[1] फिन ऊ परझो में उनका से बात करे लगलथी; “कउनो आमदी अंगुर के बगइचा लगय लकय, आउर ओकर चारो दन्न घेरा लगवलकय, आउर रस के कुन्ड खोदलकय, आउर गुम्मट बनय लकय, आउर किसानमन के ओकर ठेका देके परदेस चल गेलइ।
[2] फिन फर के बखत उ किसानमन के भीरी एगो नउकर के भेज लकय कि किसानमन से अंगुर के बगइचा के फरवन के हिस्सा ले आवे।
[3] बाकि ओखनी ओकरा पकड़के पीटलकय आउर खाली हाँथा लउटा देलकय।
[4] फिन उ एगो आउर नउकर के ओकरा भीरी भेज लक; ओखनी ओकर माथा प फोड़ देलकय आउर ओकरा बेइज्ज त कय लकय।
[5] फिन उ एगो आउर के भेज लक, ओखनी ओकरा मार देलकय। तब उ आउर ढ़ेरमनी के भेज लक; ओकरा में से ओखनी कुछ के पि टलकय, आउर कुछ के मार देलकय।
[6] अब एक्केगो रह गेलइ हल, जे ओकर दुलरवा बेटा हल; आखिर में उ ओकरो उनका भीरी ई सोचके भेज लकय कि ओ हमर बेटा के आदर करतइ।
[7] बाकि ओ किसानमन आप स में कहलकय, ‘इहे तो बारिस हे, आवऽ हमनी एकरा मार दिअइ, तब स म्प ति हमनी के हो जयतइ।’
[8] आउर ओखनी ओकरा पकड़के मार देलकय, आउर अँगूर के बगइचा के बाहरे पेंफक देलकय।
[9] “एहिसे अंगूर के बगइचा के मालिक का करतइ? उ आके ओ किसानमन के मार देतइ, आउर अँगूर के बगइचा दोस रा के दे देतइ।
[10] का तूँ पवित्तर सास तर में ई बचन नञ पढ़लहीं; ‘जे पत्थाल के राजमिसतिरीयन बतउले हल, उहे कोना के सि रा हो गेलइ;
[11] ई परभु के दन्न से होलइ, आउर हमनी के नजर में अज गूत हे’।”
[12] तब ओखनी उनखा पकड़े चाहलन; काहेकि स मभ्फ गेलन हल कि ऊ हमनी के बिरोध् में ई परझो कहलथी हे। बाकि ओ लोग से डरलन, आउर उनखा छोड़के चल गेलन।
[13] तब ओखनी उनखा बात में पँफसावे लेल कुछ फरीसियन आउर हेरोदिय न के उनखा भीरी भेज लन।
[14] ओखनी आके उनखा से कहलन, “हे गुरू, हमनी जानइत हिअइ, कि तू स च्चा हे, आउर केकरो परवाह नञ करऽ, काहेकि तूँ आमदी के मुँह देखके बात नञ करऽ, बाकि परमेसर के राह स च्चाइ से बातवऽ हू। तो का कैसर के कर देना सही हे कि नञ?
[15] हमनी दिअइ, चाहे नञ दिअइ?” ऊ उनकर कप ट जानके उनका से कहलथी, “हमरा काहे परखइत हू? एगो सि क्का हमरा भीरी लाहू, कि हम ओकरा देखिअइ।”
[16] ओ ले अयलन, आउर ऊ उनका से कहलथी, “ई छाप आउर नाँव केकर हे?” ओखनी कहलन, “कैसर के।”
[17] यीसु उनका से कहलथी, “जे कैसर के हे उ कैसर के, आउर जे परमेसर के हे परमेसर के देहू।” तब ओखनी उनखा पर ढ़ेर अचम्भा करे लगलन।
[18] फिन स दूकिय नो, जे कहऽ हथ कि मरल के जी उठनाय हइये नञ हे, उनखा भीरी आके उनखा से पूछलन,
[19] ‘हे गुरू, मूसा हमनी लागी लिखले हथ कि जे केकरो भाइ बिन सनतान के मरजाय आउर ओकर मेहरारू रह जाय, तो ओकर भाइ ओकर मेहरारू से बिआह कर ले आउर अप्पन भाइ लागी बंस पइदा करे।
[20] सात भाइ हल। प हिला भाइ बिआह करके बेऔलाद मर गेलइ।
[21] तब दोसर भाइ उ मेहरारू से बिआह कर लेलक आउर बेऔलाद मर गेलइ; आउर ओइस ने तीस रको कय लकय।
[22] आउर सातो से औलाद नञ होलइ। सब कि पीछे उ मेहरारू ओ मर गेली।
[23] ई से जी उठे पर उ ओकरा में से केकर मेहारू होतइ? काहेकि उ सातो के मेहारू हो चुकल हली।”
[24] यीसु उनका से कहलथी, “का तूँ ई ओभ्फह से भूल में नञ पड़ल हू कि तूँ नञ त पवित्तर सास तर के जानइत हू, आउर नञ परमेसर के स मारथा के?
