[1] यूहनान बिन क़रीह, यज़नियाह बिन हूसायाह और दीगर फ़ौजी अफ़्सर बाक़ी तमाम लोगों के साथ छोटे से ले कर बड़े तक
[2] यरमियाह नबी के पास आए और कहने लगे, “हमारी मिन्नत क़बूल करें और रब अपने ख़ुदा से हमारे लिए दुआ करें। आप ख़ुद देख सकते हैं कि गो हम पहले मुतअद्दिद लोग थे, लेकिन अब थोड़े ही रह गए हैं।
[3] दुआ करें कि रब आप का ख़ुदा हमें दिखाए कि हम कहाँ जाएँ और क्या कुछ करें।”
[4] यरमियाह ने जवाब दिया, “ठीक है, मैं दुआ में ज़रूर रब आप के ख़ुदा को आप की गुज़ारिश पेश करूँगा। और जो भी जवाब रब दे वह मैं लफ़्ज़-ब-लफ़्ज़ आप को बता दूँगा। मैं आप को किसी भी बात से महरूम नहीं रखूँगा।”
[5] उन्हों ने कहा, “रब हमारा वफ़ादार और क़ाबिल-ए-एतिमाद गवाह है। अगर हम हर बात पर अमल न करें जो रब आप का ख़ुदा आप की मारिफ़त हम पर नाज़िल करेगा तो वही हमारे ख़िलाफ़ गवाही दे।
[6] ख़्वाह उस की हिदायत हमें अच्छी लगे या बुरी, हम रब अपने ख़ुदा की सुनेंगे। क्यूँकि हम जानते हैं कि जब हम रब अपने ख़ुदा की सुनें तब ही हमारी सलामती होगी। इसी लिए हम आप को उस के पास भेज रहे हैं।”
[7] दस दिन गुज़रने के बाद रब का कलाम यरमियाह पर नाज़िल हुआ।
[8] उस ने यूहनान, उस के साथी अफ़्सरों और बाक़ी तमाम लोगों को छोटे से ले कर बड़े तक अपने पास बुला कर
[9] कहा, “आप ने मुझे रब इस्राईल के ख़ुदा के पास भेजा ताकि मैं आप की गुज़ारिश उस के सामने लाऊँ। अब उस का फ़रमान सुनें!
[10] ‘अगर तुम इस मुल्क में रहो तो मैं तुम्हें नहीं गिराऊँगा बल्कि तामीर करूँगा, तुम्हें जड़ से नहीं उखाड़ूँगा बल्कि पनीरी की तरह लगा दूँगा। क्यूँकि मुझे उस मुसीबत पर अफ़्सोस है जिस में मैं ने तुम्हें मुब्तला किया है।
[11] इस वक़्त तुम शाह-ए-बाबल से डरते हो, लेकिन उस से ख़ौफ़ मत खाना!’ रब फ़रमाता है, ‘उस से दह्शत न खाओ, क्यूँकि मैं तुम्हारे साथ हूँ और तुम्हारी मदद करके उस के हाथ से छुटकारा दूँगा।
[12] मैं तुम पर रहम करूँगा, इस लिए वह भी तुम पर रहम करके तुम्हें तुम्हारे मुल्क में वापस आने देगा।
[13] लेकिन अगर तुम रब अपने ख़ुदा की सुनने के लिए तय्यार न हो बल्कि कहो कि हम इस मुल्क में नहीं रहेंगे
[14] बल्कि मिस्र जाएंगे जहाँ न जंग देखेंगे, न जंगी नरसिंगे की आवाज़ सुनेंगे और न भूके रहेंगे
[15] तो रब का जवाब सुनो! ऐ यहूदाह के बचे हुए लोगो, रब इस्राईल का ख़ुदा फ़रमाता है कि अगर तुम मिस्र में जा कर वहाँ पनाह लेने पर तुले हुए हो
[16] तो यक़ीन जानो कि जिस तलवार और काल से तुम डरते हो वह वहीं मिस्र में तुम्हारा पीछा करता रहेगा। वहाँ जा कर तुम यक़ीनन मरोगे।
[17] जितने भी मिस्र जा कर वहाँ रहने पर तुले हुए हों वह सब तलवार, काल और मोहलक बीमारियों की ज़द में आ कर मर जाएंगे। जिस मुसीबत में मैं उन्हें डाल दूँगा उस से कोई नहीं बचेगा।’
[18] क्यूँकि रब्ब-उल-अफ़्वाज जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, ‘पहले मेरा सख़्त ग़ज़ब यरूशलम के बाशिन्दों पर नाज़िल हुआ। अगर तुम मिस्र जाओ तो मेरा ग़ज़ब तुम पर भी नाज़िल होगा। तुम्हें देख कर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाएंगे, और तुम उन की लान-तान और हिक़ारत का निशाना बनोगे। लानत करने वाला अपने दुश्मनों के लिए तुम्हारे जैसा अन्जाम चाहेगा। जहाँ तक तुम्हारे वतन का ताल्लुक़ है, तुम उसे आइन्दा कभी नहीं देखोगे।’
[19] ऐ यहूदाह के बचे हुए लोगो, अब रब आप से हमकलाम हुआ है। उस का जवाब साफ़ है। मिस्र को मत जाना! यह बात ख़ूब जान लें कि आज मैं ने आप को आगाह कर दिया है।
[20] आप ने ख़ुद अपनी जान को ख़तरे में डाल दिया जब आप ने मुझे रब अपने ख़ुदा के पास भेज कर कहा, ‘रब हमारे ख़ुदा से हमारे लिए दुआ करें। उस का पूरा जवाब हमें सुनाएँ, क्यूँकि हम उस की तमाम बातों पर अमल करेंगे।’
[21] आज मैं ने यह किया है, लेकिन आप रब अपने ख़ुदा की सुनने के लिए तय्यार नहीं हैं। जो कुछ भी उस ने मुझे आप को सुनाने को कहा है उस पर आप अमल नहीं करना चाहते।
[22] चुनाँचे अब जान लें कि जहाँ आप जा कर पनाह लेना चाहते हैं वहाँ आप तलवार, काल और मोहलक बीमारियों की ज़द में आ कर हलाक हो जाएंगे।”