[1] बलआम ने कहा, “यहाँ मेरे लिए सात क़ुर्बानगाहें बनाएँ। साथ साथ मेरे लिए सात बैल और सात मेंढे तय्यार कर रखें।”
[2] बलक़ ने ऐसा ही किया, और दोनों ने मिल कर हर क़ुर्बानगाह पर एक बैल और एक मेंढा चढ़ाया।
[3] फिर बलआम ने बलक़ से कहा, “यहाँ अपनी क़ुर्बानी के पास खड़े रहें। मैं कुछ फ़ासिले पर जाता हूँ, शायद रब मुझ से मिलने आए। जो कुछ वह मुझ पर ज़ाहिर करे मैं आप को बता दूँगा।” यह कह कर वह एक ऊँचे मक़ाम पर चला गया जो हरियाली से बिलकुल महरूम था।
[4] वहाँ अल्लाह बलआम से मिला। बलआम ने कहा, “मैं ने सात क़ुर्बानगाहें तय्यार करके हर क़ुर्बानगाह पर एक बैल और एक मेंढा क़ुर्बान किया है।”
[5] तब रब ने उसे बलक़ के लिए पैग़ाम दिया और कहा, “बलक़ के पास वापस जा और उसे यह पैग़ाम सुना।”
[6] बलआम बलक़ के पास वापस आया जो अब तक मोआबी सरदारों के साथ अपनी क़ुर्बानी के पास खड़ा था।
[7] बलआम बोल उठा, “बलक़ मुझे अराम से यहाँ लाया है, मोआबी बादशाह ने मुझे मशरिक़ी पहाड़ों से बुला कर कहा, ‘आओ, याक़ूब पर मेरे लिए लानत भेजो। आओ, इस्राईल को बददुआ दो।’
[8] मैं किस तरह उन पर लानत भेजूँ जिन पर अल्लाह ने लानत नहीं भेजी? मैं किस तरह उन्हें बददुआ दूँ जिन्हें रब ने बददुआ नहीं दी?
[9] मैं उन्हें चटानों की चोटी से देखता हूँ, पहाड़ियों से उन का मुशाहदा करता हूँ। वाक़ई यह एक ऐसी क़ौम है जो दूसरों से अलग रहती है। यह अपने आप को दूसरी क़ौमों से मुम्ताज़ समझती है।
[10] कौन याक़ूब की औलाद को गिन सकता है जो गर्द की मानिन्द बेशुमार है। कौन इस्राईलियों का चौथा हिस्सा भी गिन सकता है? रब करे कि मैं रास्तबाज़ों की मौत मरूँ, कि मेरा अन्जाम उन के अन्जाम जैसा अच्छा हो।”
[11] बलक़ ने बलआम से कहा, “आप ने मेरे साथ क्या किया है? मैं आप को अपने दुश्मनों पर लानत भेजने के लिए लाया और आप ने उन्हें अच्छी-ख़ासी बरकत दी है।”
[12] बलआम ने जवाब दिया, “क्या लाज़िम नहीं कि मैं वही कुछ बोलूँ जो रब ने बताने को कहा है?”
[13] फिर बलक़ ने उस से कहा, “आएँ, हम एक और जगह जाएँ जहाँ से आप इस्राईली क़ौम को देख सकेंगे, गो उन की ख़ैमागाह का सिर्फ़ किनारा ही नज़र आएगा। आप सब को नहीं देख सकेंगे। वहीं से उन पर मेरे लिए लानत भेजें।”
[14] यह कह कर वह उस के साथ पिसगा की चोटी पर चढ़ कर पहरेदारों के मैदान तक पहुँच गया। वहाँ भी उस ने सात क़ुर्बानगाहें बना कर हर एक पर एक बैल और एक मेंढा क़ुर्बान किया।
[15] बलआम ने बलक़ से कहा, “यहाँ अपनी क़ुर्बानगाह के पास खड़े रहें। मैं कुछ फ़ासिले पर जा कर रब से मिलूँगा।”
[16] रब बलआम से मिला। उस ने उसे बलक़ के लिए पैग़ाम दिया और कहा, “बलक़ के पास वापस जा और उसे यह पैग़ाम सुना दे।”
[17] वह वापस चला गया। बलक़ अब तक अपने सरदारों के साथ अपनी क़ुर्बानी के पास खड़ा था। उस ने उस से पूछा, “रब ने क्या कहा?”
[18] बलआम ने कहा, “ऐ बलक़, उठो और सुनो। ऐ सफ़ोर के बेटे, मेरी बात पर ग़ौर करो।
[19] अल्लाह आदमी नहीं जो झूट बोलता है। वह इन्सान नहीं जो कोई फ़ैसला करके बाद में पछताए। क्या वह कभी अपनी बात पर अमल नहीं करता? क्या वह कभी अपनी बात पूरी नहीं करता?
[20] मुझे बरकत देने को कहा गया है। उस ने बरकत दी है और मैं यह बरकत रोक नहीं सकता।
[21] याक़ूब के घराने में ख़राबी नज़र नहीं आती, इस्राईल में दुख दिखाई नहीं देता। रब उस का ख़ुदा उस के साथ है, और क़ौम बादशाह की ख़ुशी में नारे लगाती है।
[22] अल्लाह उन्हें मिस्र से निकाल लाया, और उन्हें जंगली बैल की ताक़त हासिल है।
[23] याक़ूब के घराने के ख़िलाफ़ जादूगरी नाकाम है, इस्राईल के ख़िलाफ़ ग़ैबदानी बेफ़ाइदा है। अब याक़ूब के घराने से कहा जाएगा, ‘अल्लाह ने कैसा काम किया है!’
[24] इस्राईली क़ौम शेरनी की तरह उठती और शेरबबर की तरह खड़ी हो जाती है। जब तक वह अपना शिकार न खा ले वह आराम नहीं करता, जब तक वह मारे हुए लोगों का ख़ून न पी ले वह नहीं लेटता।”
[25] यह सुन कर बलक़ ने कहा, “अगर आप उन पर लानत भेजने से इन्कार करें, कम अज़ कम उन्हें बरकत तो न दें।”
[26] बलआम ने जवाब दिया, “क्या मैं ने आप को नहीं बताया था कि जो कुछ भी रब कहेगा मैं वही करूँगा?”
[27] तब बलक़ ने बलआम से कहा, “आएँ, मैं आप को एक और जगह ले जाऊँ। शायद अल्लाह राज़ी हो जाए कि आप मेरे लिए वहाँ से उन पर लानत भेजें।”
[28] वह उस के साथ फ़ग़ूर पहाड़ पर चढ़ गया। उस की चोटी से यर्दन की वादी का जुनूबी हिस्सा यशीमोन दिखाई दिया।
[29] बलआम ने उस से कहा, “मेरे लिए यहाँ सात क़ुर्बानगाहें बना कर सात बैल और सात मेंढे तय्यार कर रखें।”
[30] बलक़ ने ऐसा ही किया। उस ने हर एक क़ुर्बानगाह पर एक बैल और एक मेंढा क़ुर्बान किया।