[1] ज़ैल में नहमियाह बिन हकलियाह की रिपोर्ट दर्ज है। मैं अर्तख़्शस्ता बादशाह की हुकूमत के 20वें साल किस्लेव के महीने में सोसन के क़िले में था
[2] कि एक दिन मेरा भाई हनानी मुझ से मिलने आया। उस के साथ यहूदाह के चन्द एक आदमी थे। मैं ने उन से पूछा, “जो यहूदी बच कर जिलावतनी से यहूदाह वापस गए हैं उन का क्या हाल है? और यरूशलम शहर का क्या हाल है?”
[3] उन्हों ने जवाब दिया, “जो यहूदी बच कर जिलावतनी से यहूदाह वापस गए हैं उन का बहुत बुरा और ज़िल्लतआमेज़ हाल है। यरूशलम की फ़सील अब तक ज़मीनबोस है, और उस के तमाम दरवाज़े राख हो गए हैं।”
[4] यह सुन कर मैं बैठ कर रोने लगा। कई दिन मैं रोज़ा रख कर मातम करता और आसमान के ख़ुदा से दुआ करता रहा,
[5] “ऐ रब, आसमान के ख़ुदा, तू कितना अज़ीम और महीब ख़ुदा है! जो तुझे प्यार और तेरे अह्काम की पैरवी करते हैं उन के साथ तू अपना अह्द क़ाइम रखता और उन पर मेहरबानी करता है।
[6] मेरी बात सुन कर ध्यान दे कि तेरा ख़ादिम किस तरह तुझ से इल्तिमास कर रहा है। दिन रात मैं इस्राईलियों के लिए जो तेरे ख़ादिम हैं दुआ करता हूँ। मैं इक़्रार करता हूँ कि हम ने तेरा गुनाह किया है। इस में मैं और मेरे बाप का घराना भी शामिल है।
[7] हम ने तेरे ख़िलाफ़ निहायत शरीर क़दम उठाए हैं, क्यूँकि जो अह्काम और हिदायात तू ने अपने ख़ादिम मूसा को दी थीं हम उन के ताबे न रहे।
[8] लेकिन अब वह कुछ याद कर जो तू ने अपने ख़ादिम को फ़रमाया, ‘अगर तुम बेवफ़ा हो जाओ तो मैं तुम्हें मुख़्तलिफ़ क़ौमों में मुन्तशिर कर दूँगा,
[9] लेकिन अगर तुम मेरे पास वापस आ कर दुबारा मेरे अह्काम के ताबे हो जाओ तो मैं तुम्हें तुम्हारे वतन में वापस लाऊँगा, ख़्वाह तुम ज़मीन की इन्तिहा तक क्यूँ न पहुँच गए हो। मैं तुम्हें उस जगह वापस लाऊँगा जिसे मैं ने चुन लिया है ताकि मेरा नाम वहाँ सुकूनत करे।’
[10] ऐ रब, यह लोग तो तेरे अपने ख़ादिम हैं, तेरी अपनी क़ौम जिसे तू ने अपनी अज़ीम क़ुदरत और क़वी हाथ से फ़िद्या दे कर छुड़ाया है।
[11] ऐ रब, अपने ख़ादिम और उन तमाम ख़ादिमों की इल्तिमास सुन जो पूरे दिल से तेरे नाम का ख़ौफ़ मानते हैं। जब तेरा ख़ादिम आज शहन्शाह के पास होगा तो उसे कामयाबी अता कर। बख़्श दे कि वह मुझ पर रहम करे।” मैं ने यह इस लिए कहा कि मैं शहन्शाह का साक़ी था।