[1] यीशु पवित्र आत्मा सँ परिपूर्ण भऽ यरदन नदी सँ घुमलाह। तखन पवित्र आत्मा हुनका निर्जन क्षेत्र मे लऽ गेलथिन,
[2] जतऽ चालिस दिन धरि शैतान हुनका सँ पाप करयबाक प्रयत्न कयलकनि। एहि चालिस दिन मे ओ किछु नहि खयलनि, और एतेक दिन बितला पर हुनका बहुत भूख लागल छलनि।
[3] तँ शैतान हुनका कहलकनि, “तोँ जँ परमेश्वरक पुत्र छह तँ एहि पाथर केँ रोटी बनि जयबाक आज्ञा दहक।”
[4] यीशु उत्तर देलथिन, “धर्मशास्त्र मे लिखल अछि जे, मनुष्य मात्र रोटिए सँ नहि जीवित रहत।”
[5] तखन शैतान हुनका ऊँच स्थान मे लऽ जा कऽ एके क्षण मे संसारक सभ राज्य देखा देलकनि
[6] आ कहलकनि, “हम तोरा एहि सभ राज्यक अधिकार आ वैभव दऽ देबह, कारण ई सभ हमरे जिम्मा मे दऽ देल गेल अछि, आ हम जकरा ककरो चाहबैक तकरा दऽ सकैत छिऐक।
[7] तेँ तोँ जँ हमर उपासना करबह तँ ई सभ तोहर भऽ गेलह।”
[8] यीशु उत्तर देलथिन, “धर्मशास्त्र मे लिखल अछि, ‘तोँ अपना प्रभु-परमेश्वरेक उपासना करहुन और मात्र हुनके सेवा करहुन।’”
[9] शैतान हुनका यरूशलेम लऽ जा कऽ मन्दिरक सभ सँ ऊँच स्थान पर ठाढ़ कऽ कऽ कहलकनि, “तोँ जँ परमेश्वरक पुत्र छह, तँ एतऽ सँ नीचाँ कुदि जाह,
[10] कारण धर्मशास्त्र मे लिखल अछि जे, ‘परमेश्वर तोहर रक्षा करबाक लेल स्वर्गदूत सभ केँ आज्ञा देथिन,
[11] और ओ सभ अपना कोरा मे तोरा लोकि लेथुन, जाहि सँ पयर मे पाथर सँ चोट नहि लगतह।’”
[12] यीशु उत्तर देलथिन, “धर्मशास्त्रक कथन इहो अछि, ‘अपन प्रभु-परमेश्वरक जाँच नहि करहुन।’”
[13] शैतान जखन हुनका सँ सभ ढंग सँ पाप करयबाक प्रयत्न कऽ चुकल तँ ओ ओतऽ सँ चल गेल आ दोसर उपयुक्त अवसरक ताक मे रहऽ लागल।
[14] यीशु गलील प्रदेश मे घूमि कऽ चल अयलाह, और पवित्र आत्माक सामर्थ्य हुनका संग छलनि। ओहि क्षेत्रक सभ ठाम हुनकर चर्चा पसरि गेलनि।
[15] ओ सभाघर सभ मे शिक्षा दैत छलथिन, आ सभ लोक हुनकर प्रशंसा करैत छलनि।
[16] एक दिन यीशु नासरत नगर अयलाह, जतऽ हुनकर पालन-पोषण भेल छलनि। ओ अपना आदतक अनुसार विश्राम-दिन सभाघर मे गेलाह। ओ धर्मशास्त्रक पाठ पढ़बाक लेल ठाढ़ भेलाह,
[17] तँ हुनका परमेश्वरक प्रवक्ता यशायाहक पुस्तक देल गेलनि। ओ पुस्तक खोलि कऽ ओहि ठाम सँ पढ़ऽ लगलाह जतऽ लिखल अछि जे,
[18] “प्रभुक आत्मा हमरा पर छथि; किएक तँ ओ गरीब सभ केँ शुभ समाचार सुनयबाक लेल हमर अभिषेक कयने छथि। ओ हमरा पठौलनि अछि जे हम कैदी सभक लेल मुक्तिक घोषणा करी, आन्हर सभ केँ कहिऐक जे, ‘तोँ सभ आब देखि सकैत छह,’ सताओल लोक सभ केँ छुटकारा दिआबी
[19] और एहि बातक घोषणा करी जे, प्रभुक ओ युग आबि गेल अछि जाहि मे ओ अपन करुणा प्रगट करताह।”
[20] ई पाठ पढ़लाक बाद यीशु पुस्तक बन्द कऽ कऽ सभाघरक सेवक केँ दऽ देलथिन आ बैसि गेलाह। सभ केओ एकटक लगा कऽ हुनका दिस ताकि रहल छल।
[21] तखन ओ बजलाह, “आइ धर्मशास्त्रक ई लेख अहाँ सभक समक्ष मे पूरा भऽ गेल।”
[22] सभ केओ हुनकर प्रशंसा कयलकनि और आश्चर्यित भेल जे ओ एतेक नीक-नीक बात सभ कहैत छथि। सभ कहैत छल, “की ई यूसुफेक बेटा नहि छथि?”
