[1] हुआँ से निकस के ऊ अप्पन देस में अय लथी, आउर उनखर चेलमनो उनखा पीछू गेलन।
[2] सबत के दिन ऊ अराधनालय में उपदेस करे लगलथी, आउर ढे़रमनी लोग सुनके चकित होलन आउर कहे लगलन, “एकरा ई बात सब कहाँ से आ गेलइ? ई कयसन ग्यान हे जे ओकरा देल गेलइ हे? कइसे स मारथा के काम एकर हाँथा से प रगट होवऽ हइ?
[3] का ई उहे बढ़इ नञ, जे मरियम के बेटा, आउर याकूब, योसेस, यहूदा आउर स मौन के भाय हे? का ओकर बहिनियन हीयाँ हमनी के बीच नञ रहऽ हइ?” एहिसे ओखनी ओकरा बारे में ठेस खय लन।
[4] यीसु उनका से कहलथी, “भबिस वक्ता के अप्पन देस, आउर अप्पन स म्बन्धी, आउर अप्पन घर के छोड़ आउर किध् रो अप मान नञ होवऽहइ।”
[5] ऊ हुआँ कोइ स मारथा के काम नञ कर स कलथी, खाली थोरेस न बेमारिय वन पर हाँथा रखके ओखनी के चंगा कय लथी। ‘आउर उनखा ओखनी के अबिस वास पर अचरज होलइ, आउर ऊ चारो दन्ने के गाम में उपदेस करइत फिरलथी।
[7] ऊ बारहो के अपना भीरी बोलाय लथी आउर ओखनी के असुद्ध आतमवन पर अधिकार देइत। ओखनी के दू-दू गो करके भेजे लगलथी; आउर
[8] ऊ ओखनी के आग्यां देलथी, “राह लेल लाठी छोड़ आउर कुछ नञ लिहऽ; नञ त रोटी, नञ झोला, न बटुआ में पइसा,
[9] बाकि जूत्ता पहिरऽ आउर दू दू गो कुरतवो नञ पहिरऽ।”
[10] आउर ऊ ओखनी से कहलथी, “ज हँ कहीं तूँ कउनो घर में ज इबऽ, त जबले हुआँ से बिदा नञ होबऽ तबले उहे घर में ठहरल रहिय हू।
[11] जे ज गहिया के लोग तोरा नञ स कारो आउर तोहर नञ सुनो, हुआँ से चले बखत अप्पन तरवा के धूरी झाड़ लिहऽ कि उनका पर गवाही होय।”
[12] तब ओखनी जाके परचार कयलन कि मन फिरावहू,
[13] आउर ढे़रमनी दुष्टआतमवन के निकास लन, आउर ढेरमनी बेमरिया पर तेल मलके ओखनी के चंगा कयलन।
[14] हेरोदेस राजे उनखर चरचा सुनलन, काहेकि उनखर नाँव फइल गेलइ हल, आउर उ कहलन, “यूहन्ना बपतिसमा देवेवाला मरल में से जी उठलय हे, एहिसे ओकरा से ई स मारथा के काम परगट होवऽ हइ।”
[15] दोसर लोग कहलन, “ई एलिय्याह हइ।” बाकि कुछ दोसर कहलन, “भबिस वक्ता चाहे भबिस बक्तवन में से कउनो एगो नियन हइ।”
[16] हेरोदेस ई सुनके कहलन, “जे यूहन्ना के मुड़ी हम कटवाय ली हल, उहे जी उठल हे।”
[17] हेरोदेस अप्पन भाय फिलिप्पुस के मेहरारू हेरोदियास के ओझह, जेकरा से उ बियाह कर लेले हलन, लोग के भेज के यूहन्ना के पकड़वाके जेहल में डाल देलन हल;
[18] काहेकि यूहन्ना हेरोदेस से कहलथी हल, “अप्पन भाय के मेहरारू के रखनाय तोरा लेल सही नञ।”
[19] एहिसे हेरोदियास उनखा से दुस मनी रखऽ हलथिान आउर ई चाहऽ हलथिान कि उनखा मरवा देवे, बाकि अयसन नञ हो स कलइ,
[20] काहेकि हेरोदेस यूहन्ना के धरमी आउर पवित्तर आमदी जान के उनखा से डरऽ हलन, आउर उनखा बचउले रखऽ हलन, आउर उनखर बात सुनके ढ़ेर घबरावऽ हलन, बाकि आनन्द से सुनऽ हलन।
[21] सही बखत आयल जब हेरोदेस अप्पन जलम दिन में अप्पन परधानवन, आउर सेनाप तिय न आउर गलील के बड़हन लोग लागी भोज कयलन।
[22] त हेरोदियास के बेटी भीतर अ य ली, आउर नाचके हेरोदेस के आउर उनकरा जौरे बइठेवालन के खुस कय ली। तब राजा लइकी से कहलन, “तूँ जे चाहे हमरा से माँग हम तोरा देबो।”
[23] आउर ओकरा से स पत खाय लन, “हम अप्पन आध ा राज ले जे कुछ तूँ हमरा से माँगबहीं हम तोरा देबो।”
[24] उ बाहरे जाके अप्पन माय से पूछलकय, “हम का माँगिय इ?” उ बोलली, “यूहन्ना बपतिसमा देवेवाला के मुड़ी।”
[25] उ तुरत राजा भीरी भीतर अ य ली आउर उनकरा से बिनती कय ली, “हम चाहऽ ही कि तूँ अ खनी यूहन्ना बपतिसमा देवे वाला के मुड़ी एगो थारी में हमरा मँगवा देहू।”
[26] तब राजा ढ़ेर उदास होलन, बाकि अप्पन स पत लेल आउर जौरे बइठेवालन लेल ओकरा मटियावे नञ चाहलन।
