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[1] जब ऊ मनि्दल से निकस इत हल, त उनखर चेलमन में से एगो उनखा से कहलन, “हे गुरू, देखऽ, कइस न बड़का पत्थाल आउर कइस न बिसाल महल हइ!” यीसु उनका से कहलथी, “का तूँ ई बड़का-बड़का महल देखइत हऽ: हीयाँ प त्थाल पर पत्थालो बचल नञ रहतइ जे ढाहल नञ जयतइ।” जब ऊ जैतून के पहाड़ पर मनि्दल के सामने बइठल हलथी, तो पतरस आउर याकूब आउर यूहन्‍ना आउर अनि्द्रयास अलग जाके उनखा से पूछलन,

[4] “हमनी के बतावऽ कि ई बात कहिया होतइ? आउर जब ई सब बात पूरा होय पर होतइ तखनी के का चिन्हासी होतइ?”

[5] यीसु उनका से कहे लगलथी, “चउकस रहूकि कोइ तोरा नञ भरमावो।

[6] ढ़ेरेक हमर नाँव से आके कहतो, ‘हम उहे ही।’ आउर ढ़ेरमनी के भरमय तो।

[7] जब तूँ लड़ाइ, आउर लड़ाइय न के चरचा सुनीय हू, तो नञ घबरइहऽ, काहेकि एकर होनाय जरू री हे, बाकि तखनी अन्त नञ होतइ।

[8] काहेकि देस पर देस आउर राज पर राज चढ़ाइ करतइ। स भ जगह भूकम्प होतइ, आउर अकाल पड़तइ। ई तो दुख के सुरू आते होतइ।

[9] “बाकि तूँ अप्पन बारे में चउकस रहऽ, काहेकि लोग तोरा महास भा में सँउप तो आउर तूँ पंचाय तो में पीटय बहू, आउर हमरा ओझह से हकिम आउर मुखिया के आगे खड़ा कयल जयबहू, जे से उनका लागी गवाही होय।

[10] बाकि जरू री हे कि पहिले सुभसमाचार सब देस में परचार कयल जाय।

[11] जब ओ तोरा ले जाके सँउप तइ, त पहिले से चिन्ता नञ करिय हू कि हमनी का कहबइ, बाकि जे कुछ तोरा तखनी बतावल जाय ओही करिय हू काहेकि बोले वाला तूँ नञ हऽ, बाकि पवित्तर आतमा हे।

[12] भाइ के भाइ, बाप के बेटा घात लागी सँउंप तइ, आउर बचवन माय-बाप के खिलाप फ में उठके उनखा मरवा देतइ।

[13] आउर हमरा नाँव के ओझह से सभ लोग तोरा से दुस मनी करतो, बाकि जे आखिर ले धीरज ध् इले रहतइ, ओकरे उद्धार होतइ।

[14] “ई से जब तूँ उ उजाड़ेवाला घिनाय ल चीज के ज हू सही नञ हुआँ खड़ा देखहू, (प ढे़वाला बुझ ले) तब जे यहूदिया में होय, उ पहड़वन पर भाग जाय;

[15] जे छत पर होय, उ अप्पन घर से कुछ लेवे ला नीचू नञ उतरय आउर नञ भीतर जाय;

[16] आउर जे खेत में होय, उ अप्पन कपड़ा लेवे पीछू नञ लउटे।

[17] तखनी जे गरभवती आउर दूध् पि याते होतन, उनका ला हाय हाय!

[18] आउर पराथाना कय ल करहू कि ई जाड़ा में नञ होय।

[19] काहेकि ओ दिन अहूस न आफत के होतइ कि सि रीस टी के सुरू से, जे परमेसर सि रज न कयले हथ, अब ले नञ तो होलइ आउर नञ फिन कहियो होतइ।

[20] जे परभु ओ दिन के नञ घटइतल तो कोइ परानीयो नञ बचीत, बाकि ओ चुनल के चलते जेकरा ऊ चुनले हथ, ओ दिन के घटउलथी।

[21] तखनी जे कोइ तोरा से कहो, ‘देखहू, मसीह हीयाँ हे’ चाहे ‘देखहू, हुआँ हे,’ तो बिस वास नञ करिय हू

[22] काहेकि झूट्‌ठा मसीह आउर भूफट्‌ठा भबिस वक्ता खड़ा होतइ, आउर चिन्हासी आउर अचरज काम देखय तइ कि जे हो स के तो चुनलो के भरमा दे।

[23] बाकि तूँ चउकस रहिय हू देखहू, हम तोरा सभ बात पहिलेही बता देलियो हे।

[24] “तखनी, उ दुख के बाद सुरू ज अन्धार हो जएतइ, आउर चान्द अन्जोर नञ देतइ;

[25] आउर आकास से तारेगन गिरे लगतइ; आउर आकास के तागत हिलावल जएतइ।

[26] तब लोग मनुस के बेटा के बड़ स मारथा आउर महिमा के ज उरे बदरवन में आवइत देखतइ।

[27] तखनी ऊ अप्पन दूतवन के भेज के, धरती के ई छोर से आकास के ऊ छोर ले, चारो दिसा से अप्पन चुनल लोगवन के जमा करतथी।

[28] “अंजीर के पेफड़ से ई परझो सीखहू: जब ओकर डाँढ़ मोलाय म हो जाय, आउर पत्ता निकसे लगऽ हइ; तो तूँ जान ले हू कि गरमी के मोस म नगीच हे।

[29] ए हि तरे जब तूँ ई बतवन के होइत देखहू, तो जान लेहू कि ऊ नगीच हे बाकि दुआरे पर हे।

[30] हम तोरा से सच कहऽ हियो कि जबले ई बात नञ हो जएतइ, तबले ई लोग जाइत नञ रहतइ।

[31] आकास आउर धरती टर जएतइ, बाकि हमर बात कहियो नञ टरतई।

[32] “उ दिन चाहेउ बखत के बारे में कोइ नञ जानऽ हइ, नञ स रगदूत आउर नञ बेटा, बाकि खाली पिता जानऽ हथ।

[33] देखहू, जागइत आउर पराथाना करइत रहिय हु काहेकि तूँ नञ जानइत हऽ कि उ बखत कखनी अय तइ।

[34] ई उ आमदी ज य स न हालत हे, जे परदेस जाय बखत अप्पन घर छोड़ जाय, आउर अप्पन नउकरवन के अधिकार दे: आउर हरेक के ओकर काम बता दे, आउर दुआरपाल के जागइत रहे के आग्यां दे।

[35] एहिसे जागइत रहऽ, काहेकि तूँ नञ जानऽ हऽ कि घर के मालिक कब अय तन, सँझा के कि आधा रात के, कि मुर्गा के बाँग देवे के बखत कि भोरे।

[36] अयसन नञ होय कि ऊ अचक्‍के आके तोरा सुतल पावे।

[37] आउर जे हम तोरा से कहइत ही, ओही सब से कहऽ हिअइ: जागइत रहऽ।”

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