[1] तुम्हारे यहाँ के बुजुर्ग अगुवों के समान मैं भी मसीह की पीड़ाओं का गवाह रहा हूँ, और आने वाली महिमा का भी हिस्सेदार हूँ, तुम्हारे अगुवों को दिलासा दिलाना चाहता हूँ,
[2] कि वहाँ के परमेश्वर के लोगों की रखवाली करो। यह भी इसलिए नहीं कि करना है या इस से कुछ आमदनी हो जाएगी लेकिन परमेश्वर के मार्गदर्शन में खुशी से।
[3] जिन लोगों की देख-रेख करनी है, उन पर ज़ोर ज़बरदस्ती न करो, लेकिन सभी के लिए नमूना बनो।
[4] जब प्रधान रखवाले का आना होगा, तुम्हें इतना शानदार ताज दिया जाएगा, जो कभी मुरझाता नहीं है।
[5] इसी तरह से नवजवानो, तुम भी अपने अगुवों की मानो। तुम सभी एक दूसरे के प्रति दीनता और नम्रता का बर्ताव करो, इसलिए कि "परमेश्वर घमण्डी का मुकाबला करते हैं, लेकिन नम्र इन्सान के पक्ष में काम करते हैं।"
[6] इसलिए शक्तिशाली परमेश्वर की आधीनता में नम्रता से जीना सीखो ताकि सही समय पर वह तुम्हें बढ़ाएँ।
[7] अपनी सारी चिन्ताओं को उन्हीं पर डाल दो, क्योंकि तुम्हारी देखभाल वही करते हैं।
[8] अपने आपको काबू में रखो और सचेत रहो, क्योंकि तुम्हारा दुश्मन शैतान गर्जने वाले शेर की तरह इस तलाश में रहता है, कि किसको अपना निशाना बनाए।
[9] अपने विश्वास में मज़बूत रहकर उसका मुकाबला करो और यह जान लो कि तुम्हारे भाई जो इस दुनिया में हैं, इसी तरह की पीड़ा सह रहे हैं।
[10] तुम्हारी थोड़ी देर के कष्ट सहने के बाद सारी कृपा के परमेश्वर जिन्होंने तुम्हें मसीह में अपनी युगानुयुग की महिमा के लिए बुलाया है, खुद ही तुम्हें सिद्ध, मजबूत, बलवन्त और स्थिर कर देंगे।
[11] उन्हें महिमा और प्रभुता सदा मिलती रहे। ऐसा ही हो!
[12] मैंने सिलवानुस के हाथ, जिसे मैं विश्वसनीय भाई समझता हूँ, थोड़ा सा लिखकर तुम्हें समझाया है और यह गवाही दी है कि परमेश्वर की सच्ची कृपा यही है, इसी में बने रहो।
[13] वह जो तुम्हारे साथ चुनी गई है और बेबिलोन (इराक) में है, और मेरा बेटा मरकुस तुम्हें नमस्कार कहते हैं
[14] प्रेम और आदर से एक दूसरे से मिलो। तुम सभी को जो, यीशु को अपना चुके हो, शान्ति मिले।