[25] काहेकि जब ओ मरल में से जीउ उठतइ, तो ओ नञ बिआह करतइ आउर न बिआह में देल जयतइ, बाकि सरग में दूतमन के जयस न होतइ।
[26] मरल के जीउ उठे के बारे में का तूँ मूसा के किताब में झाड़ी के खिस्सा में नञ पढ़लहू कि परमेसर ओकरा से कहलथी, “हम अबराहम के परमेस र, आउर इसहाक के परमेस र, आउर याकूब के परमेसर ही”?
[27] परमेसर मरल के नञ बाकि जि न्दा के परमेसर हे, ई से तूँ बड़का भूल में पड़ल हू।
[28] सास तिरिय न में से एगो आके ओखनी के बिबाद करइत सुनलन, आउर ई जानके कि ऊ उनका बेस तरे ज बाब देलथी, उनखा से पूछलन, “स बसे मुख आग्यां कउन है?”
[29] यीसु उनका ज बाब देलथी, “सब आग्यांवन में से ई मुख हे: ‘हे इसरायल सुनऽ! परभु हमनी के परमेसर एक्केगो परभु हथ,
[30] आउर तूँ परभु अप्पन परमेसर से अप्पन स उँफसे मन से, अप्पन स उँफसे परान से, अप्पन स उँफसे बुदि्ध से, अप्पन स उँफसे तागत से परेम रखिय हू।’
[31] आउर दोसर ई हे, ‘तूँ अप्पन पड़ोसी से अपने जयस न परेम रखिय हू।’ एकरा से बड़ आउर कोइ आग्यां नञ।”
[32] सास तिरी उनखा से कहलन, “हे गुरू, बहुत ठीक। तूँ सच कहलऽ कि ऊ एक्के गो हे, आउर ओकरा छोड़ आउर कोइ नञ।
[33] आउर ओकरा से स उँफसे मन, आउर स उँसे बुदि्ध, आउर स उँसे परान, आउर स उँफसे तागत के जौरे परेम रखिय हू आउर पड़ोसी से अपने ज य स न परेम रखिय हू, स उँफसे होमबलियो आउर बलिदानो से बढ़के हे।”
[34] जब यीसु देखलथी कि उ स मभ्फ से ज बाब देलन, तो उनका से कहलथी, “तूँ परमेसर के राज से दूर नञ।” आउर केकरो फिन उनखा से कुछ पूछे के हिम्मत नञ होलइ।
[35] फिन यीसु मनि्दल में उपदेस करइत ई कहलथी, “सास तिरी कइसे कहइत हथ कि मसीह दाऊद के बेटा हे?
[36] दाउद अपने पवित्तर आतमा में होके कहलन हे: ‘प रभु हमर परभु से कहलन, “हमर दहिना बइठऽ, जबले कि हम तोहर बैरिय न के तोहर गोड़ के पीढ़ा नञ बना दियो”।’
[37] दाऊद तो अपने ही उनका परभु कहऽ हे, फिन उ उनकर बेटा कन्ने से होलइ?” आउर भीड़ के लोग उनखा आनन्द से सुनइत हल।
[38] ऊ अप्पन उपदेस में उनकन्ही से कहलथी, “सास तिरीय न से चाउकस रहऽ, जे लम्बा-लम्बा चोगा पहिरले घूमना आउर बजारो में नमस्कार,
[39] आउर अराधनालयो में मुख-मुख आस न आउर भोज में मुख-मुख अस्थानो चाहऽ हथ।
[40] ओखनी बिधवावन के घर के खा जा हथ, आउर देखावे लागी ढ़ेर देर ला पराथाना करइत रहऽ हथ। ई बेसी दण्ड पउतन।”
[41] ऊ मनि्दल में भन्डार के सामने बइठके देखइत हलथी कि लोग मनि्दल के भन्डार में कउन तरे पइसा डालइत हथ, आउर ढ़ेरमनी ध् नमान ढे़रे कुछ डाललन।
[42] एतने में एगो कंगाल बिध् वा आके दूगो चमन्नी, जे एगो अठन्नी के बराबर होबऽ हइ, डाललकी।
[43] तब ऊ अप्पन चेलमन के भीरी बोलाके उनका से कहलथी, “हम तोरा से सच कहऽ हियो कि मनि्दल के भन्डार में दान देवइया में से ई कंगाल बिधवा सबसे बढ़के दान देलकय,
[44] काहेकि सब अप्पन धन के बढ़ती में से दान देलकय, बाकि ई अप्पन घटी में से जे कुछ ओकर हल, माने अप्पन स उँसे जीबिका दान देलकय हे।’