[1] पौलुस की ओर से जो उस जीवन की प्रतिज्ञा के अनुसार जो यीशु मसीह में है, परमेश्वर की इच्छा से यीशु का प्रेरित (भेजा हुआ) है,
[2] मेरे अति प्रिय बेटे तिमोथी, तुम्हें परमेश्वर पिता और यीशु मसीह की ओर से अनुग्रह दया और शान्ति मिले।
[3] मैं अपने उस परमेश्वर का आभारी हूँ, जिसकी सेवा मैं शुद्ध विवेक से करता हूँ जैसी मेरे पूर्वजों ने की। मैं रात-दिन अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें निरन्तर याद करता हूँ।
[4] तुम्हारे आँसुओं को याद करने पर मेरे भीतर बड़ी लालसा होती है, कि मैं तुम्हें देखकर खुशी से भर जाऊँ।
[5] जो विश्वास पहले तुम्हारी नानी लोइस और माँ यूनिस में था और जिसकी याद मुझे आती है, मैं निश्चित हूँ कि वही सच्चा विश्वास तुम में है।
[6] मेरे हाथों के तुम्हारे सिर पर रखे जाने से जो वरदान तुम्हें मिला था, मैं उसे याद दिलाना चाहता हूँ कि तुम्हें अपने जीवन में परमेश्वर के उस वरदान को चमकाने की ज़रूरत है।
[7] क्योंकि परमेश्वर ने हमें डर की नहीं किन्तु शक्ति (सामर्थ), प्यार और संयम (ठण्डे दिमाग) की आत्मा दी है।
[8] यीशु की और मुझ कैदी की गवाही से तुम शर्मिन्दा न हो, किन्तु परमेश्वर की ताकत से सुसमाचार सुनाये जाने के कारण आने वाले कष्टों को मेरे साथ सहो।
[9] उन्हों ने हमें मुक्ति दी और पवित्र बुलाहट से बुलाया है। यह बुलाहट हमारे भले कामों के कारण नहीं, किन्तु उनके अपने उद्देश्य और अनुग्रह (शर्तहीन कृपा) के कारण थी, जो सृष्टि के बनाए जाने से पहले मसीह यीशु में हमें मिली थी।
[10] जिस यीशु मसीह ने सुसमाचार के द्वारा मौत को नाश किया और जीवन एवं अमरता को हमारे सामने रखा, उन्हीं मुक्तिदाता यीशु मसीह के पृथ्वी पर आने से यह (मुक्ति और पवित्र बुलाहट) अब हमारे सामने रखी है।
[11] गैर यहूदियों को यही सुसमाचार देने के लिए मैं एक संदेशवाहक, प्रेरित और शिक्षक ठहराया गया हूँ।
[12] इसी कारणवश मैं इन दुःखों को झेल रहा हूँ, फिर भी मैं शर्मिन्दगी महसूस नहीं करता हूँ, क्योंकि मैं यह जानता हूँ, कि जिन पर मैंने भरोसा किया है जो कुछ मैंने उन्हें सुपुर्द कर दिया है, उसे वह उस दिन तक संभालने के लायक हैं।
[13] मसीह यीशु में विश्वास और प्रेम के साथ जो सही शिक्षा तुम ने मुझ से सुनी थी, उसे मज़बूती से पकड़े रहो।
[14] जो अच्छी वस्तु तुम्हें सौंपी गयी थी, उसे हमारे भीतर रहने वाले पवित्र आत्मा के द्वारा संभाले रहो।
[15] तुम्हें मालूम है कि एशिया में सभी, यहाँ तक कि फ़ुगिलुस और हिरमुगिनेस ने भी हमें छोड़ दिया था।
[16] उनेसिफ़ोरस के परिवार के ऊपर यीशु कृपा करें क्योंकि कई बार उसने मेरी हिम्मत बढ़ायी और मेरे कैदी होने के कारण उसने शर्म महसूस नहीं की।
[17] जब वह रोम में आया, तो बहुत मेहनत करके मुझे खोजता रहा और मुझे पा भी लिया।
[18] प्रभु करे कि उस दिन वह परमेश्वर की दया को हासिल कर सके। तुम्हें तो मालूम है कि इफ़िसुस में उसने कई तरह से मेरी सेवा की थी।