[1] रिहोबोयाम शेकेम नगर गया, क्योंकि उसके राजाभिषेक के उद्देश्य से सारा इस्राएल वहां इकट्ठा हुआ था.
[2] जब नेबाथ के पुत्र यरोबोअम ने यह सुना, जो इस समय मिस्र देश में ही रह रहा था, वह राजा शलोमोन से भागकर यहीं ठहरा हुआ था,
[3] लोगों ने संदेश भेजकर उसे बुलवा लिया. तब यरोबोअम और सारी इस्राएली सभा अपनी बात रखने रिहोबोयाम के पास गई. उन्होंने रिहोबोयाम से कहा,
[4] “आपके पिता ने हम पर भरी जूआ लाद रखा था, मगर आपके पिता द्वारा रखे गए काम के बोझ और भारी जूए को अब हल्का कर दीजिए. हम आपके सेवक बने रहेंगे.”
[5] रिहोबोयाम ने उन्हें उत्तर दिया, “अभी आप जाइए और तीन दिन के बाद आइए, तब मैं आपको इसका उत्तर दूंगा.” तब वे सब लौट गए.
[6] तब राजा रिहोबोयाम ने उन पुरनियों से सलाह ली, जो उसके पिता शलोमोन के जीवनकाल में सांसद थे. रिहोबोयाम ने उनसे पूछा, इन लोगों को उत्तर देने के लिए आप लोगों की क्या राय है.
[7] उन्होंने उसे उत्तर दिया, “यदि आप आज इन लोगों के सामने सेवक की तरह बनकर उन्हें उत्तर देते हुए उनसे मीठी बातें करें, तो वे आजीवन आपके सेवक बने रहेंगे.”
[8] मगर रिहोबोयाम ने पुरनियों की इस सलाह पर ध्यान ही न दिया और जाकर उन युवाओं से सलाह ली, जो उसी के साथ पले बढ़े थे, जो अब उसी की सेवा में लगे हुए थे.
[9] उसने उनसे पूछा “इन लोगों के लिए तुम्हारी राय क्या है, जो लोग मुझसे विनती करने आए थे, ‘आपके पिता द्वारा हम पर रखा गया जूआ हल्का कर दीजिए’?”
[10] उसके साथ-साथ पले बढ़े युवाओं ने उसे उत्तर दिया, “जिन लोगों ने आप से यह विनती की है, ‘आपके पिता द्वारा हम पर रखे गए भारी जूए को हल्का कर दीजिए,’ उन्हें यह उत्तर दीजिए, ‘मेरे हाथ की छोटी उंगली ही मेरे पिता की कमर से मोटी है!
[11] यदि मेरे पिता ने तुम पर भारी जूआ लादा था, तो मैं उसे और भी अधिक भारी बना दूंगा. मेरे पिता ने तो तुम्हें नियंत्रण में रखने के लिए कोड़े इस्तेमाल किए थे, मगर मैं इसके लिए बिच्छू का इस्तेमाल करूंगा.’ ”
[12] जब यरोबोअम और सारी भीड़ तीन दिन बाद रिहोबोयाम के सामने आया, जैसा राजा द्वारा बताया गया था, “मेरे पास तीन दिन के बाद आना.”
[13] राजा ने पुरनियों की सलाह को छोड़कर,
[14] युवाओं की सलाह को महत्व देते हुए, उन्हें कठोर भाव में उत्तर दिया, “मेरे पिता ने तुम पर भारी जूआ लादा था, मैं उसे और भी अधिक भरी बना दूंगा, मेरे पिता तो तुम्हें नियंत्रण में करने के लिए कोड़े इस्तेमाल किए थे, मगर मैं इसके लिए बिच्छू का इस्तेमाल करूंगा.”
[15] राजा ने लोगों की एक न सुनी क्योंकि यह सारी बातें याहवेह द्वारा तय की जा चुकी थी, कि वह अपनी कही हुई बात को महिमा दें, जो उन्होंने नेबाथ के पुत्र यरोबोअम से शीलो के नबी अहिजाह द्वारा की थी.
[16] जब सारे इस्राएल के सामने यह बात आ गई कि राजा ने उनकी विनती की ओर ध्यान ही नहीं दिया है, उन्होंने राजा से यह कह दिया: “क्या भाग है दावीद में हमारा? क्या मीरास है यिशै पुत्र में हमारी? लौट जाओ अपने-अपने तंबुओं में, इस्राएल! दावीद, तुम अपने ही वंश को संभालते रहो!” तब इस्राएली अपने-अपने तंबुओं को लौट गए.
[17] मगर यहूदिया प्रदेशवासी इस्राएलियों पर रिहोबोयाम का शासन हो गया.
