहर याज़ेर में आबाद हैं। यरियाह उन का सरपरस्त था।

[32] दाऊद बादशाह ने उसे रूबिन, जद और मनस्सी के मशरिक़ी इलाक़े को सँभालने की ज़िम्मादारी दी। यरियाह की इस ख़िदमत में उस के ख़ानदान के मज़ीद 2,700 अफ़राद भी शामिल थे। सब लाइक़ और अपने अपने ख़ानदानों के सरपरस्त थे। उस इलाक़े में वह रब के घर से मुताल्लिक़ कामों के इलावा बादशाह की ख़िदमत भी सरअन्जाम देते थे।

१-तवारीख़ — Chapters