[27] ई से राजा तुरत एगो सि पाही के आग्यां देके भेज लन कि उनकर मुड़ी काट लावे।
[28] उ जेहल में जाके उनकर मुड़ी काटलकय, आउर एगो थारी में रखके लय लकय आउर लइकी के देलकय, आउर लइकी अप्पन माय के देलकय।
[29] ई सुनके यूहन्ना के चेलमन आय लन, आउर उनकर लाहस के ले गेलन आउर कब्बर में रखलन।
[30] परेरितवन यीसु के नगीच जमा होके, जे कुछ उन्खनी कयले आउर सि खवले हलन, सब उनखा बतवलन।
[31] ऊ ओखनी से कहलथी, “तूँ अपने अलग कउनो एकानि्त अस थान में चलके तनि आराम करहू।” काहेकि ढ़ेर लोग आवऽ जा हलन, आउर उनखा खाय के मउको नञ मिलऽ हल।
[32] एहिसे ऊ नइया पर चढ़के, सुनसान ज गह में अलग चल गेलथी।
[33] ढे़रमनी लोग उनखा जाइत देखके चिन्ह लेलन, आउर सब स हरवन से ज मा होके हुआँ पैदले धउगल आउर उनखा से पहिले पहुँचलन।
[34] ऊ उतर के बड़का भीड़ देखलथी, आउर ओखनी पर तरस खय लथी, काहेकि ओ भेड़मन नीय न हलन, जेकरा कोई रखवारा नञ होय; आउर ऊ ओखनी के ढे़रे बात सिखावे लगलथी।
[35] जब बेरिया हो गेलइ, उनखर चेलमन उनखा भीरी आके कहे लगलन, “ई सुनसान जगह हे, आउर दिन ढे़र ढल गेलइ हे।
[36] ओहनी के बिदा करऽ कि चारो दन्ने के गाम आउर बस तिय न में जाके, अपना लेल कुछ खाय के किन लेथा।”
[37] ऊ ज बाब देलथी, “तूँही ओखनी के खाय ला देहूं।” ऊ ओखनी से कहलथी, “का हम सो मोहर के रोटी किन लिअइ, आउर ओखनी के खिलय अइ?”
[38] ऊ ओखनी से कहलथी, “जाके देखहू तोहनी पाले केत्ते रोटी हइ?” ओखनी पता करके कहलन, “पान ठो रोटी आउर दूगो मछरियो।”
[39] तब ऊ ओखनी के आग्यां देलथी कि सब के हरियर घास पर पँगत में बइठा देहू।
[40] ओ सो-सो आउर पचास-प चास करके पँगत में बइठ गेलन।
[41] ऊ ओ पान ठो रोटी के आउर दूगो मछरिय न के लेलथी, आउर सरग के दन्न देखके ध् नवाद कय लथी, आउर रोटियन तोड़-तोड़ के चेलमन के देले गेलथी कि ओ लोग के परस इ, आउर ओ दूगो मछरिय नो ओखनी में बाँट देलथी।
[42] सभ खाके तिरपित हो गेलन,
[43] आउर ओखनी टुकड़वन से बारहऽ टोकरिय न भरके उठाय लन, आउर कुछ मछरियो से।
[44] जे रोटी खय लन, ऊ पान हजार आमदी हलन।
[45] तब ऊ तुरत अप्पन चेलमन के नइया पर चढ़े लागी बिवस कय लथी कि ओ उनखा से पहिले ओ पार बैतसैदा चल जाय, जबले कि ऊ लोग के बिदा करथा।
[46] ओखनी के बिदा करके ऊ पहाड़ पर पराथाना करे गेलथी।
[47] जब सांझ होलइ, तो नइया तालाब के बीच में हल, आउर ऊ अकेले ज मीन पर हलथी।
[48] जब ऊ देखलथी कि ओ खेवइत-खेवइत घबरा गेलन हे, काहेकि बयार ओखनी के उलटा हल, त रात के चउथा पहर के नगीच भोरउवा ऊ तलाब पर चलइत ओखनी भीरी अय लथी, आउर ओखनी से आगे निकस जाय के चाहऽ हलथी।
[49] बाकि ओखनी उनखा नदी पर चलइत देखके बूझलन कि भूत हे, आउर चिचिया उठलन;
[50] काहेकि सब उनखा देखके घबरा गेलन हल। बाकि ऊ तुरत ओखनी से बात कय लथी आउर कहलथी, “हिम्मत बान्ध् हू: हम हीअइ; डरऽ नत।”
[51] तब ऊ ओखनी के भीरी नइया पर अय लथी, आउर बयार थिारा गेलइ: आउर ओखनी ढ़ेर अचरज करे लगलन।
[52] ओखनी ओ रोटियन के बारे में नञ बूझलन हल, काहेकि ओखनी के मन कड़ा हो गेलइ हल।
[53] ओखनी पार उतरके गन्नेस रत पहुँचलथी, आउर नइया के घाट पर लगय लथी।
[54] जब ओखनी नइया पर से उतरलथी, तो लोग तुरत उन्खनी के चिन्ह के
[55] अगल बगल के सँऊसे देस में ध् उगलन, आउर बेमरिया के खटिया पर लादके ज हिं-ज हिं स माचार पाय लन कि ऊ हथ हुआँ-हुआँ लेले फिरलन।
[56] आउर ज हँ कहीं ऊ गाम, सहर या बसि्तय न में जाइत हलथी, लोग बेमरिया के बजार में रखके उनखा से बिनती करइत हलन कि ऊ ओखनी के अप्पन बस तर के अँचरवो के छू लेवे देहू: आउर जेतना लोग उनखा छूअऽ हलन, सब चंगा हो जा हलन।