[23] यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ अवश्य हमरा ई कहबी सुनायब जे, ‘यौ वैद्यजी, पहिने अपना केँ नीक करू!’ आ ई कहब जे ‘एतौ अपना गाम मे ओ काज सभ करू जकरा बारे मे सुनैत छी जे अहाँ कफरनहूम मे कयलहुँ।’
[24] हम अहाँ सभ केँ सत्ये कहैत छी जे, परमेश्वरक कोनो प्रवक्ता केँ अपना गाम मे स्वीकार नहि कयल जाइत छैक।
[25] हमर बात सुनू! अहूँ सभ तँ जनिते छी जे एलियाहक समय मे जखन साढ़े तीन वर्ष धरि वर्षा नहि भेल आ सौंसे देश मे भयंकर अकाल पड़ि गेल, तँ ओहि समय मे इस्राएल मे बहुते विधवा रहय,
[26] मुदा परमेश्वर एलियाह केँ ओकरा सभ मे सँ ककरो लग मदति देबाक लेल वा लेबाक लेल नहि पठौलथिन—ओ हुनका सीदोन क्षेत्रक सारफत गाम मे रहऽ वाली एकटा विधवाक ओहिठाम पठौलथिन।
[27] फेर परमेश्वरक प्रवक्ता एलीशाक समय मे इस्राएल मे बहुते कुष्ठ-रोगी छल, मुदा ओकरा सभ मे सँ ककरो नीक नहि कयल गेलैक—मात्र सीरिया प्रदेशक निवासी नामान केँ।”
[28] ई बात सुनि सभाघरक लोक सभ तिलमिला उठल।
[29] ओ सभ उठि कऽ यीशु केँ नगर सँ बाहर अनलकनि, और जाहि पहाड़ पर ओ नगर बसल छल, तकर कनगी पर लऽ गेलनि जे एहि ठाम सँ एकरा नीचाँ धकेलि दी।
[30] मुदा ओ ओहि भीड़ मे सँ बहरा कऽ चल जाइत रहलाह।
[31] तखन यीशु कफरनहूम गेलाह, जे गलील प्रदेशक एक नगर अछि, और विश्राम-दिन मे लोक सभ केँ उपदेश देबऽ लगलथिन।
[32] हुनकर शिक्षा सँ लोक सभ चकित भेल, कारण, ओ अधिकारक संग शिक्षा दैत छलाह।
[33] सभाघर मे एक आदमी छल जे दुष्टात्मा, अर्थात् अशुद्ध आत्मा, सँ ग्रसित छल। ओ जोर सँ चिकरि कऽ बाजल,
[34] “यौ! नासरतक निवासी यीशु! अहाँ केँ हमरा सभ सँ कोन काज? हमरा सभ केँ नष्ट करऽ अयलहुँ की? हम अहाँ केँ चिन्हैत छी। अहाँ परमेश्वरक पवित्र दूत छी।”
[35] यीशु दुष्टात्मा केँ डाँटि कऽ कहलथिन, “चुप रह! तोँ एकरा मे सँ निकल!” तखन ओ दुष्टात्मा ओहि आदमी केँ सभक सामने मे पटकि देलकैक आ बिनु हानि पहुँचौने ओकरा मे सँ निकलि गेल।
[36] एहि पर सभ लोक चकित होइत एक-दोसर केँ कहऽ लागल जे, “ई केहन उपदेश अछि? ई आदमी शक्ति आ अधिकारक संग दुष्टात्मा सभ केँ आज्ञा दैत छथि और ओ सभ निकलि जाइत अछि!”
[37] एहि सभ सँ हुनकर चर्चा ओहि क्षेत्रक चारू कात पसरि गेलनि।
[38] यीशु सभाघर सँ बाहर भऽ कऽ सिमोनक ओहिठाम गेलाह। सिमोनक सासु केँ बहुत जोर बोखार छलनि। लोक सभ हुनका मदति करबाक लेल यीशु सँ विनती कयलकनि।
[39] सिमोनक सासुक लग मे जा कऽ यीशु बोखार केँ उतरि जयबाक आज्ञा देलथिन, तँ हुनकर बोखार उतरि गेलनि। ओ तुरत उठि कऽ हिनका सभक सेवा-सत्कार करऽ मे लागि गेलीह।
[40] सूर्यास्त भेला पर जकरा-जकरा ओहिठाम विभिन्न बिमारी सँ पीड़ित लोक सभ छलैक, से सभ ओकरा सभ केँ यीशु लग आनऽ लागल। प्रत्येक पर हाथ राखि कऽ ओ ओकरा सभ केँ स्वस्थ कऽ देलथिन।
[41] बहुत लोक मे सँ दुष्टात्मा सभ सेहो एना चिकरि कऽ कहैत निकलि आयल जे, “अहाँ परमेश्वरक पुत्र छी!” मुदा ओ ओहि दुष्टात्मा सभ केँ डँटलथिन आ बाजऽ नहि देलथिन, कारण ओ सभ जनैत छल जे ई उद्धारकर्ता-मसीह छथि।
[42] भोर भेला पर यीशु कोनो एकान्त स्थान मे चल गेलाह। लोक सभ तकैत-तकैत हुनका लग पहुँचल आ हुनका रोकलकनि जे, अहाँ हमरा सभ केँ छोड़ि कऽ नहि जाउ।
[43] मुदा ओ उत्तर देलथिन, “हमरा तँ परमेश्वरक राज्यक शुभ समाचार दोसरो-दोसरो नगर मे सुनयबाक अछि, किएक तँ हम एही लेल पठाओल गेल छी।”
[44] अतः ओ यहूदिया प्रदेशक सभाघर सभ मे प्रचारक काज करैत रहलाह।