[1] रब ने मूसा से कहा,
[2] “इस्राईलियों को बताना कि जब तुम उस मुल्क में दाख़िल होगे जो मैं तुम्हें दूँगा
[3] तो जलने वाली क़ुर्बानियाँ यूँ पेश करना : अगर तुम अपने गाय-बैलों या भेड़-बकरियों में से ऐसी क़ुर्बानी पेश करना चाहो जिस की ख़ुश्बू रब को पसन्द हो तो साथ साथ डेढ़ किलोग्राम बेहतरीन मैदा भी पेश करो जो एक लिटर ज़ैतून के तेल के साथ मिलाया गया हो। इस में कोई फ़र्क़ नहीं कि यह भस्म होने वाली क़ुर्बानी, मन्नत की क़ुर्बानी, दिली ख़ुशी की क़ुर्बानी या किसी ईद की क़ुर्बानी हो।
[5] हर भेड़ को पेश करते वक़्त एक लिटर मै भी मै की नज़र के तौर पर पेश करना।
[6] जब मेंढा क़ुर्बान किया जाए तो 3 किलोग्राम बेहतरीन मैदा भी साथ पेश करना जो सवा लिटर तेल के साथ मिलाया गया हो।
[7] सवा लिटर मै भी मै की नज़र के तौर पर पेश की जाए। ऐसी क़ुर्बानी की ख़ुश्बू रब को पसन्द आएगी।
[8] अगर तू रब को भस्म होने वाली क़ुर्बानी, मन्नत की क़ुर्बानी या सलामती की क़ुर्बानी के तौर पर जवान बैल पेश करना चाहे
[9] तो उस के साथ साढ़े 4 किलोग्राम बेहतरीन मैदा भी पेश करना जो दो लिटर तेल के साथ मिलाया गया हो।
[10] दो लिटर मै भी मै की नज़र के तौर पर पेश की जाए। ऐसी क़ुर्बानी की ख़ुश्बू रब को पसन्द है।
[11] लाज़िम है कि जब भी किसी गाय, बैल, भेड़, मेंढे, बकरी या बकरे को चढ़ाया जाए तो ऐसा ही किया जाए।
[12] अगर एक से ज़ाइद जानवरों को क़ुर्बान करना है तो हर एक के लिए मुक़र्ररा ग़ल्ला और मै की नज़रें भी साथ ही पेश की जाएँ।
[13] लाज़िम है कि हर देसी इस्राईली जलने वाली क़ुर्बानियाँ पेश करते वक़्त ऐसा ही करे। फिर उन की ख़ुश्बू रब को पसन्द आएगी।
[14] यह भी लाज़िम है कि इस्राईल में आरिज़ी या मुस्तक़िल तौर पर रहने वाले परदेसी इन उसूलों के मुताबिक़ अपनी क़ुर्बानियाँ चढ़ाएँ। फिर उन की ख़ुश्बू रब को पसन्द आएगी।
[15] मुल्क-ए-कनआन में रहने वाले तमाम लोगों के लिए पाबन्दियाँ एक जैसी हैं, ख़्वाह वह देसी हों या परदेसी, क्यूँकि रब की नज़र में परदेसी तुम्हारे बराबर है। यह तुम्हारे और तुम्हारी औलाद के लिए दाइमी उसूल है।
[16] तुम्हारे और तुम्हारे साथ रहने वाले परदेसी के लिए एक ही शरीअत है।”
[17] रब ने मूसा से कहा,
[18] “इस्राईलियों को बताना कि जब तुम उस मुल्क में दाख़िल होगे जिस में मैं तुम्हें ले जा रहा हूँ
[19] और वहाँ की पैदावार खाओगे तो पहले उस का एक हिस्सा उठाने वाली क़ुर्बानी के तौर पर रब को पेश करना।
[20] फ़सल के पहले ख़ालिस आटे में से मेरे लिए एक रोटी बना कर उठाने वाली क़ुर्बानी के तौर पर पेश करो। वह गाहने की जगह की तरफ़ से रब के लिए उठाने वाली क़ुर्बानी होगी।
[21] अपनी फ़सल के पहले ख़ालिस आटे में से यह क़ुर्बानी पेश किया करो। यह उसूल हमेशा तक लागू रहे।
[22] हो सकता है कि ग़ैरइरादी तौर पर तुम से ग़लती हुई है और तुम ने उन अह्काम पर पूरे तौर पर अमल नहीं किया जो रब मूसा को दे चुका है
