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[1] एक दिन सिदक़ियाह बादशाह ने फ़श्हूर बिन मल्कियाह और मासियाह के बेटे सफ़नियाह इमाम को यरमियाह के पास भेज दिया। उस के पास पहुँच कर उन्हों ने कहा,

[2] “बाबल का बादशाह नबूकदनज़्ज़र हम पर हम्ला कर रहा है। शायद जिस तरह रब ने माज़ी में कई बार किया इस दफ़ा भी हमारी मदद करके नबूकदनज़्ज़र को मोजिज़ाना तौर पर यरूशलम को छोड़ने पर मज्बूर करे। रब से इस के बारे में दरयाफ़्त करें।” तब रब का कलाम यरमियाह पर नाज़िल हुआ,

[3] और उस ने दोनों आदमियों से कहा, “सिदक़ियाह को बताओ कि

[4] रब जो इस्राईल का ख़ुदा है फ़रमाता है, ‘बेशक शहर से निकल कर बाबल की मुहासरा करने वाली फ़ौज और उस के बादशाह से लड़ो। लेकिन मैं तुम्हें पीछे धकेल कर शहर में पनाह लेने पर मज्बूर करूँगा। वहाँ उस के बीच में ही तुम अपने हथियारों समेत जमा हो जाओगे।

[5] मैं ख़ुद अपना हाथ बढ़ा कर बड़ी क़ुदरत से तुम्हारे साथ लड़ूँगा, मैं अपने ग़ुस्से और तैश का पूरा इज़हार करूँगा, मेरा सख़्त ग़ज़ब तुम पर नाज़िल होगा।

[6] शहर के बाशिन्दे मेरे हाथ से हलाक हो जाएंगे, ख़्वाह इन्सान हों या हैवान। मोहलक वबा उन्हें मौत के घाट उतार देगी।’

[7] रब फ़रमाता है, ‘इस के बाद मैं यहूदाह के बादशाह सिदक़ियाह को उस के अफ़्सरों और बाक़ी बाशिन्दों समेत बाबल के बादशाह नबूकदनज़्ज़र के हवाले कर दूँगा। वबा, तलवार और काल से बचने वाले सब अपने जानी दुश्मन के क़ाबू में आ जाएंगे। तब नबूकदनज़्ज़र बेरहमी से उन्हें तलवार से मार देगा। न उसे उन पर तरस आएगा, न वह हमदर्दी का इज़हार करेगा।’

[8] इस क़ौम को बता कि रब फ़रमाता है, ‘मैं तुम्हें अपनी जान को बचाने का मौक़ा फ़राहम करता हूँ। इस से फ़ाइदा उठाओ, वर्ना तुम मरोगे।

[9] अगर तुम तलवार, काल या वबा से मरना चाहो तो इस शहर में रहो। लेकिन अगर तुम अपनी जान को बचाना चाहो तो शहर से निकल कर अपने आप को बाबल की मुहासरा करने वाली फ़ौज के हवाले करो। जो कोई यह करे उस की जान छूट जाएगी।’

[10] रब फ़रमाता है, ‘मैं ने अटल फ़ैसला किया है कि इस शहर पर मेहरबानी नहीं करूँगा बल्कि इसे नुक़्सान पहुँचाऊँगा। इसे शाह-ए-बाबल के हवाले कर दिया जाएगा जो इसे आग लगा कर तबाह करेगा।’

[11] यहूदाह के शाही ख़ानदान से कह, ‘रब का कलाम सुनो!

[12] ऐ दाऊद के घराने, रब फ़रमाता है कि हर सुब्ह लोगों का इन्साफ़ करो। जिसे लूट लिया गया हो उसे ज़ालिम के हाथ से बचाओ! ऐसा न हो कि मेरा ग़ज़ब तुम्हारी शरीर हरकतों की वजह से तुम पर नाज़िल हो कर आग की तरह भड़क उठे और कोई न हो जो उसे बुझा सके।

[13] रब फ़रमाता है कि ऐ यरूशलम, तू वादी के ऊपर ऊँची चटान पर रह कर फ़ख़र करती है कि कौन हम पर हम्ला करेगा, कौन हमारे घरों में घुस सकता है? लेकिन अब मैं ख़ुद तुझ से निपट लूँगा।

[14] रब फ़रमाता है कि मैं तुम्हारी हरकतों का पूरा अज्र दूँगा। मैं यरूशलम के जंगल में ऐसी आग लगा दूँगा जो इर्दगिर्द सब कुछ भस्म कर देगी’।”

यरमियाह — Chapters