[1] पौलुस की ओर से, जो हमारे मुक्तिदाता परमेश्वर और हमारी आशा मसीह यीशु की आज्ञा से मसीह यीशु का प्रेरित है,
[2] तीमुथियुस के, नाम जो विश्वास में मेरा सच्चा बेटा है, पिता परमेश्वर और हमारे प्रभु मसीह यीशु की ओर से तुम्हें असीम कृपा (अनुग्रह), दया, और शान्ति मिलती रहे।
[3] मैंने मकिदुनिया को जाते समय तुम्हें समझाया था कि इफ़िसुस में रह कर कुछ लोगों को आज्ञा दो, कि वे दूसरी कोई शिक्षा (सिद्धान्त) न सिखाएँ।
[4] उन ऐसी झूठी कहानियों और अनगिनित वंशावलियों पर अपना ध्यान न लगाएँ, जिनसे झगड़े होते हैं, जो परमेश्वर की उस योजना के अनुसार नहीं हैं, जो विश्वास से सम्बन्ध रखती हैं।
[5] आज्ञा का मकसद् (उद्देश्य) यह है कि शुद्ध मन, अच्छे विवेक और कपट रहित विश्वास से प्रेम उत्पन्न हो।
[6] इन को छोड़कर कई लोग फिरकर बेकार की बातों में भटक गए हैं।
[7] वे धार्मिक शिक्षक (नियमशास्त्र के सिखाने वाले) तो बनना चाहते हैं, परन्तु जो बातें कहते और जिन पर जो़र डालकर बोलते हैं, उनको समझते भी नहीं।
[8] लेकिन हम जानते हैं कि यदि कोई नियम शास्त्र (व्यवस्था) को सही तरीके से काम में लाए, तो यह भला है।
[9] यह जानकर कि नियमशास्त्र विश्वासी (सज़ामुक्त ठहराए व्यक्ति) के लिए नहीं, परन्तु अधर्मियों, मनमाना आचरण करने वालों, भक्तिहीनों, पापियों, अपवित्र और अशुद्ध लोगों, माँ-बाप की हत्या करने वालों, हत्यारों,
[10] व्याभिचारियों, पुरुषगामियों, मनुष्य के बेचने वालों, झूठों, और झूठी शपथ खाने वालों, और इन को छोड़ खरे संदेश के सब विरोधियों के लिए ठहराया गया है।
[11] यही धन्यवाद के योग्य परमेश्वर की महिमा के उस सुसमाचार के अनुसार है, जो मुझे सुपुर्द किया गया है।
[12] मैं अपने प्रभु मसीह यीशु का जिन्होंने मुझे योग्यता दी है, धन्यवाद करता हूँ कि उन्हों ने मुझे भरोसेमन्द समझकर अपनी सेवा के लिए ठहराया।
[13] मैं तो पहले निन्दा करने वाला, सताने वाला, और अन्याय करने वाला था, तौभी मुझ पर दया हुई, क्योंकि मैंने मात्र धार्मिक जोश में बिना-समझे-बूझे, अज्ञानता के साथ ये काम किए थे।
[14] हमारे प्रभु महान् की कृपा उस विश्वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, मुझ पर बहुतायत से हुई।
[15] यह बात सच और हर प्रकार से स्वीकार करने के योग्य है कि मसीह यीशु अपराधियों को मुक्ति देने के लिए दुनिया में आए, जिनमें सब से बड़ा मैं हूँ।
[16] परन्तु मुझ पर इसलिए दया हुई कि मुझ सब से बड़े अपराधी में यीशु मसीह अपनी पूरी सहनशीलता दिखाएँ, ताकि जो लोग उन (यीशु मसीह) पर अनन्त जीवन के लिए विश्वास करेंगे, उनके लिए मैं एक नमूना बनूँ।
[17] अब सनातन राजा अर्थात् अविनाशी, अनदेखे और बुद्धिमान परमेश्वर का आदर और महिमा आने वाले सभी युगों तक होता रहे। ऐसा ही हो।
[18] हे बेटे, तीमुथियुस, उन भविष्यद्वाणियों के अनुसार जो पहले तुम्हारे विषय में की गयीं थीं, तुम्हारे लिए मेरा आदेश यह है कि तुम उनके अनुसार अच्छी लड़ाई को लड़ते रहो,
[19] और विश्वास और उस अच्छे विवेक को संभाल कर रखो, जिसे दूर करने की वजह से कितनों का विश्वास रूपी जहाज़ डूब गया।
[20] उन्हीं में से हिमुनयुस और सिकन्दर हैं, जिन्हें मैंने शैतान के सुपुर्द कर दिया है, कि उन्हें परमेश्वर की निन्दा न करने का पाठ सिखाया जाए।