[23] या जो वह आने वाली नस्लों को देगा।
[24] अगर जमाअत इस बात से नावाक़िफ़ थी और ग़ैरइरादी तौर पर उस से ग़लती हुई तो फिर पूरी जमाअत एक जवान बैल भस्म होने वाली क़ुर्बानी के तौर पर पेश करे। साथ ही वह मुक़र्ररा ग़ल्ला और मै की नज़रें भी पेश करे। इस की ख़ुश्बू रब को पसन्द होगी। इस के इलावा जमाअत गुनाह की क़ुर्बानी के लिए एक बकरा पेश करे।
[25] इमाम इस्राईल की पूरी जमाअत का कफ़्फ़ारा दे तो उन्हें मुआफ़ी मिलेगी, क्यूँकि उन का गुनाह ग़ैरइरादी था और उन्हों ने रब को भस्म होने वाली क़ुर्बानी और गुनाह की क़ुर्बानी पेश की है।
[26] इस्राईलियों की पूरी जमाअत को परदेसियों समेत मुआफ़ी मिलेगी, क्यूँकि गुनाह ग़ैरइरादी था।
[27] अगर सिर्फ़ एक शख़्स से ग़ैरइरादी तौर पर गुनाह हुआ हो तो गुनाह की क़ुर्बानी के लिए वह एक यकसाला बकरी पेश करे।
[28] इमाम रब के सामने उस शख़्स का कफ़्फ़ारा दे। जब कफ़्फ़ारा दे दिया गया तो उसे मुआफ़ी हासिल होगी।
[29] यही उसूल परदेसी पर भी लागू है। अगर उस से ग़ैरइरादी तौर पर गुनाह हुआ हो तो वह मुआफ़ी हासिल करने के लिए वही कुछ करे जो इस्राईली को करना होता है।
[30] लेकिन अगर कोई देसी या परदेसी जान-बूझ कर गुनाह करता है तो ऐसा शख़्स रब की इहानत करता है, इस लिए लाज़िम है कि उसे उस की क़ौम में से मिटाया जाए।
[31] उस ने रब का कलाम हक़ीर जान कर उस के अह्काम तोड़ डाले हैं, इस लिए उसे ज़रूर क़ौम में से मिटाया जाए। वह अपने गुनाह का ज़िम्मादार है।”
[32] जब इस्राईली रेगिस्तान में से गुज़र रहे थे तो एक आदमी को पकड़ा गया जो हफ़्ते के दिन लकड़ियाँ जमा कर रहा था।
[33] जिन्हों ने उसे पकड़ा था वह उसे मूसा, हारून और पूरी जमाअत के पास ले आए।
[34] चूँकि साफ़ मालूम नहीं था कि उस के साथ क्या किया जाए इस लिए उन्हों ने उसे गिरिफ़्तार कर लिया।
[35] फिर रब ने मूसा से कहा, “इस आदमी को ज़रूर सज़ा-ए-मौत दी जाए। पूरी जमाअत उसे ख़ैमागाह के बाहर ले जा कर संगसार करे।”
[36] चुनाँचे जमाअत ने उसे ख़ैमागाह के बाहर ले जा कर संगसार किया, जिस तरह रब ने मूसा को हुक्म दिया था।
[37] रब ने मूसा से कहा,
[38] “इस्राईलियों को बताना कि तुम और तुम्हारे बाद की नस्लें अपने लिबास के किनारों पर फुन्दने लगाएँ। हर फुन्दना एक क़िर्मिज़ी डोरी से लिबास के साथ लगा हो।
[39] इन फुन्दनों को देख कर तुम्हें रब के तमाम अह्काम याद रहेंगे और तुम उन पर अमल करोगे। फिर तुम अपने दिलों और आँखों की ग़लत ख़्वाहिशों के पीछे नहीं पड़ोगे बल्कि ज़िनाकारी से दूर रहोगे।
[40] फिर तुम मेरे अह्काम को याद करके उन पर अमल करोगे और अपने ख़ुदा के सामने मख़्सूस-ओ-मुक़द्दस रहोगे।
[41] मैं रब तुम्हारा ख़ुदा हूँ जो तुम्हें मिस्र से निकाल लाया ताकि तुम्हारा ख़ुदा हूँ। मैं रब तुम्हारा ख़ुदा हूँ।”