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[1] यह भी जान लो, कि अन्त के दिनों में बहुत परेशानियों के दिन आयेंगे।

[2] लोग स्वयं से प्रेम करने वाले और धन के लोभी, अपनी ही डींग हाँकने वाले, घमण्डी, परमेश्‍वर के विरोध में कहने वाले, माता-पिता की बात टालने वाले, धन्यवाद न देने वाले और अशुद्ध,

[3] स्वभाविक प्रेम रहित, क्षमा न करने वाले, बदनामी करने वाले, बिना सयंम के, निर्दयी और अच्छाई के विरोधी होंगे।

[4] विश्‍वासघाती, ज़िद्दी, घमण्डी और परमेश्‍वर को चाहने के बजाए सुखविलास की खोज करने वाले होंगे।

[5] धर्मी दिखेंगे, किन्तु इसकी शक्‍ति का इन्कार करने वाले होंगे। ऐसे लोगों से दूर रहना।

[6] इसी तरह के कुछ लोग उन मूर्ख स्त्रियों के घरों में चालाकी से पहुँच कर उन को अपने वश में कर लेते हैं, जो हर तरह की दुष्टता से लदी और लालसाओं के वश में हैं।

[7] ये महिलाएँ कुछ न कुछ नया सीखती रहती हैं, लेकिन सत्य को कभी नहीं पहचानती हैं।

[8] जिस तरह से यन्नेस और जम्ब्रेस ने मूसा का विरोध किया, उसी तरह से ये गंदे मन वाले लोग सच्चाई का विरोध करते हैं और जहाँ तक विश्‍वास का प्रश्न है, किसी काम के नहीं।

[9] ऐसे लोगों को कोई सफ़लता नहीं मिलेगी और जिस तरह से मूसा के विरोधियों की मूर्खता सब के सामने आ गयी, उनके साथ भी ऐसा ही होगा।

[10] किन्तु तुम ने मेरी शिक्षा, लक्ष्य, विश्‍वास, धीरज, प्यार और सहनशीलता को देखा है।

[11] अन्ताकिया, इकुनियम और लुस्त्रा में मुझे किन-किन सताव और कठिनाईयों का सामना करना पड़ा? मैंने क्या-क्या न सहा? लेकिन यीशु ने मुझे उन सब से छुड़ा लिया।

[12] जो लोग यीशु मसीह के होने के कारण खरा जीवन जीना चाहते हैं, वे सताए जाएँगे।

[13] लेकिन दुष्ट और धोखेबाज़ लोग बद से बदतर होते जाएँगे, वे खुद धोखा खाते हुए दूसरों को भी उस गड्ढे में ढकेलेंगे।

[14] परन्तु यह जानते हुए कि तुम ने किससे शिक्षा पायी है, तुम्हें वह सब करते रहना चाहिए, जो तुम ने मुझ से सीखा है और यकीन किया है।

[15] बचपन से तुम वचन (बाइबल) को जानते हो, जो तुम्हें मसीह यीशु पर विश्‍वास करके मुक्‍ति पाने के लिए अक्लमन्द बनाता है।

[16] पूरी बाइबल परमेश्‍वर के आत्मा की प्रेरणा से रची गई है। यह सिखाने, कायल करने, गलती सुधारने और सही कार्य करने की दिशा दिखाने के योग्य है,

[17] ताकि परमेश्‍वर का जन स्वयं मज़बूत हो एवं प्रत्येक अच्छे काम के लायक और तैयार हो।

2 तीमुथियुस — Chapters