[1] हे भाइयो-बहनो, इसकी ज़रूरत नहीं, कि समयों और युगों के विषय में तुम्हें कुछ सिखाया जाए।
[2] क्योंकि तुम आप ठीक जानते हो कि जैसे रात को चोर आता है, वैसे ही प्रभु का दिन आने वाला है।
[3] जब लोग कहते होंगे, कि कुशल है और कुछ डर नहीं, तब उन पर अचानक विनाश आ पड़ेगा। जैसे गर्भवती स्त्री पर अचानक प्रसव की पीड़ा आती है, वैसे ही उन के लिए भी दर्द का समय आएगा, और वे किसी रीति से न बचेंगे।
[4] परन्तु तुम तो अज्ञानता और बुराई में नहीं हो, कि वह दिन तुम पर चोर की तरह आ पड़े।
[5] क्योंकि तुम सब ज्योति की संतान और दिन की संतान हो। हम न रात के हैं, न अंधकार के हैं।
[6] इसलिये हम दूसरों के समान सोते न रहें, पर जागते और सावधान रहें।
[7] क्योंकि जो सोते हैं, वे रात ही को सोते हैं और जो मतवाले होते हैं, वे रात ही को मतवाले होते हैं।
[8] परन्तु हम जो दिन के हैं, विश्वास और प्रेम की झिलम पहनकर और मुक्ति की आशा का टोप पहनकर सावधान रहें,
[9] क्योंकि परमेश्वर ने हमें सज़ा के लिये नहीं, परन्तु इसलिये ठहराया है, कि हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा मुक्ति प्राप्त करें।
[10] वह हमारे लिये इस कारण मरे, कि हम चाहे जागते हों, चाहे सोते हों, सब मिलकर उन्हीं के साथ जियें।
[11] इस कारण एक दूसरे को शान्ति दो और एक दूसरे की उन्नति के कारण बनो, जैसा कि तुम करते भी हो।
[12] हम तुम से बिनती करते हैं, कि जो तुम में मेहनत करते है और प्रभु में तुम्हारे अगुवे हैं और तुम्हें शिक्षा देते हैं, उनकी कही बातों पर ध्यान दो।
[13] उनके काम के कारण प्रेम के साथ उनको बहुत ही आदर के योग्य समझो। आपस में मेल-मिलाप से रहो।
[14] हे भाइयो बहनो, हम तुम्हें समझाते हैं कि जो ठीक चाल नहीं चलते, उनको समझाओ। डरने वालों को हिम्मत दो, कमज़ोरों को संभालो, सब की ओर सहनशीलता दिखाओ।
[15] सावधान! कोई किसी से बुराई के बदले बुराई न करे, लेकिन सदा भलाई करने पर तत्पर रहो। आपस में और सब से भी भलाई ही की कोशिश करो।
[16] सदा खुश रहो।
[17] निरन्तर प्रार्थना में लगे रहो।
[18] हर बात में आभार प्रकट करते रहो, क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है।
[19] आत्मा को न बुझाओ।
[20] भविष्यवाणियों को तुच्छ न मानो।
[21] सब बातों को परखो, जो अच्छी है उसे पकड़े रहो।
[22] सब प्रकार की बुराई से बचे रहो।
[23] शान्ति के परमेश्वर आप ही तुम्हें पूरी तरह से पवित्र करें और तुम्हारे आत्मा, प्राण और देह हमारे प्रभु यीशु मसीह के आने तक निर्दोष रहें।
[24] तुम्हारे बुलाने वाले, सच्चे हैं और वह ऐसा ही करेंगे।
[25] हे भाइयो, हमारे लिये प्रार्थना करो।
[26] सब भाइयों को सलाम।
[27] मैं तुम्हें आदेश देता हूँ, कि यह पत्र सब भाइयों को पढ़कर सुनाया जाए।
[28] हमारे प्रभु यीशु मसीह की असीम कृपा तुम पर बनी रहे।