[1] अन्त में, हे भाइयो-बहनो, हमारे लिये प्रार्थना किया करो, कि प्रभु का वचन ऐसा जल्दी फैले और महिमा पाए जैसा तुम में हुआ था,
[2] और हम टेढ़े और दुष्ट मनुष्यों से बचे रहें क्योंकि हर एक में विश्वास नहीं है।
[3] परन्तु प्रभु सच्चे हैं, वह तुम्हें डावाँडोल नहीं होने देंगे, और उस दुष्ट से बचा कर रखेंगे।
[4] हमें प्रभु ने तुम्हारे ऊपर भरोसा है, कि जो-जो आदेश हम तुम्हें देते हैं, उन्हें तुम मानते हो और मानते भी रहोगे।
[5] परमेश्वर के प्रेम और मसीह के धीरज के साथ इन्तज़ार करने की दिशा में प्रभु तुम्हारे मन की अगुवाई करें।
[6] हे भाइयो-बहनो, हम तुम्हें अपने प्रभु यीशु मसीह के नाम से आज्ञा देते हैं कि हर एक ऐसे भाई से अलग रहे, जिसका चाल चलन सही नहीं है और जो शिक्षा उसने हमसे पाई उसके अनुसार नहीं करता है।
[7] तुम स्वयं जानते हो, कि किस तरह तुम्हारा जीवन हमारे जीवन की तरह होना चाहिये था, क्योंकि हम तुम्हारे बीच में अनुचित जीवन नहीं जी रहे थे,
[8] हम ने किसी की रोटी मुफ़्त में न खाई, पर मेहनत और कष्ट से रात दिन काम धंधा करते थे, कि तुम में से किसी पर बोझ न बनें।
[9] यह नहीं कि हमें अधिकार नहीं था, लेकिन इसलिए कि अपने आपको तुम्हारे लिये आदर्श ठहराएँ कि तुम हमारी सी चाल चलो।
[10] जब हम तुम्हारे यहाँ थे, तब भी यह आज्ञा तुम्हें देते थे, कि जो लोग मेहनत नहीं करना चाहते हैं, उन्हें खाना खाने का भी हक़ नहीं है।
[11] हम सुनते हैं कि कुछ लोग तुम्हारे बीच में अनुचित चाल चलते हैं, और निकम्मे बैठे रहते हैं, पर दूसरों के काम में हाथ डाला करते हैं।
[12] ऐसों को हम प्रभु यीशु में आज्ञा देते और समझाते हैं, कि चुपचाप काम करके अपना खाना खाया करें।
[13] हे भाइयो-बहनो, भलाई करने में पीछे न रहो।
[14] यदि कोई हमारी इस चिट्ठी की बात को न माने, तो उस पर ध्यान देना और उसकी संगति न करो, जिससे वह शर्मिन्दा हो,
[15] तौभी उसे बैरी मत समझना पर भाई जानकर चेतावनी देना।
[16] अब प्रभु जो शान्ति के झरने हैं आप ही तुम्हें सदा और हर प्रकार से शान्ति दे। प्रभु तुम सब के साथ रहें।
[17] मैं पौलुस अपने हाथ से आशीर्वाद के शब्द लिखता हूँ, हर चिट्ठी में मेरा यही सबूत है। मैं इसी तरह से लिखता हूँ।
[18] हमारे प्रभु यीशु मसीह की असीम कृपा तुम सब पर होती रहे।