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[1] चुनाँचे बादशाह और हामान आस्तर मलिका की ज़ियाफ़त में शरीक हुए।

[2] मै पीते वक़्त बादशाह ने पहले दिन की तरह अब भी पूछा, “आस्तर मलिका, अब बताएँ, आप क्या चाहती हैं? वह आप को दिया जाएगा। अपनी दरख़्वास्त पेश करें, क्यूँकि मैं सल्तनत के आधे हिस्से तक आप को देने के लिए तय्यार हूँ।”

[3] मलिका ने जवाब दिया, “अगर बादशाह मुझ से ख़ुश हों और उन्हें मेरी बात मन्ज़ूर हो तो मेरी गुज़ारिश पूरी करें कि मेरी और मेरी क़ौम की जान बची रहे।

[4] क्यूँकि मुझे और मेरी क़ौम को उन के हाथ बेच डाला गया है जो हमें तबाह और हलाक करके नेस्त-ओ-नाबूद करना चाहते हैं। अगर हम बिक कर ग़ुलाम और लौंडियाँ बन जाते तो मैं ख़ामोश रहती। ऐसी कोई मुसीबत बादशाह को तंग करने के लिए काफ़ी न होती।”

[5] यह सुन कर अख़स्वेरुस ने आस्तर से सवाल किया, “कौन ऐसी हरकत करने की जुरअत करता है? वह कहाँ है?”

[6] आस्तर ने जवाब दिया, “हमारा दुश्मन और मुख़ालिफ़ यह शरीर आदमी हामान है!” तब हामान बादशाह और मलिका से दह्शत खाने लगा।

[7] बादशाह आग-बगूला हो कर खड़ा हो गया और मै को छोड़ कर महल के बाग़ में टहलने लगा। हामान पीछे रह कर आस्तर से इल्तिजा करने लगा, “मेरी जान बचाएँ” क्यूँकि उसे अन्दाज़ा हो गया था कि बादशाह ने मुझे सज़ा-ए-मौत देने का फ़ैसला कर लिया है।

[8] जब बादशाह वापस आया तो क्या देखता है कि हामान उस सोफ़े पर गिर गया है जिस पर आस्तर टेक लगाए बैठी है। बादशाह गरजा, “क्या यह आदमी यहीं महल में मेरे हुज़ूर मलिका की इस्मतदरी करना चाहता है?” जूँ ही बादशाह ने यह अल्फ़ाज़ कहे मुलाज़िमों ने हामान के मुँह पर कपड़ा डाल दिया।

[9] बादशाह का ख़्वाजासरा ख़र्बूनाह बोल उठा, “हामान ने अपने घर के क़रीब सूली तय्यार करवाई है जिस की ऊँचाई 75 फ़ुट है। वह मर्दकी के लिए बनवाई गई है, उस शख़्स के लिए जिस ने बादशाह की जान बचाई।” बादशाह ने हुक्म दिया, “हामान को उस से लटका दो।”

[10] चुनाँचे हामान को उसी सूली से लटका दिया गया जो उस ने मर्दकी के लिए बनवाई थी। तब बादशाह का ग़ुस्सा ठंडा हो गया।

आस्तर — Chapters