[1] इमाम-ए-आज़म इलियासिब बाक़ी इमामों के साथ मिल कर तामीरी काम में लग गया। उन्हों ने भेड़ के दरवाज़े को नए सिरे से बना दिया और उसे मख़्सूस करके उस के किवाड़ लगा दिए। उन्हों ने फ़सील के साथ वाले हिस्से को भी मिया बुर्ज और हनन-एल के बुर्ज तक बना कर मख़्सूस किया।
[2] यरीहू के आदमियों ने फ़सील के अगले हिस्से को खड़ा किया जबकि ज़क्कूर बिन इम्री ने उन के हिस्से से मुल्हिक़ हिस्से को तामीर किया।
[3] मछली का दरवाज़ा सनाआह के ख़ानदान की ज़िम्मादारी थी। उसे शहतीरों से बना कर उन्हों ने किवाड़, चटख़्नियाँ और कुंडे लगा दिए।
[4] अगले हिस्से की मरम्मत मरीमोत बिन ऊरियाह बिन हक़्क़ूज़ ने की। अगला हिस्सा मसुल्लाम बिन बरकियाह बिन मशेज़ब-एल की ज़िम्मादारी थी। सदोक़ बिन बाना ने अगले हिस्से को तामीर किया।
[5] अगला हिस्सा तक़ूअ के बाशिन्दों ने बनाया। लेकिन शहर के बड़े लोग अपने बुज़ुर्गों के तहत काम करने के लिए तय्यार न थे।
[6] यसाना का दरवाज़ा योयदा बिन फ़ासिह और मसुल्लाम बिन बसूदियाह की ज़िम्मादारी थी। उसे शहतीरों से बना कर उन्हों ने किवाड़, चटख़्नियाँ और कुंडे लगा दिए।
[7] अगला हिस्सा मलतियाह जिबऊनी और यदून मरूनोती ने खड़ा किया। यह लोग जिबऊन और मिस्फ़ाह के थे, वही मिस्फ़ाह जहाँ दरया-ए-फ़ुरात के मग़रिबी इलाक़े के गवर्नर का दार-उल-हुकूमत था।
[8] अगले हिस्से की मरम्मत एक सुनार बनाम उज़्ज़ीएल बिन हर्हियाह के हाथ में थी। अगले हिस्से पर एक इत्रसाज़ बनाम हननियाह मुक़र्रर था। इन लोगों ने फ़सील की मरम्मत ‘मोटी दीवार’ तक की।
[9] अगले हिस्से को रिफ़ायाह बिन हूर ने खड़ा किया। यह आदमी ज़िला यरूशलम के आधे हिस्से का अफ़्सर था।
[10] यदायाह बिन हरूमफ़ ने अगले हिस्से की मरम्मत की जो उस के घर के मुक़ाबिल था। अगले हिस्से को हत्तूश बिन हसब्नियाह ने तामीर किया।
[11] अगले हिस्से को तनूरों के बुर्ज तक मल्कियाह बिन हारिम और हस्सूब बिन पख़त-मोआब ने खड़ा किया।
[12] अगला हिस्सा सल्लूम बिन हल्लूहेश की ज़िम्मादारी थी। यह आदमी ज़िला यरूशलम के दूसरे आधे हिस्से का अफ़्सर था। उस की बेटियों ने उस की मदद की।
[13] हनून ने ज़नूह के बाशिन्दों समेत वादी के दरवाज़े को तामीर किया। शहतीरों से उसे बना कर उन्हों ने किवाड़, चटख़्नियाँ और कुंडे लगाए। इस के इलावा उन्हों ने फ़सील को वहाँ से कचरे के दरवाज़े तक खड़ा किया। इस हिस्से का फ़ासिला तक़रीबन 1,500 फ़ुट यानी आधा किलोमीटर था।
[14] कचरे का दरवाज़ा मल्कियाह बिन रैकाब की ज़िम्मादारी थी। यह आदमी ज़िला बैत-करम का अफ़्सर था। उस ने उसे बना कर किवाड़, चटख़्नियाँ और कुंडे लगाए।
[15] चश्मे के दरवाज़े की तामीर सल्लून बिन कुल्होज़ा के हाथ में थी जो ज़िला मिस्फ़ाह का अफ़्सर था। उस ने दरवाज़े पर छत बना कर उस के किवाड़, चटख़्नियाँ और कुंडे लगा दिए। साथ साथ उस ने फ़सील के उस हिस्से की मरम्मत की जो शाही बाग़ के पास वाले तालाब से गुज़रता है। यह वही तालाब है जिस में पानी नाले के ज़रीए पहुँचता है। सल्लून ने फ़सील को उस सीढ़ी तक तामीर किया जो यरूशलम के उस हिस्से से उतरती है जो ‘दाऊद का शहर’ कहलाता है।
