[1] हे भाइयो-बहनो, हम अपने प्रभु यीशु मसीह के आने और उनके पास हमारे इकट्ठे होने के विषय में तुम से बिनती करते हैं,
[2] कि किसी आत्मा, या संदेश या ऐसी चिट्ठी के द्वारा जो कि मानो हमारी ओर से हो, यह समझकर कि प्रभु का दिन आ पहुँचा है, तुम्हारा मन अचानक अस्थिर न हो जाए और न ही तुम घबराना।
[3] किसी तरह से किसी के धोखे में न आना क्योंकि वह दिन न आएगा, जब तक विश्वास का त्याग न हो ले और वह पाप का पुरुष अर्थात् विनाश का पुत्र दिखायी न दे,
[4] जो विरोध करता है और परमेश्वर, जिसकी इबादत की जाती है, उन से अपने आपको बड़ा ठहराता है, यहाँ तक कि वह परमेश्वर के मंदिर (भवन) में बैठकर अपने आपको परमेश्वर प्रगट करता है।
[5] क्या तुम्हें याद नहीं, कि जब मैं तुम्हारे यहाँ था, तो तुम से ये बातें कहा करता था?
[6] और अब तुम जानते हो, कि उसे क्या रोक रहा है, कि वह अपने ही समय में प्रगट हो।
[7] क्योंकि अनाचार (अधर्म) का रहस्य अभी भी जारी है, पर अभी एक रोकने वाला है और जब तक वह दूर न हो जाए, वह रोके रहेगा।
[8] तब वह दुष्ट प्रगट होगा, जिसे प्रभु यीशु अपने मुँह की फूँक से मार डालेंगे और अपने आगमन के तेज से भस्म करेंगे।
[9] उस अधर्मी का आना शैतान के काम के अनुसार सब तरह की झूठी शक्ति, चिन्ह और अद्भुत काम के साथ
[10] और बर्बाद होने वालों के लिये दुष्टता के सब तरह के धोखे के साथ होगा, क्योंकि उन्हों ने सच्चाई को गले नहीं लगाया, जिससे उन का उद्धार हो गया होता।
[11] और इसीलिये परमेश्वर उन में एक भटका देने वाली शक्ति को भेजेंगे ताकि वे झूठ को अपना लें,
[12] और जितने लोग सच्चाई पर भरोसा नहीं करते वरन बुराई से खुश होते हैं, सब दण्ड पाएँ।
[13] हे भाइयो बहनो, और प्रभु के प्रिय लोगो, हमें तुम्हारे बारे में सदा परमेश्वर का धन्यवाद करते रहना चाहिए, कि परमेश्वर ने शुरूआत से तुम्हें चुन लिया, कि आत्मा के द्वारा पवित्र बनकर और सच्चाई पर विश्वास करके मुक्ति पा जाओ।
[14] जिसके लिये उन्हों ने (परमेश्वर ने) तुम्हें हमारे सुसमाचार के द्वारा बुलाया (बचाया), कि तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह की महिमा को हासिल करो।
[15] इसलिये हे भाइयो-बहनो, अडिग रहो और जो-जो बातें तुम ने क्या वचन, क्या चिट्ठी के द्वारा हमसे सीखी हैं, उन्हें थामे रहो।
[16] हमारे प्रभु यीशु मसीह आप ही और हमारे पिता परमेश्वर जिन्होंने हमसे प्रेम रखा और कृपा से अनन्त शान्ति और उत्तम आशा दी है,
[17] तुम्हारे मनों में शान्ति दें और तुम्हें हर एक अच्छे काम और बोल-चाल में सयाना बनाएँ।