[1] हे भाइयो-बहनो, तुम आप ही जानते हो कि हमारा तुम्हारे पास आना बेकार न हुआ।
[2] जैसा कि तुम जानते हो, कि पहिले फ़िलिप्पी में दुःख उठाने और उपद्रव सहने पर भी हमारे परमेश्वर ने हमें ऐसी हिम्मत दी, कि हम परमेश्वर का अच्छा-संदेश भारी विरोध के होते हुए भी तुम्हें सुनाएँ।
[3] क्योंकि हमारा उपदेश न भ्रम से है और न अशुद्धता से और न छल के साथ।
[4] किन्तु जैसा परमेश्वर ने हमें योग्य ठहराकर सुसमाचार सौंपा, हम वैसा ही बताते है, और इस में मनुष्यों को नहीं, परन्तु परमेश्वर को, जो हमारे मनों को जाँचते हैं, खुश करते हैं।
[5] जैसा कि तुम जानते हो, कि हम न तो कभी चापलूसी की बातें किया करते थे और न लालच के लिये बहाना बनाया करते थे। परमेश्वर हमारे गवाह हैं।
[6] हालांकि हम मसीह के प्रेरित होने के कारण तुम पर बोझ डाल सकते थे, तौभी हम मनुष्यों से आदर नहीं चाहते थे, और न तुम से, न और किसी से।
[7] परन्तु जिस तरह माता अपने बालकों का पालन-पोषण करती है, वैसे ही हम ने भी तुम्हारे बीच में रहकर कोमलता दिखाई है,
[8] और वैसे ही हम तुम्हारी लालसा करते हुए, न केवल परमेश्वर का सुसमाचार, पर अपनी जान भी तुम्हें देने को तैयार थे, इसलिये कि तुम हमारे लिए कीमती हो गए थे।
[9] हे भाइयो बहनो, तुम हमारी मेहनत और कष्ट को याद रखते हो, कि हम ने इसलिये रात दिन मेहनत करते हुए तुम में परमेश्वर का सुसमाचार दिया, कि तुम में से किसी पर भार न हो।
[10] तुम आप ही गवाह हो और परमेश्वर भी, कि तुम्हारे बीच में जो विश्वास रखते हो हम कैसी पवित्रता और निर्दोषता से रहे।
[11] तुम जानते हो, कि जैसा पिता अपने बच्चों के साथ बर्ताव करता है, वैसे ही तुम में से हर एक को भी उपदेश करते, और शान्ति देते और समझाते थे।
[12] कि तुम्हारा चरित्र परमेश्वर के योग्य हो, जो तुम्हे अपने राज्य और महिमा में बुलाते हैं।
[13] इसलिये हम भी परमेश्वर का धन्यवाद निरन्तर करते हैं, कि जब हमारे द्वारा परमेश्वर के सुसमाचार का वचन तुम्हारे पास पहुँचा, तो तुम ने उसे मनुष्यों का नहीं, परन्तु परमेश्वर का वचन समझकर (और सचमुच यह ऐसा ही है) स्वीकार किया। वह वचन तुम में, जो विश्वास रखते हो, प्रभावशाली है।
[14] हे भाइयो बहनो, तुम परमेश्वर की उन कलीसियाओं के समान जीवन जीने लगे, जो यहूदिया में मसीह यीशु में हैं, क्योंकि तुम ने भी अपने लोगों से वैसा ही दुःख पाया, जैसा उन्हों ने यहूदियों से पाया था,
[15] जिन्होंने प्रभु यीशु को और भविष्यवक्ताओं को भी मार डाला और हम को भी सताया। परमेश्वर उन से खुश नहीं और वे सब मनुष्यों का विरोध करते हैं।
[16] क्योंकि वे गैर यहूदियों से बातें करने से हमें रोकते हैं, कि सदा अपने पापों को पैमाना भरते रहे, किन्तु उन पर परमेश्वर की डरा देने वाली सज़ा आ चुकी है।
[17] हे भाइयो बहनो, हम थोड़ी देर के लिये मन में नहीं वरन प्रगट में तुम से अलग हो गए थे, इसलिए हम ने बड़ी चाह के साथ तुम्हारा मुँह देखने के लिए और भी अधिक कोशिश की।
[18] इसलिए हम ने (अर्थात् मुझ पौलुस ने) एक बार नहीं, वरन् दो बार तुम्हारे पास आना चाहा, परन्तु शैतान हमें रोके रहा।
[19] हमारी आशा या आनन्द या उल्लास का मुकुट क्या है? क्या हमारे प्रभु यीशु के सामने उनके आने के समय तुम ही न होगे?
[20] हमारी महिमा और आनन्द तुम ही हो।