[18] राजा रिहोबोयाम ने अदोरम को, जो बेगार श्रमिकों का मुखिया था, इस्राएलियों के पास भेजा. सारे इस्राएलियों ने उसका पथराव किया कि उसकी हत्या हो गई. यह देख राजा रिहोबोयाम ने बिना देर किए रथ जुतवाया और वह येरूशलेम को भाग गया.
[19] इस प्रकार इस्राएल राज्य आज तक दावीद के वंश के विरुद्ध विद्रोह की स्थिति में है.
[20] जब सारे इस्राएल देश में यह मालूम चल गया कि यरोबोअम लौट आया है, उन्होंने उसे सभा में आमंत्रित किया और उसका सारे इस्राएल के राजा के रूप में राजाभिषेक कर दिया. सिर्फ यहूदाह कुल दावीद वंश के साथ रहा.
[21] जब रिहोबोयाम येरूशलेम लौटा, उसने सारे यहूदाह और बिन्यामिन कुल को इकट्ठा किया, ये एक लाख अस्सी हज़ार योद्धा थे, जिन्हें परखकर अलग किया गया था, कि ये इस्राएल वंश से युद्ध करें और शलोमोन के पुत्र रिहोबोयाम के राज्य को दोबारा उसे लौटा दें.
[22] मगर परमेश्वर के एक जन शेमायाह को परमेश्वर का आदेश इन शब्दों में मिला,
[23] “शलोमोन के पुत्र यहूदिया के राजा रिहोबोयाम से और यहूदाह और बिन्यामिन के सभी कुलों से और बाकी सभी लोगों से जाकर यह कहो:
[24] ‘यह याहवेह का आदेश है, अपने इन संबंधियों से, जो इस्राएल के वंशज हैं, युद्ध न करना. तुममें से हर एक अपने-अपने घर लौट जाए, क्योंकि यह स्थिति मेरे द्वारा उत्पन्न की गई है.’ ” तब उन्होंने याहवेह के आदेश का पालन किया. याहवेह के आदेश के अनुसार वे सब अपने-अपने घर लौट गए.
[25] यरोबोअम ने एफ्राईम के पहाड़ी इलाके में शेकेम नामक नगर को बसाया और वहीं रहने लगा. कुछ समय बाद उसे छोड़ उसने पेनिएल नामक स्थान को मजबूत किया.
[26] यरोबोअम ने विचार किया, “अब तो राज्य दावीद वंश के पास लौट जाएगा.
[27] यदि मेरे प्रजाजन बलि चढ़ाने के उद्देश्य से येरूशलेम में याहवेह के भवन को ही जाते रहेंगे, तो यह तय ही है कि उनका हृदय उनके स्वामी की ओर ही लगता जाएगा, यहूदिया के राजा रिहोबोयाम की ओर; और ये लोग मेरी हत्या कर देंगे और यहूदिया के राजा रिहोबोयाम की ओर फिर जाएंगे.”
[28] तब राजा ने सलाह के बाद सोने के दो बछड़े ढाले, और लोगों के सामने घोषणा की, “बहुत हो चुका तुम्हारा येरूशलेम जाना. इस्राएल, यह देखो, तुम्हारे देवता ये हैं ये ही हैं जो तुम्हें मिस्र देश से बाहर निकाल लाए हैं.”
[29] इसके बाद उसने एक को तो बेथ-एल में और दूसरे को दान प्रदेश में प्रतिष्ठित कर दिया.
[30] यह पाप साबित हुआ, क्योंकि लोग उसकी उपासना करने दूर के दान प्रदेश तक जाने लगे.
[31] उसने पूजा स्थलों पर घर बनवा दिए और सारी प्रजा में से ऐसे व्यक्तियों को पुरोहित चुन दिया, जो लेवी के वंशज न थे.
[32] तब यरोबोअम ने आठवें महीने के पन्द्रहवें दिन एक पर्व घोषित कर दिया. यह वैसा ही पर्व था, जो यहूदिया में मनाया जाता था. उसने बेथ-एल में वेदी पर उन बछड़ों के लिए बलियां चढ़ाईं, जो स्वयं उसने गढ़ी थी. उसने बैथएल में उन पूजा की जगहों पर पुरोहित चुन लिए, जिन पूजा घरों को खुद उसी ने बनवाया था.
[33] वह बेथ-एल में अपनी ही बनाई हुई वेदी पर आठवें महीने के पन्द्रहवें दिन गया और यह महीना खुद उसने अपनी ही बुद्धि से गढ़ा था. उसने इस्राएली प्रजा के लिए यह उत्सव ठहराया था, तब वह धूप जलाने वेदी पर गया.