[16] अगला हिस्सा नहमियाह बिन अज़्बुक़ की ज़िम्मादारी थी जो ज़िला बैत-सूर के आधे हिस्से का अफ़्सर था। फ़सील का यह हिस्सा दाऊद बादशाह के क़ब्रिस्तान के मुक़ाबिल था और मस्नूई तालाब और सूरमाओं के कमरों पर ख़त्म हुआ।
[17] ज़ैल के लावियों ने अगले हिस्सों को खड़ा किया : पहले रहूम बिन बानी का हिस्सा था। ज़िला क़ईला के आधे हिस्से के अफ़्सर हसबियाह ने अगले हिस्से की मरम्मत की।
[18] अगले हिस्से को लावियों ने बिन्नूई बिन हनदाद के ज़ेर-ए-निगरानी खड़ा किया जो ज़िला क़ईला के दूसरे आधे हिस्से पर मुक़र्रर था।
[19] अगला हिस्सा मिस्फ़ाह के सरदार अज़र बिन यशूअ की ज़िम्मादारी थी। यह हिस्सा फ़सील के उस मोड़ पर था जहाँ रास्ता असलाहख़ाने की तरफ़ चढ़ता है।
[20] अगले हिस्से को बारूक बिन ज़ब्बी ने बड़ी मेहनत से तामीर किया। यह हिस्सा फ़सील के मोड़ से शुरू हो कर इमाम-ए-आज़म इलियासिब के घर के दरवाज़े पर ख़त्म हुआ।
[21] अगला हिस्सा मरीमोत बिन ऊरियाह बिन हक़्क़ूज़ की ज़िम्मादारी थी और इलियासिब के घर के दरवाज़े से शुरू हो कर उस के कोने पर ख़त्म हुआ।
[22] ज़ैल के हिस्से उन इमामों ने तामीर किए जो शहर के गिर्द-ओ-नवाह में रहते थे।
[23] अगले हिस्से की तामीर बिनयमीन और हस्सूब के ज़ेर-ए-निगरानी थी। यह हिस्सा उन के घरों के सामने था। अज़रियाह बिन मासियाह बिन अननियाह ने अगले हिस्से की मरम्मत की। यह हिस्सा उस के घर के पास ही था।
[24] अगला हिस्सा बिन्नूई बिन हनदाद की ज़िम्मादारी थी। यह अज़रियाह के घर से शुरू हुआ और मुड़ते मुड़ते कोने पर ख़त्म हुआ।
[25] अगला हिस्सा फ़ालाल बिन ऊज़ी की ज़िम्मादारी थी। यह हिस्सा मोड़ से शुरू हुआ, और ऊपर का जो बुर्ज शाही महल से उस जगह निकलता है जहाँ मुहाफ़िज़ों का सहन है वह भी इस में शामिल था। अगला हिस्सा फ़िदायाह बिन परऊस
[26] और ओफ़ल पहाड़ी पर रहने वाले रब के घर के ख़िदमतगारों के ज़िम्मे था। यह हिस्सा पानी के दरवाज़े और वहाँ से निकले हुए बुर्ज पर ख़त्म हुआ।
[27] अगला हिस्सा इस बुर्ज से ले कर ओफ़ल पहाड़ी की दीवार तक था। तक़ूअ के बाशिन्दों ने उसे तामीर किया।
[28] घोड़े के दरवाज़े से आगे इमामों ने फ़सील की मरम्मत की। हर एक ने अपने घर के सामने का हिस्सा खड़ा किया।
[29] उन के बाद सदोक़ बिन इम्मेर का हिस्सा आया। यह भी उस के घर के मुक़ाबिल था। अगला हिस्सा समायाह बिन सकनियाह ने खड़ा किया। यह आदमी मशरिक़ी दरवाज़े का पहरेदार था।
[30] अगला हिस्सा हननियाह बिन सलमियाह और सलफ़ के छटे बेटे हनून के ज़िम्मे था। अगला हिस्सा मसुल्लाम बिन बरकियाह ने तामीर किया जो उस के घर के मुक़ाबिल था।
[31] एक सुनार बनाम मल्कियाह ने अगले हिस्से की मरम्मत की। यह हिस्सा रब के घर के ख़िदमतगारों और ताजिरों के उस मकान पर ख़त्म हुआ जो पहरे के दरवाज़े के सामने था। फ़सील के कोने पर वाक़े बालाखाना भी इस में शामिल था।
[32] आख़िरी हिस्सा भेड़ के दरवाज़े पर ख़त्म हुआ। सुनारों और ताजिरों ने उसे खड़ा किया।